BBAU में रविवार को राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का फाइनल राउंड हुआ। फाइनल राउंड की अध्यक्षता हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिज़वी, न्यायमूर्ति उमेश चन्द्र शर्मा और न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल ने की। इस दौरान विधिक समझ, शोध क्षमता, तर्कशक्ति और कोर्ट प्रेजेंटेशन का मूल्यांकन किया गया। फाइनल चरण में पहुंची टीमों ने अभियोजन और बचाव पक्ष के रूप में गहन अध्ययन और मजबूत कानूनी तर्कों के साथ अपना पक्ष रखा। जबलपुर की धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की टीम विजेता बनी। जबकि सिंबायोसिस लॉ कॉलेज की टीम रनर अप रविधि महाविद्यालय, नागपुर की टीम उपविजेता रही। इस टीम को मिले रिसर्च से जुड़े अवॉर्ड रिसर्च कैटेगरी में दो प्रतिभागियों के समान अंक होने के कारण एशियन लॉ कॉलेज, नोएडा और सिंबायोसिस विधि महाविद्यालय, पुणे के शोधकर्ताओं को संयुक्त रूप से ‘सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता’ का पुरस्कार दिया गया। ‘सर्वश्रेष्ठ वक्ता’ का पुरस्कार स्कूल ऑफ लॉ, क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), बेंगलुरु के प्रतिभागी को प्रदान किया गया। ‘सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल’ का पुरस्कार सिंबायोसिस विधि महाविद्यालय, नागपुर को मिला। आयोजन में रहा व्यापक सहयोग प्रतियोगिता के पुरस्कारों के लिए विभिन्न विधि विशेषज्ञों और पेशेवरों का सहयोग प्राप्त हुआ। आयोजन को सफल बनाने में इस दौरान विधि विभाग के डीन प्रो.संजीव चड्ढा, विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा के अलावा डॉ. विष्णुपति त्रिपाठी, डॉ. बृजेश कुमार यादव, डॉ. खुशनुमा बानो, गार्गी वोहरा समेत कई शिक्षक मौजूद रहे। विधिक प्रतिभा को मिला राष्ट्रीय मंच प्रभारी कुलपति प्रो.सुनीता मिश्रा ने बताया कि इस प्रतियोगिता से विधि छात्रों की शोध क्षमता, तार्किक सोच और न्यायालयीन प्रस्तुतीकरण कौशल को निखारने का मौका मिला।