शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद क्या यौन शोषण में जेल जाएंगे?:पॉक्सो एक्ट में बच्चों का बयान ही काफी; दोषी हुए तो उम्र कैद की सजा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने यौन शोषण की FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश 2 नाबालिग बच्चों के आरोपों पर दिया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सच में शंकराचार्य ने बच्चों का यौन शोषण किया? पॉक्सो कोर्ट के इस आदेश के बाद क्या होगा? शंकराचार्य के पास क्या कानूनी विकल्प होगा? क्या उन्हें दोषी ठहराया जाएगा? अगर दोषी होते हैं तो क्या सजा मिलेगी? आइए इन सवालों के जवाब देखते हैं.… सबसे पहले जानिए पुलिस ने क्यों केस दर्ज नहीं किया था? इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के वकील मुकेश शर्मा से हमने बात की। वह कहते हैं, पुलिस को आरोपों में कुछ शंका रही होगी, इसलिए केस दर्ज नहीं किया गया। शंका इसलिए कि बच्चों का यौन शोषण एक साल से किया जा रहा था, आखिर इतने वक्त तक पीड़ित सामने क्यों नहीं आए? ऐसे वक्त में सामने आए जब शंकराचार्य प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे थे। दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि पुलिस शंकराचार्य के कद को देखते हुए इस तरह के आरोप में FIR दर्ज न की हो। अगर FIR हुई तो शंकराचार्य के पास क्या विकल्प होगा?
इसके जवाब में मुकेश शर्मा कहते हैं, शंकराचार्य इस FIR के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं, इसे गलत बताते हुए रद्द करने की मांग कर सकते हैं। अगर इसके बाद भी केस दर्ज होता है तो वह अंतरिम जमानत ले सकते हैं। अंतरिम जमानत के बाद मामले की पड़ताल होगी, कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। पॉक्सो में मेडिकल रिपोर्ट कितनी अहम होगी?
शंकराचार्य के खिलाफ अगर FIR होती है तो बच्चों का मेडिकल होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के वकील अजीत यादव कहते हैं, पॉक्सो मामले में नाबालिग का बयान ही काफी होता है, लेकिन मेडिकल जांच सबसे अहम सबूत माना जाता है। दोनों बच्चों ने जो आरोप लगाए हैं, उसके आधार पर मेडिकल होगा। अगर मेडिकल में इस तरह के सबूत मिलते हैं तो केस आगे बढ़ेगा। उसी के आधार पर पॉक्सो के अंदर जो धाराएं हैं, वह लगाई जाएंगी। अजीत यादव कहते हैं, ये हाईप्रोफाइल मामला है, इसलिए इसमें जांच करने वाले अधिकारी एक-एक कदम फूंक कर रखेंगे। बच्चों के आरोप, तारीख, समय, शामिल लोग, उस वक्त की स्थिति, सबकुछ मायने रखेगा। FIR के बाद जांच होगी, फिर सजा की बात आएगी
पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत बच्चों से यौन शोषण से जुड़े मामले में कार्रवाई तेज होती है। संज्ञान लेने की तारीख से अगले 1 साल के अंदर सुनवाई को पूरा करने का प्रावधान है। इस एक साल में शुरुआत के 2 से 3 महीने के भीतर जांच अधिकारी को चार्जशीट लगानी होती है। सुप्रीम कोर्ट के वकील शाश्वत आनंद कहते हैं, इस मामले की जांच के बाद जब चार्जशीट दाखिल होगी तब गिरफ्तारी हो सकती है, इसके बाद केस का ट्रायल शुरू होगा। दोनों पक्ष अपने सबूत पेश करेंगे। एक साल बाद कोर्ट फैसला सुनाने की स्थिति में होगा। पॉक्सो में कई क्लॉज हैं, किस स्तर का अपराध है, उसी के अनुसार कोर्ट फैसला सुनाएगा। इस मामले में आशुतोष महाराज के वकील एसके मानस हैं। वह कहते हैं- शंकराचार्य सनातन संस्कृति के स्तंभ और भगवान कहे जाते हैं, अगर भगवान ही संस्कृति को कुचलने के लिए उतर आए तो सनातन संस्कृति की क्या दुर्दशा हो सकती है। पॉक्सो कोर्ट ने 5-6 लाइनों को कोट करते हुए मुकदमे का आदेश दिया है, जो अपने में बड़ी बात है। इनके लिए सीएम योगी ने कालनेमि शब्द का प्रयोग किया है, इसलिए ये मुकदमा शंकराचार्य के खिलाफ नहीं, बल्कि कालनेमि के खिलाफ दर्ज करने का आदेश दिया है। 18 फरवरी को प्रयागराज में पुलिस से टकराव, 6 दिन बाद यौन शोषण की शिकायत प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का मेला प्रशासन से टकराव हुआ। शंकराचार्य अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। इस घटना के ठीक 6 दिन बाद 24 जनवरी, 2026 को आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज दो नाबालिग बटुकों को लेकर प्रयागराज के झूंसी थाने पहुंचे। अपनी शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया। अगले दिन यानी 25 जनवरी को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक मेला को ई-मेल के जरिए शिकायत दी। 27 जनवरी को डाक से मेला एसपी को शिकायत भेज दी। लेकिन एफआईआर नहीं दर्ज की गई। इसके बाद 8 फरवरी को आशुतोष महाराज दोनों बच्चों को लेकर कोर्ट चले गए। आशुतोष महाराज की शंकराचार्य के खिलाफ 2 शिकायतें- पहली शिकायत: अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए। दूसरी शिकायत: आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे। ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए। इनकी वैधता पर सवाल उठाए गए। 10 फरवरी को शंकराचार्य के पक्ष से वकील ने जवाब दाखिल किया और कहा- जब से गोमाता की रक्षा की आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रहा। किस हक से आशुतोष महाराज बने शिकायतकर्ता?
