जगमोहन में बांके बिहारी, गर्भग्रह में लगा था ताला:गोस्वामियों में विवाद, कमेटी अध्यक्ष बोले- इससे श्रद्धालुओं को आसानी से होंगे दर्शन

मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में भगवान के गर्भगृह और जगमोहन में रहने को लेकर विवाद चल रहा है। भगवान आज सुबह से जगमोहन यानी गर्भगृह के बाहर के परिसर में विराजमान हैं। वहीं एक दिन पहले इसी विवाद के चलते भगवान की गर्भगृह में ताला लगा दिया गया था। जिसके बाद गोस्वामी और वहां मौजूद श्रद्धालु भड़क गए थे। 30 मिनट तक मंदिर परिसर में हंगामा चला। तब जाकर मंदिर के ऑफिस के सुपरवाइजर और कर्मचारियों ने ताला खोला और शाम साढ़े 4 बजे मंदिर के पट खुले। ऐसे में अब आज फिर से भगवान के विराजमानी को लेकर सभी के मन में शंका बनी हुई है कि दोपहर तीन बजे के बाद भगवान कहां विराजेंगे। ये है बांके बिहारी मंदिर का नियम दरअसल, बांके बिहारी मंदिर में भगवान की दर्शन सेवा दिन में दो बार बदलती है। जिसमें से एक राजभोग दर्शन है और दूसरा शयनभोग दर्शन है। इस तरह से सेवा में लगे गोस्वामी भी दिन में दो बार बदलते हैं। राजभोग सेवा के लिए गोस्वामी सुबह 6 से लेकर दोपहर एक बजे तक रहते हैं। फिर शयनभोग सेवा के लिए दूसरी शिफ्ट के गोस्वामी दोपहर तीन बजे से लेकर रात साढ़े नौ बजे तक रहते हैं। ऐसे में अब गोस्वामियों में भगवान बांके बिहारी के दर्शन का समय बढ़ाने और उनको विराजमान करने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। श्री वर्धन गोस्वामी राजभोग सेवा के सेवायत हैं। उनकी सेवा 18 फरवरी से 2 मार्च तक है। वह अपनी सेवा में भगवान को जगमोहन में विराजमान कर दर्शन करा रहे हैं। यह कमेटी की भी मंशा थी। इसके पीछे उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा भक्त सुगमता और आसानी से दर्शन कर सकें। क्योंकि गर्भगृह में विराजमान होकर दर्शन करने पर श्रद्धालु बिल्कुल सामने आकर दर्शन कर पाते हैं। जबकि सुनील गोस्वामी लाला, जिनकी सेवा शयनभोग में है। वो चाहते हैं कि भगवान गर्भगृह से ही दर्शन दें। भगवान को केवल विशेष उत्सव और फूल बंगला के समय जगमोहन में विराजमान किया जाए। जगमोहन परंपरा और मर्यादा के खिलाफ है। जगमोहन में विराजमान होकर दिए दर्शन बुधवार से शुरू हुई श्री वर्धन गोस्वामी ने अपनी राजभोग की सेवा में भगवान को गर्भ गृह से बाहर लाकर जगमोहन में विराजमान किया। जहां से भक्तों ने दर्शन किए। शाम को गर्भ गृह से दिए दर्शन फिर शाम को शयन भोग सेवायत सुनीला गोस्वामी लाला ने उनको गर्भ गृह में ही विराजमान रखा। उन्होंने भगवान को जगमोहन में लाने से इंकार कर दिया। इस बात की जानकारी जब कमेटी के अध्यक्ष और सदस्य को हुई, तो वह मंदिर पहुंचे और सेवायत सुनील गोस्वामी लाला से बात की। लेकिन उन्होंने बात नहीं बनी। शयन भोग सेवायत सुनील गोस्वामी लाला ने कमेटी अध्यक्ष रिटायर्ड न्यायधीश अशोक कुमार से कहा- आप लिखित में भगवान को जगनमोहन में विराजमान कर दर्शन कराने का आदेश दें। इस पर आग्रह का नोटिस चस्पा किया। जिसे सेवायत ने नहीं माना। इसके बाद कमेटी अध्यक्ष चले गए। गर्भगृह के कपाट को बांधा जंजीरों से इन सब बातों के बाद शाम की सेवा के लिए जब सेवायत सुनील गोस्वामी मंदिर पहुंचे। वह चंदन कोठरी से होकर गर्भगृह पहुंचे। इसके बाद वह भगवान का श्रृंगार करने में लग गए। इसी बीच किसी ने मंदिर के गर्भ गृह पर जंजीरों को बांधकर ताला लगा दिया। जिससे गर्भ गृह का गेट खोलकर दर्शन न कराए जा सकें। इसकी जानकारी जब सुनील गोस्वामी और अन्य गोस्वामियों को हुई तो हंगामा खड़ा हो गया। गोस्वामी