लुधियाना जिले के एक छोटे से गांव धरावली में रहने वाले गुरजीत सिंह, जिन्हें लाली के नाम से भी जाना जाता है, 50 साल की उम्र में भी अपनी ताकत से सबको हैरान कर देते हैं। जहां इस उम्र में लोग जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं, वहीं लाली अपनी पीठ पर 200 किलो की बोरियां ऐसे उठाते हैं जैसे कि वे कोई खिलौना हों। पूरे इलाके में गुरजीत सिंह की ताकत का लोहा माना जाता है। उन्होंने अपनी बाजुओं के दम पर कई बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं। एक समय था जब वे 2 क्विंटल 50 किलो वजन बड़ी आसानी से उठा लेते थे। अब 50 साल की उम्र में भी, वे 200 किलो (2 क्विंटल) वजन अपनी पीठ पर लादकर चलते हैं, जो उनकी असाधारण शक्ति का प्रमाण है। पंजाब व आसापस के राज्यों दिखा चुके हैं कारनामा लाली ने न केवल पंजाब बल्कि राज्य के बाहर भी कई शक्ति प्रदर्शन टूर्नामेंटों में भाग लिया और अपनी ताकत का लोहा मनवाया। लाली का यह सफर आज का नहीं बल्कि साढ़े तीन दशक पुराना है। उन्होंने महज 15 साल की छोटी सी उम्र में ही मेहनत मशक्कत शुरू कर दी थी। पिछले 35 वर्षों से वे लगातार बोरियां ढोने का काम कर रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ रोजी-रोटी का साधन नहीं बल्कि एक तपस्या है। देखे फोटो…..
देसी डाइट का कमाल लाली की असली ताकत का राज किसी महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट या जिम की नहीं बल्की शुद्ध देसी दूध और घी है। वे आज भी टूर्नामेंट से 15-20 दिन पहले घर पर ही कड़ी मेहनत और अभ्यास करते हैं।एक साधारण और गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले गुरजीत सिंह का जीवन सादगी की मिसाल है। वे खुद खेतों में पसीना बहाकर परिवार का पेट पालते हैं। उनका बेटा एक दुकान पर काम कर घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाता है वहीं उनकी बेटियां पढ़-लिखकर अपना भविष्य संवार रही हैं। उनका पूरा परिवार मेहनत और ईमानदारी की कमाई पर विश्वास रखता है। युवाओं को संदेश- ‘नशे को कहे ना, दूध-घी को कहे हां’ आज की युवा पीढ़ी जो शॉर्टकट और नशों की गिरफ्त में फंस रही है, उन्हें लाली बड़े स्पष्ट शब्दों में संदेश देते हैं नशे की दलदल से दूर रहो। अगर शरीर बनाना है तो अच्छी खुराक खाओ, कबड्डी खेलो और मेहनत करो। जो ताकत पसीने और दूध-घी में है,वह किसी नशे में नहीं।