अंग्रेजी की एक कहावत है ‘अर्ली बर्ड कैचेज द वर्म’ यानी जो पहले कदम उठाता है, वही अवसर पाता है। पंजाब में 2027 में होने वाले चुनाव को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने यही रणनीति अपनाई है। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने माइक्रो मैनेजमेंट की प्लानिंग करते हुए पहले ही पंजाब बचाओ रैलियां शुरू कर दी हैं। जिसकी अगुआई भी खुद सुखबीर ही कर रहे हैं। इसके उलट कांग्रेस अभी चुनावी मोड में नजर नहीं आ रही। वह अपनी ही गुटबाजी और नेताओं की नाराजगी से जूझती नजर आ रही है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) भी चुनावी मोड में है लेकिन अभी प्रॉपर प्लानिंग नजर नहीं आ रही। अब बात करें अकाली दल की तो पंजाब बचाओ रैली के पहले फेज को सियासी गुणा गणित से तोलमोल कर लॉन्च किया गया है। सुखबीर की रैलियों का पैटर्न देखें तो वह पहले फेज की 28 रैलियों में से उन सीटों को शामिल किया गया है, जहां अकाली दल सबसे ज्यादा अंतर से हारा। इसमें 10,000+ मार्जिन को बेस बनाया गया है। सुखबीर की कोशिश है कि उन सीटों पर ज्यादा कैंपेन करें, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी को ज्यादा वोटों से हार मिली। एक और रणनीति है कि अकाली दल ने इसमें सिख और दलितों के साथ मुस्लिम वोट बैंक को फोकस किया है। यही वजह है कि कैंपेन की लॉन्चिग अहमदिया मुसलमानों के गढ़ कादियां से की गई। दूसरी रैली पंथक वोट बैंक वाली सीट खेमकरण में की। रैली के दौरान सुखबीर सबसे ज्यादा AAP को अटैक कर रहे हैं। पंजाबियों पर दिल्ली वालों के राज का नैरेटिव सेट कर रहे हैं, इसी वजह से 2017 में AAP पंजाब में सत्ता हासिल नहीं कर पाई थी। दूसरे नंबर पर कांग्रेस पर हमला कर रहे हैं। एक रोचक बात और है कि BJP को लेकर सुखबीर नरम रुख अपना रहे हैं। वहीं शहरी इलाकों में अकाली दल की कोई रैली भी नहीं रखी। साफ है कि BJP के साथ अकाली दल के गठबंधन की गुंजाइश अभी बनी हुई है। अकाली दल की पहले फेज की रैलियों का पैटर्न 3 वोट बैंक अकाली दल के निशाने पर