रिशु राज सिंह | चंडीगढ़ आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि चुनावी साल आते ही नगर निगम का बजट बदल जाता है। वार्ड डेवलपमेंट फंड और सड़कों पर खर्च में तेजी आ जाती है। दिसंबर 2026 में होने वाले नगर निगम चुनाव से पहले 2026-27 के बजट में वार्ड डेवलपमेंट फंड का बजट 30.80 करोड़ रुपये रखा गया है, जो अब तक का सबसे अधिक है। राजनीतिक जानकार कहते हैं, चुनावी साल में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाई जाती है ताकि मतदाताओं तक सीधे संदेश पहुंचे। वार्डों में सड़कें, गलियां और छोटे विकास कार्य तेजी से पूरे किए जाते हैं। निगम में हर पार्षद को हर साल 80 लाख रुपये वार्ड डेवलपमेंट फंड मिलता है। इस बार यह 1 करोड़ कर दिया गया है। इस फंड का सबसे ज्यादा उपयोग चुनावी साल में ही होता है। 2016-17 के चुनावी वर्ष में 7.42 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 2021-22 के चुनावी साल में 15.86 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, चुनाव के बाद के वर्षों में यह खर्च घटता दिखाई देता है। 2020-21 में केवल 3.34 करोड़ खर्च हुए थे, जबकि 2025-26 में 31 दिसंबर तक सिर्फ 4.02 करोड़ रुपये। निगम बनने के समय पार्षदों को 5 लाख रुपए प्रति वर्ष मिलते थे। धीरे-धीरे यह बढ़ता गया। कुछ साल पहले तक यह 40 लाख था। ये पहली बार हुआ… } मेयर ने अपनी सीट से नहीं, बल्कि पोडियम से भाषण दिया } बजट के लिए हाउस को ट्राई कलर से सजाया गया } यूट्यूब पर बजट लाइव किया गया विकास के लिए 610 करोड़, 300 ही खर्च कर पाएगा निगम… बजट में विकास के लिए 610 करोड़ रखे हैं लेकिन निगम खर्च करीब 300 करोड़ ही कर पाएगा। क्योंकि जरूरी खर्चे निकालने के बाद निगम के पास विकास कार्यों के लिए 291 करोड़ ही हैं। निगम की तैयारी है कि वो पहले छह महीने में 300 करोड़ खर्च करके साल के अंत में केंद्र से रिवाइज्ड बजट में बाकी 310 करोड़ रुपये मांगे। निगम ने पिछले साल के मुकाबले अपनी कमाई करीब 50 करोड़ बढ़ाई है। एमसी हाउस में पहली बार बजट बैग लिए नजर आए मेयर। इस साल जनता के बीच जाना है वार्ड डेवलपमेंट फंड वर्ष खर्च (करोड़ में) 2016-17 (चुनावी साल)7.42 करोड़ 2017-18 5.44 करोड़ 2018-19 6.42 करोड़ 2019-20 5.40 करोड़ 2020-21 3.34 करोड़ 2021-22 (चुनावी साल) 15.86 करोड़ 2022-23 14.53 2023-24 12.09 करोड़ 2024-25 6.92 करोड़ 2025-26 (31 दिसंबर 2025 तक)4.02 करोड़ 2026-27 (चुनावी साल)30.80 करोड़ सड़कें बनने का लेखा-जोखा वर्ष खर्च (करोड़ में) 2016-17 (चुनावी साल) 47.13 करोड़ 2017-18 40.79 करोड़ 2018-19 32.45 करोड़ 2019-20 35.76 करोड़ 2020-21 27.45 करोड़ 2021-22 (कोविड) (चुनावी साल) 14.64 करोड़ 2022-23 43.95 करोड़ 2023-24 39.51 करोड़ 2024-25 27.46 करोड़ 2025-26 44.10 करोड़ 2026-27 (चुनावी साल) 135 करोड़ मेयर सौरभ जोशी ने पेश किया बजट, बोले- ये सिर्फ इस साल का नहीं, चंडीगढ़ 2047 का विजन नगर निगम इन कार्यों पर सबसे ज्यादा खर्च (करोड़ में) हेड्स पिछले साल चुनावी साल बढ़ोतरी सड़क 44.10 135 206% वॉटर सप्लाई मजबूती 3.50 55 1471% मशीनरी अपग्रेड 1.25 54.20 4236% स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज 11 47 327% सीवरेज सिस्टम 5 41 720% नॉन रेजिडेंशियल बिल्डिंग 7.25 36.93 409% सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 17 32.50 91% गौशालाओं