फाजिल्का के सदर थाना के बाहर जनरल रेत वर्कर यूनियन के सदस्यों ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन का पुतला फूंका और अवैध माइनिंग के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि सरहदी इलाके में सतलुज करीक के पास अवैध माइनिंग का कारोबार हो रहा है। किसान अपनी जमीन से रेत नहीं उठवाना चाहते, जबकि ठेकेदार धक्केशाही कर रहे हैं। इसके विरोध में यूनियन ने इंसाफ की मांग की। बिना अनुमित रेत निकालने से हुआ विवाद जनरल रेत वर्कर यूनियन के जिला सचिव शुबेग सिंह ने बताया कि सतलुज करीक के पास किसानों की जमीनें हैं, जिन्हें ठेके पर दिया गया है। ठेकेदार किसानों की अनुमति के बिना रेत निकालना चाहते हैं, जिससे विवाद हुआ। यूनियन का आरोप है कि पुलिस ने किसानों के लड़के को हिरासत में लिया, जिसके विरोध में उनका थाने का घेराव और प्रदर्शन हुआ। शुबेग सिंह ने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो डीसी दफ्तर का घेराव किया जाएगा और धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। SHO बोले- कोई अवैध माइनिंग नहीं हो रही सदर थाना के एसएचओ प्रगट सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि प्रशासन की हिदायतों के तहत सतलुज करीक में डिसिल्टिंग का काम चल रहा था। इस दौरान किसान के ठेकेदार और सरकारी ठेकेदार के बीच विवाद हुआ, जिसके कारण सरकारी काम में बाधा आई। विवाद के बाद हिरासत में लिया गया ठेकेदार को छोड़ दिया गया। SHO ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के आरोप निराधार हैं और मामले में कोई अवैध माइनिंग नहीं हो रही। इस घटना ने स्थानीय लोगों में चिंता और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा करना है।