सीएसजेएमयू के अधिकारी बोले- मार्कशीट मिले तो हम जांच करें:फर्जी डिग्री का मामला, प्रशासन ने कहा- बिना एग्जाम पास होना नामुमकिन

कानपुर में 14 अलग-अलग विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाकर बेचने के मामले का पुलिस ने खुलासा किया। अब छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने अपना पक्ष सामने रखा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा- मौजूदा तकनीकी व्यवस्था इतनी मजबूत है कि बिना पढ़ाई और बिना परीक्षा दिए किसी को डिग्री या मार्कशीट मिलना मुश्किल है।हर छात्र का डेटा यूनिक आईडी से लिंक रहता है, ऐसे में फर्जी तरीके से मार्कशीट जारी होना संभव नहीं है। वहीं, पुलिस का दावा है कि ये मार्कशीट और डिग्रियां ऑनलाइन शो होती थीं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस संबंध में कोई ठोस दस्तावेज विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराए हैं। विवि अधिकारियों का कहना है- अगर कोई गड़बड़ी हुई भी है तो वह वर्षों पुरानी हो सकती है। उनका दावा है कि बीते पांच वर्षों में ऐसी घटना की संभावना न के बराबर है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि फर्जीवाड़े की कड़ियां कहां तक जुड़ती हैं? क्या वाकई किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. पुलिस से कोई जानकारी नहीं मिली सीएसजेएमयू के परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमार ने बताया- सीएसजेएमयू की ऑनलाइन प्रक्रिया दुरुस्त है। वर्तमान में ऐसा संभव नहीं है कि कोई बच्चा बिना परीक्षा दिए डिग्री ले ले। पुलिस यदि हमको अभिलेख उपलब्ध कराती है तो उसकी जांच की जाएगी। हमें पुलिस से कोई जानकारी नहीं मिली है। बताया कि हमारा मार्कशीट का कागज इतना अलग व तकनीक से लैस है कि विवि उसको स्कैन करते ही असली व नकली बता देगा। डिजिलॉकर में सेव होती मार्कशीट वीसी प्रो. विनय पाठक ने कहा- हमारी सारी मार्कशीट डिजीलॉकर में जाकर सेव हो जाती हैं। इसके अलावा बीते पांच सालों में हमारा तंत्र इतना मजबूत हो चुका है कि बिना एग्जाम दिए कोई पास भी नहीं हो सकता है। विवि में मार्कशीट आदि जारी या बीच सत्र में दाखिला होने का काम मेरे अप्रूवल के बिना नहीं होता है। हमारे विवि में बीच सत्र में एडमिशन भी नहीं होते हैं। पुलिस हमको मार्कशीट दे हम उसकी जांच करा लेंगे। बीते सालों में जो भी मामले सामने आए हैं विवि प्रशासन ने उन पर स्वयं की ओर से मुकदमा दर्ज कराया है। फेक वेबसाइट का अलर्ट कर चुके जारी सीएसजेएमयू की अधिकारिक वेबसाइट csjmu.ac.in है। इसके अलावा सीएसजेएमयू के नाम से कई फर्जी वेबसाइट भी संचालित की जा रही हैं। विवि के अधिकारियों ने बताया कि हमने अपनी बेवसाइट पर एक अलर्ट जारी किया है, जिसमें सीएसजेएमयू के नाम से मिलती जुलती फेक वेबसाइट्स की जानकारी दी गई हैं। यह हैं फेक वेबसाइट http://kanpuruniversityresults.org/ http://www.csjmuniversity.co.in/ http://www.csjmkanpuruniversity.org/ http://csjmu.co.in/ https://resultskanpuruniversity.org/ विवि का चपरासी करता था खेल फरवरी 2024 में विवि के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा मिले एक लिफाफे की सूचना पर हुई जांच में पाया गया कि बीएससी थर्ड इयर के फेल छात्र को हाथ से रिकॉर्ड में संशोधन कर पास कर दिया गया था। इस मामले में तत्कालीन रजिस्ट्रार अनिल कुमार यादव ने कल्याणपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने चपरासी जगदीश पाल, उसके साथी शिवकुमार श्रीवास्तव और आशीष राय को गिरफ्तार किया। पुलिस रिमांड के दौरान शिवकुमार ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह पिछले 12 सालों से इस गोरखधंधे में सक्रिय था। वह विश्वविद्यालय के अधिकारियों की हूबहू नकली हस्ताक्षर कर फर्जी मार्कशीट तैयार करता था। इसके लिए उसे ब्लैंक मार्कशीट और गजट की पन्ने अंदरूनी सूत्र उपलब्ध कराते थे। मामले में एक आरोपी प्रिंटिंग का काम करने वाले कैफे संचालक सौरभ शर्मा को अगस्त 2024 में बारासिरोही नहर के पास से गिरफ्तार किया गया, जो सबूतों को नहर में फेंकने की फिराक में था। ——————— ये खबर भी पढ़ें…​ शंकराचार्य को जिसने कोर्ट ने घसीटा, क्या वो हिस्ट्रीशीटर:रामभद्राचार्य से दीक्षा ली; रेप-गोवध जैसे 21 मुकदमे, मंत्रियों के साथ फोटो आशुतोष महाराज रामभद्राचार्य का चेला है। वह हिस्ट्रीशीटर है। शामली के कांधला थाने में उसका नाम 34 नंबर पर दीवार पर लिखा है। रजिस्टर में HS नंबर-76A पर लिखा है। अब समझ लीजिए कि यह आरोप कहां से आ रहा है? पढ़ें पूरी खबर…

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