का विकास 7.26 27.61 280% जरूरी खर्चे (करोड़ में) भत्ते 323.89 338.65 4.50% सैलरी 271.60 261.23 -3.8% बिजली के बिल 127.33 136.60 7% माइनर वर्क 131.14 129.25 -1.4% पेंशन 56 58 3.5% साफ-सफाई 53 54 1.8% यहां से कमाई का लक्ष्य (करोड़ में) पानी के बिल 160 16 5% प्रॉपर्टी टैक्स 90 100 11% पार्किंग फीस 20 30 50% गार्बेज कलेक्शन 30 30 0% विज्ञापन फीस 1 20 1900% 55 करोड़ रु. पानी की लाइन बदलने पर, 88 करोड़ सीवरेज-स्टॉर्म वॉटर के लिए 1-1 करोड़ रुपए हर गांव के लिए, 135 करोड़ से 600 किमी. सड़कों की रिकार्पेटिंग होगी डेवलपमेंट के बजट में 304% इजाफा: इस साल 610 करोड़, पिछले साल थे 151 करोड़ मेयर सौरभ जोशी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1712 करोड़ का बजट पेश करते हुए चंडीगढ़ को एआई सिटी बनाने की घोषणा की। इसमें सैलरी-भत्तों और अन्य खर्चों के लिए 1102 करोड़ और डेवलपमेंट वर्क के लिए 610 करोड़ रुपए हैं। पिछले साल डेवलपमेंट पर 151 करोड़ का बजट था। 459 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। यह 304 फीसदी बढ़ोतरी है। मेयर ने कहा कि यह सिर्फ एक साल का बजट नहीं, बल्कि चंडीगढ़ 2047 का रोडमैप है। एआई आधारित सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल फाइल ट्रैकिंग, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट मॉनिटरिंग और ऑनलाइन सेवाएं लाई जाएंगी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए 10 करोड़ का प्रावधान रखा है। पहली बार अपनी कुर्सी नहीं, बल्कि पोडियम से भाषण दे रहे मेयर ने कहा- राजस्व बढ़ाने के लिए प्रॉपर्टी टैक्स की वन टाइम सेटलमेंट स्कीम, डिजिटल टैक्स कलेक्शन, स्मार्ट पार्किंग मॉडल और विज्ञापन नीति लागू की जाएगी। पीपीपी मॉडल के तहत मल्टीलेवल पार्किंग, कम्युनिटी सेंटर और ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना है। वार्ड डेवलपमेंट फंड (प्रति पार्षद) को 80 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया है। हर गांव के लिए भी एक-एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई। इस साल 600 किमी सड़कों का निर्माण और रीकारपेटिंग होगी। इस पर 135 करोड़ खर्च होंगे। पानी की लाइनों को बदलने पर 55 करोड़, सीवरेज व स्ट्रॉम वाटर के लिए 88 करोड़ खर्च होगा। गौशाला का बजट 7 करोड़ से बढ़ाकर 27 करोड़ किया गया है। चौथी डीएफसी की सिफारिशों से केंद्र का इंकार, 456 करोड़ का नुकसान नगर निगम हर साल चौथी दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुसार बजट बनाता था। इसमें यूटी के कुल बजट का 30% निगम को देने की बात कही गई थी। अब तक केंद्र ने इसके लिए न तो सीधे हां किया था और ना ही मना। इसलिए हर साल इसी अनुसार 1700 से 1800 करोड़ का बजट बनाता था। अब केंद्र ने साफ इंकार कर दिया है। इस साल निगम ने तीसरी दिल्ली फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुसार बजट बनाया है। जिसमें कुल बजट का 17% निगम को देने की सिफारिश है। इसलिए निगम ने प्रशासन ने ग्रांट-इन-एड में 1248 करोड़ मांगे हैं। प्रशासन सिर्फ 850 करोड़ ही देगा, जो 13% है। कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि भले डीएफसी की सिफारिशों अनुसार बजट नहीं मिल रहा है लेकिन निगम को अपना हक नहीं छोड़ना चाहिए। 4 वित्त वर्ष में सड़कों पर 155 करोड़, इस बार 1 साल के ही 135 करोड़ रखे