लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने रविवार को जोरदार हंगामा किया। कैंपस में मौजूद लाल बारादरी का दरवाजा बंद करने के विरोध में समाजवादी छात्र सभा, NSUI, AISA संगठनों से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। लाल बारादरी की तरफ लगी बैरिकेडिंग को छात्रों ने गिरा दिया। नारेबाजी करते हुए बिल्डिंग के पास पहुंचे और नमाज पढ़ने लगे। बाद में शाम को वहीं पर इफ्तार भी किया। नमाज पढ़ने वाले छात्रों को मानव शृंखला बनाकर कई दूसरे छात्रों ने घेर लिया। जब वो नमाज करके उठे तब यह मानव शृंखला हटी। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना कोई नोटिस इस मस्जिद के दरवाजे को सील करके यहां दीवार खड़ा कर दी। छात्रों ने पहले निर्माणाधीन दीवार गिरा दी। सील किए गए दरवाजे को खुलवाने की मांग की। 3 तस्वीरें देखिए… यह है पूरा मामला जानकारी के मुताबिक, पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रविवार को लाल बारादरी परिसर में फेंसिंग लगाने के लिए खुदाई शुरू की। इस बीच मौके पर पुलिस बल की तैनाती भी रही। निर्माण कार्य की जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में NSUI स्टूडेंट भी मौके पहुंच गए। इन स्टूडेंट्स ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इनका कहना था कि लाल बारादरी ASI द्वारा संरक्षित स्थल है इसलिए बिना उसकी अनुमति के कोई भी कंस्ट्रक्शन का काम नहीं किया जा सकता। कुछ स्टूडेंट्स का यह भी आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस स्थल पर धर्म विशेष की लोगों की एंट्री रोकना चाहता है। इसी मकसद से यहां पूरे परिसर को सील किया जा रहा है। अवरोध करने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी लखनऊ विश्वविद्यालय की कुल सचिव भावना मिश्रा ने बताया कि लाल बारादरी बदहाल हालात में हैं। वहां फेंसिंग करवाने के लिए निर्माण अधीक्षक को कहा गया था। इस बीच हसनगंज पुलिस को भी पहले से अवगत कराकर पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती के लिए कहा गया है। रविवार को काम शुरू किया गया है। इसमें जो भी अवरोध पैदा करेंगे, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी। कुलसचिव कार्यालय ने जारी किया था पत्र एक पत्र रजिस्ट्रार की तरफ से निर्माण भवन के कार्य अधीक्षक को 2 फरवरी को भेजा गया था। इसमें फेंसिंग बनाने के लिए कहा गया था। उसके बाद रविवार को फेंसिंग बनाने का काम शुरू हुआ। उसके बाद NSUI, समाजवादी छात्रसभा और AISA जैसे गुटों के छात्रों ने प्रदर्शन कर फेंसिंग बनाने का विरोध कर रहे हैं। पढ़िए प्रदर्शनकारी छात्रों की बात… ‘यह दरवाजे पर नहीं, आस्था पर ताला लगा’ प्रदर्शन कर रहे समाजवादी छात्रसभा के उपाध्यक्ष महेंद्र ने कहा कि मैं एक हिंदू हूं और मस्जिद के समर्थन में प्रदर्शन कर रहा हूं। लखनऊ विश्वविद्यालय में सैकड़ों साल से यहां पर नमाज अदा की जा रही है। रमजान के महीने में इस मस्जिद को सील कर देना बेहद शर्मनाक है। यह दरवाजे पर ताला नहीं लगा है बल्कि आस्था पर ताला लगाया गया है। धार्मिक मूल्यों पर ताला लगाने की कोशिश की गई है। यह पूरी हरकत संविधान विरोधी है। आर्टिकल-25 में धार्मिक स्वतंत्रता देता है और इस बात की इजाजत देता है कि हम अपने धर्म के हिसाब से धार्मिक कार्य करें। इस हिंदुस्तान में हमें पूजा करने से नमाज पढ़ने से रोक दिया जाएगा यह शर्मनाक है। ‘LU को भाजपा और RSS सांप्रदायिकता में झोंकना चाहते हैं’ छात्र प्रिंस प्रकाश ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय को भाजपा आरएसएस सांप्रदायिकता की आग में झोंकना चाहते हैं। जब से नए वॉइस चांसलर यहां आए हैं, लगातार विवाद हो रहा है। नए वीसी के आने के बाद लगातार यहां पर भाजपा के कार्यक्रम हो रहे हैं। इस दौरान आरएसएस और भाजपा से जुड़े हुए लोगों को ही आने की परमिशन होती है। जब मोहन भागवत आए थे तो विश्वविद्यालय के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे स्टूडेंट तो दूर की बात है प्रोफेसर नहीं घुस पा रहे थे पचास से ज्यादा क्लासेस सस्पेंड हुई थी। छात्र अपने कैंपस में फ्री घूम नहीं पाते हैं। विश्वविद्यालय कैंपस को भाजपा का कार्यालय बना देना चाहते हैं। शमलेश तिवारी यहां निर्माण अधीक्षक हैं, मगर विश्वविद्यालय के मूलभूत सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं देते। पीने का पानी इतना घटिया है कि कोई पी नहीं सकता। विश्वविद्यालय की इमारत की लगातार छतें टूट रही हैं। पानी खराब है, शौचालय में सीट नहीं है, इस पर कोई ध्यान नहीं देता। लाल बारादरी से न जाने कितने छात्रों की यादें जुड़ी हुई हैं, उसे जबरदस्ती चुनवाया जा रहा है। जबरदस्ती तोड़कर फिर से बनवाई जा रही है। ‘सुबह दरवाजा खुला था, मैंने नमाज पढ़ी थी’ धरने पर बैठे तौकील गाजी ने कहा कि मस्जिद को बंद कर दिया गया है। सुबह मस्जिद का दरवाजा खुला हुआ था, मैंने नमाज पढ़ी थी। दोपहर में जब आए तो मस्जिद का दरवाजा बंद मिला। यहां पर तीन थानों की फोर्स लगा दी, मगर विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई भी व्यक्ति मिलने नहीं आया। यह मस्जिद 200 साल पुरानी है जो विश्वविद्यालय के अंतर्गत नहीं आती है एएसआई के अंतर्गत आती है। अगर किसी नोटिस के यहां पर ताला लगा देना निंदनीय है। जब तक कि हमें जवाब नहीं मिल जाएगा तब तक हम नहीं उठेंगे और सारी नमाज नहीं पढ़ेंगे। ‘RSS-BJP के लोग यहां आए, उसके बाद सीलिंग हुई’ अहमद रजा खान ने आरोप लगाया कि लंबे समय से यहां पर नमाज अदा होती आई है। विश्वविद्यालय कैंपस में हाल के दिनों में RSS-बीजेपी के कई दिग्गज लोग यहां आए हैं। इसके बाद से ही इस परिसर को सील करने का निर्णय लिया गया है। आज कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची पर विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई मौके पर नहीं आया है। यहां धार्मिक उन्माद बढ़ाने की साजिश हो रही है। ———————— ये खबर भी पढ़िए… डॉ. मोहन भागवत बोले- शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं : धूल का एक कण भी धर्म से अलग नहीं हो सकता, लखनऊ में छात्रों से संवाद किया लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा- शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं हैं, इन्हें व्यवसाय नहीं बनाया जा सकता। दोनों क्षेत्र समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ होने चाहिए। (पूरी खबर पढ़िए)