और श्रद्धालुओं ने की नारेबाजी दर्शन के लिए कपाट खुलने का समय नजदीक आ रहा था और गर्भ गृह के कपाट पर ताला लगा था। यह देख गोस्वामी और वहां मौजूद श्रद्धालु भड़क गए। मंदिर परिसर में नारेबाजी शुरू हो गई थी। प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी होने लगी थी। करीब 30 मिनट तक हंगामा चलता रहा। इसके बाद मंदिर के ऑफिस से सुपरवाइजर विजय वहां पहुंचे और कर्मचारियों के साथ ताला खोलकर चले गए। जिसके बाद शाम को हर दिन की तरह साढ़े 4 बजे मंदिर के कपाट खुल सके। इन गोस्वामियों ने जगमोहन में विराजमान करने का विरोध किया घनश्याम गोस्वामी ने कहा- भगवान को जगमोहन में केवल उसी समय लाया जाता है, जब कोई विशेष पर्व हो या फिर फूल बंगले बनाए गए हों। इतिहासकार आचार्य प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने कहा- मंदिरों में भगवान को गर्भ गृह में ही विराजमान किया जाता है। भगवान को अन्य स्थान पर विशेष पर्व-त्यौहार पर विराजमान करने का भी एक निश्चित विधान होता है। ऐसा होता है गर्भ गृह प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया- मंदिरों में गर्भ गृह सबसे भीतरी पवित्र एवं शांत स्थान होता है। यह मंदिर का ब्रह्मस्थान होता है। जहां मुख्य देवता का श्री विग्रह प्रतिष्ठित होता है। गर्भ गृह में 3 तरफ दीवार और मात्र एक द्वार होता है। जो सकारात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। वर्गाकार गर्भगृह सबसे शुभ माना जाता है, जो स्थिरता और संतुलन को दर्शाता है। यह मंदिर का सबसे अंधकारमय और शांत हिस्सा होना चाहिए, जो सांसारिक विकर्षणों से दूर एकाग्रता लाता है। गर्भ ग्रह में वैदिक मंत्रों के मध्य नवरत्नों के साथ तांबें की पट्टी स्थापित की जाती है। इस तांबें के पात्र से शिखर के नीचे की ऊर्जा का मिलन होता है, जो प्राण ऊर्जा को बढ़ाता है। गर्भगृह का द्वार काफी अलंकृत हो सकता है, लेकिन यह कमरा छोटा होना चाहिए, ताकि ध्यान केंद्रित रहे। आमतौर पर गर्भगृह की पवित्रता बनाए रखने के लिए उसमें सीमित संख्या में व केवल शुद्ध वस्त्रों में ही प्रवेश करने का विधान है। यदि कमेटी जगमोहन में आराध्य के दर्शन कराना चाहती है, तो उस स्थान को गर्भगृह के स्वरुप में परिवर्तित कर देना चाहिए। जगमोहन के पक्ष में क्या बोले गोस्वामी कमेटी अध्यक्ष रिटायर्ड न्यायधीश अशोक कुमार का कहना है कि कमेटी केवल व्यवस्थित, सुगम दर्शन कराने की व्यवस्था में प्रयासरत है। जगमोहन में भगवान को विराजमान करने से श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकते हैं। ताकि भीड़ का दबाव न बने और श्रद्वालुओं की किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। कमेटी सदस्य श्री वर्धन गोस्वामी ने बताया- 2 मार्च तक मेरी सेवा है। हम भगवान को जगमोहन में विराजमान कराकर दर्शन कराएंगे। सुबह दर्शन 8 बजे से होंगे, जो दोपहर डेढ़ बजे तक होंगे। …………….. ये खबर भी पढ़ें – शंकराचार्य विवाद- डिप्टी सीएम ने बटुकों की पूजा की:लखनऊ में घर बुलाया, तिलक लगाया; कहा था- चोटी खींचना महापाप यूपी में शंकराचार्य विवाद के बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने ब्राह्मण बटुकों की पूजा की। उन्होंने गुरुवार सुबह लखनऊ आवास में 101 बटुकों को आमंत्रित किया। पत्नी नम्रता पाठक के साथ सभी बटुकों का तिलक लगाया। हाथ जोड़कर प्रणाम किया। उनकी पूजा की। फूल बरसाए। इस दौरान बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। पढ़ें पूरी खबर….

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