13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की। आशुतोष महाराज ने कोर्ट को बताया कि दो शिष्य मेरे पास आए और अपने यौन उत्पीड़न की कहानी सुनाई। हम चाहते हैं कि शंकराचार्य के खिलाफ केस दर्ज हो। कोर्ट ने पहले सवाल आशुतोष से पूछा कि आप इनके अभिभावक/संरक्षक कैसे बने? आशुतोष महाराज ने कहा- गुरु परंपरा के मुताबिक मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, इसलिए ये बच्चे मेरे पास आए। कोर्ट को खाली करवाया गया। जज और दोनों पक्षों के वकील के सामने दोनों बच्चों का बयान रिकॉर्ड किया गया। बच्चों ने कोर्ट में बयान दिया- महाकुंभ 2025 के दौरान उनके साथ अविमुक्तेश्वरानंद ने कुकर्म किया। बाकी जो शिष्य थे, वह कहते थे कि यह गुरु सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। अब जानिए कोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया और कहा, हर मामले में FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं होता। मजिस्ट्रेट को अपने विवेक से तय करना होता है कि FIR का निर्देश दिया जाए या शिकायत के रूप में आगे बढ़ाया जाए। यदि मामले में पुलिस जांच जरूरी हो, तो FIR दर्ज कर जांच करना उचित होता है। अदालत की टिप्पणी- मामले में गंभीर यौन अपराध के आरोप हैं। पॉक्सो अधिनियम लागू होता है। साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच आवश्यक है। केवल निजी शिकायत के रूप में मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित थाना प्रभारी तत्काल FIR दर्ज करें। कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जाए। पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा की जाए। जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए। अब वो दो केस जहां आरोपी दोषी भी हुए, बरी भी हुए केस 1ः 50 के करीब बच्चों से दरिंदगी करने वाले इंजीनियर को सजा 20 फरवरी को बांदा के एक केस में पति-पत्नी को सजा सुनाई गई। बांदा कोर्ट ने 50 के करीब बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को फांसी की सजा दी। ये दोनों बच्चों का यौन शोषण करते थे और अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे। पति रामभवन सिंचाई विभाग का इंजीनियर था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को अरेस्ट किया था। दोनों ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया था। CBI ने गिरफ्तारी के 88वें दिन बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया था। केस 2ः 8 साल जेल में रहा ड्राइवर, बाद में बाइज्जत बरी
7 दिसंबर 2025 को मुंबई की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 56 साल के ड्राइवर को बरी कर दिया था। ड्राइवर ने 8 साल जेल में बिताया था। उसके ऊपर आरोप था कि उसने 17 साल की एक दिव्यांग लड़की का यौन उत्पीड़न किया था। कोर्ट ने बरी करते हुए कहा- पीड़ित पक्ष न घटना के मूल तथ्य बता सका, न ही लड़की की उम्र, मानसिक क्षमता, मेडिकल और उसके बयान तीनों में ही भिन्नता है। स्पेशल जज एन डी खोसे ने कहा- अभियोजन पक्ष ने जो सबूत पेश किया वह कमजोर है। आरोपी 8 साल जेल में रह चुका है, इसलिए बरी किया जाता है। आरोपी के वकील वैषाली सावंत और कलाम शेख ने कोर्ट में बताया कि पीड़िता के परिवार और आरोपी के बीच पुराना विवाद था। जिसके चलते उसे फंसा दिया गया था।

———————- ये खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का केस दर्ज होगा:प्रयागराज कोर्ट ने आदेश दिया; शंकराचार्य बोले- रामभद्राचार्य ने झूठा केस कराया शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण की FIR दर्ज करने के आदेश शनिवार को प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने दिए। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश करके यह आरोप लगाए थे। कोर्ट में कैमरे के सामने बच्चों के बयान दर्ज हुए थे। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात पर केस दर्ज करने के आदेश जारी किए। अदालत ने 13 फरवरी को अपना आदेश रिजर्व रखा था। पढ़ें पूरी खबर

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