चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चंडीगढ़ ट्राई-सिटी क्षेत्र में मेट्रो रेल परियोजना को जल्द मंजूरी नहीं मिली, तो वर्ष 2036 तक शहर “ट्रैफिक का नरक” बन सकता है। तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर कोई ठोस प्रगति न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे शहर के भविष्य के लिए “रणनीतिक जीवनरेखा” बताते हुए केंद्र से 25 हजार करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की मांग की। सांसद ने बताया कि उन्होंने 11 दिसंबर को लोकसभा के शून्यकाल में चंडीगढ़ में मेट्रो रेल की तत्काल जरूरत का मुद्दा उठाया था। इस पर केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने जवाब देते हुए कहा कि यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) के गठन के बावजूद अब तक चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब या हरियाणा सरकार की ओर से मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) का कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा गया है। ‘जिम्मेदारी से बच रही है सरकार’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि मंत्रालय का जवाब केवल जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरआईटीईएस पहले ही मेट्रो परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर दो रिपोर्ट दे चुका है, तो फिर प्रस्ताव केंद्र तक क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह महज कागजी प्रक्रिया का बहाना बनाकर गंभीर समस्या को टालने जैसा है। “चंडीगढ़ के लोगों को बहाने नहीं, समाधान चाहिए,” उन्होंने कहा।स तेजी से बढ़ रहा है ट्राई-सिटी में दबाव सांसद ने बताया कि चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ में आबादी और वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर दिन हजारों लोग काम के लिए इन शहरों से चंडीगढ़ आते हैं, जिससे सड़कों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एकीकृत और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। मेट्रो परियोजना से न केवल जाम कम होगा, बल्कि प्रदूषण में कमी, ईंधन की बचत और टिकाऊ यातायात व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। लागत बढ़कर पहुंची 25 हजार करोड़ तिवारी ने बताया कि योजना के शुरुआती चरण में परियोजना की अनुमानित लागत 16 हजार करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 25 हजार करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि और देरी होने पर लागत और बढ़ेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि चंडीगढ़ मेट्रो को “रणनीतिक कनेक्टिविटी परियोजना” घोषित कर 25 हजार करोड़ रुपये की विशेष ग्रांट दी जाए, ताकि वर्षों से अटकी परियोजना को जमीन पर उतारा जा सके। सांसद ने कहा कि देश के 18 शहरों में मेट्रो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन चंडीगढ़ अब भी इंतजार कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या कागजों की नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी की है। उन्होंने कहा, “अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में चंडीगढ़ का ट्रैफिक हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा।”