करनाल जिले की अनाज मंडियों में हुए धान घोटाले के आरोपों में सीआईए-3 ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनमें से डीएफएससी को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लिया है। अब सीआईए-3 इन आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी और वहां से इन्हें रिमांड पर लिया जाएगा या फिर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा, वह देखने वाले बात होगी। फिलहाल पुलिस एक्शन मोड में है। करनाल मंडी की सचिव आशा रानी, जुंडला मंडी के सचिव दीपक कुमार और असंध मंडी के सचिव कृष्ण धनखड़ को धान घोटाले के आरोपों में आज गिरफ्तार किया गया है। हालांकि आशा रानी पहले हाईकोर्ट से जमानत भी ले चुकी है। इसके साथ ही पहले से गिरफ्तार डीएफएससी अनिल कुमार को पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। करनाल पुलिस पीआरओ जितेंद्र कुमार ने बताया कि 4 आरोपियों को धान घोटाले में गिरफ्तार किया है। इस मामले की सीआईए-3 ने कार्रवाई की है और आज इन सभी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोर्ट में पेश करने के बाद ही पता चल पाएगा कि आरोपियों को जेल भेजा जाएगा या फिर रिमांड पर लिया जाएगा। धान घोटाले में ये अधिकारी भी हो चुके है गिरफ्तार
करनाल में धान खरीद और भंडारण से जुड़े करीब 7 करोड़ रुपए के घोटाले में पुलिस 5 आरोपियों को पहले भी गिरफ्तार कर चुकी है। जिसमें देवेंद्र कुमार इंस्पेक्टर फूड सप्लाई विभाग तरावड़ी, रणधीर सिंह, इंस्पेक्टर फूड सप्लाई विभाग इंद्री, प्रमोद कुमार हैफेड मैनेजर असंध, दर्शन सिंह हैफेड मैनेजर निसिंग और प्रदीप टेक्निकल अस्सिटेंट वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन इंद्री शामिल है। अब ये सभी जेल की सलाखों के पीछे है। बता दें कि इस मामले में एसआईटी 9 जनवरी 2026 से जांच कर रही थी। फर्जी धान खरीद दिखाकर किया गबन पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सरकारी रिकॉर्ड में धान की खरीद और स्टॉक पूरा दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में कई राइस मिलों और वेयरहाउस में धान मौजूद ही नहीं था। कागजों में फर्जी बिल, खरीद रजिस्टर और स्टॉक एंट्री तैयार की गई, जिससे सब कुछ सही प्रतीत हो रहा था। इसी फर्जीवाड़े के जरिए करीब 7 करोड़ रुपए के धान का गबन किया गया। राइस मिलों में भी फर्जी स्टॉक दिखाया एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि कई राइस मिलों में कागजों में धान का स्टॉक दिखाया गया, जबकि मौके पर धान नहीं मिला। अधिकारियों की मिलीभगत से यह फर्जी स्टॉक तैयार किया गया, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में किसी तरह की कमी न दिखे। इसी आधार पर लंबे समय तक गबन चलता रहा। पद का दुरुपयोग कर रची साजिश पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आपसी मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया। नियमों और मानकों को ताक पर रखकर धान की खरीद, भंडारण और आगे की प्रक्रिया को कागजों में सही दिखाया गया। रिकॉर्ड, दस्तावेज और तकनीकी जांच के आधार पर इन अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। मिलीभगत से सरकार को करोड़ों का नुकसान जांच में यह भी सामने आया कि धान की खरीद, भंडारण और आगे की प्रक्रिया में तय नियमों का पालन नहीं किया गया। अधिकारियों ने आपस में तालमेल बनाकर सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है। दस्तावेजी साक्ष्यों और रिकॉर्ड से आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई है। आशा रानी पर हुआ था मामला दर्ज, फिर हुई थी सस्पेंड मंडी में फर्जी गेट पास के जरिए धान की खरीद दिखाने और करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोपों में करनाल की मंडी सचिव आशा रानी के खिलाफ सिटी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनके साथ ही अन्य कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान उनको सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि उन्हें गिरफ्तारी से बचाने के लिए हाई कोर्ट ने रोक (स्टे) लगा दी थी। घोटाले की जांच में अब तक कई और लोग भी पकड़े गए हैं। मंडी के सुपरवाइजर पंकज तुली की पहले गिरफ्तारी हुई, बाद में उसकी मौत हो गई