बिहार की 5 राज्यसभा सीटों में से 4 पर NDA की जीत तय है। 5वीं सीट जीतने के लिए सिर्फ 3 विधायकों की जरूरत है। अमित शाह के 25 फरवरी के बिहार दौरे से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव से पहले के वादों की याद दिलाकर NDA के शीर्ष नेतृत्व पर प्रेशर बढ़ा दिया है। जबकि, चिराग पासवान ने शीर्ष नेतृत्व पर फैसला छोड़कर पेंच फंसाया है। NDA के अंदर चल रही रस्साकशी के बीच नीतीश कुमार की पार्टी ने 5 में से 2 सीट लेकर खुद को किनारे कर लिया है। क्या NDA के अंदर सब ठीक है। एक सीट पर झगड़ा बढ़ा तो क्या होगा। नीतीश कुमार की चलेगी कि नहीं। इन सवालों का जवाब जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः बिहार की कितनी सीटों पर कब चुनाव होगा? जवाबः बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं। जिसमें JDU कोटे की 2, RJD कोटे की 2 और RLM की एक सीट है। सवाल-2ः 5 राज्यसभा सीटों में से कौन कितनी सीटों पर जीत सकता है? जवाबः NDA को 4 सीटें आसानी से मिल जाएंगी। एक सीट के लिए उसे सिर्फ 3 और विधायकों की जरूरत होगी। वहीं, महागठबंधन अपनी पूरी ताकत लगा दे तो उसे 1 सीट मिल सकती है। NDA के पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। NDA: BJP-JDU की 2-2 सीट कंफर्म, 5वीं पर परीक्षा 2025 विधानसभा चुनाव में NDA को 243 में से 202 सीटें मिली हैं। राज्यसभा चुनाव में खाली सीट+1 का फॉर्मूला चलता है। जैसे- बिहार में 5 सीट खाली है तो 5+1 फॉर्मूला चलेगा। इसके तहत एक राज्यसभा सांसद को जिताने के लिए 41 वोट चाहिए। 41 वोटों के लिहाज से BJP और JDU के 2-2 कैंडिडेट आराम से चुनाव जीत जाएंगे। 5वीं सीट जीतने के लिए उसके पास 38 विधायक बचेंगे। उसे 3 और विधायकों की जरूरत होगी। इसके लिए उसे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और बसपा विधायक का साथ लेना होगा। ओवैसी की ताकत से तेजस्वी को मिल सकती है 1 सीट सवाल-3ः NDA के भीतर कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर दावेदारी कर रही है? जवाब: NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में 5 दल हैं-BJP, JDU, LJP(R), HAM और RLM। नामांकन शुरू होने में 3 दिन बाकी हैं, लेकिन अभी तक NDA का सीट शेयररिंग फॉर्मूला सामने नहीं आया है। हालांकि, LJP(R) अध्यक्ष चिराग पासवान और RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बयान से साफ है कि अंदरखाने एक सीट पर पेंच फंसा है। JDU ने 2 सीट लेकर किया किनारा 19 फरवरी को JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, ‘राज्यसभा का चुनाव होने वाला है। पांच सीटें बिहार से होंगी। मुझे लगता है कि पांचों सीट NDA के खाते में आएगी। JDU की दो सीटें हैं। नीतीश कुमार तय करेंगे कि JDU से कौन जाएगा। समय पर फैसला हो जाएगा। इसका साफ मतलब है कि JDU 5 में से 2 सीट लेगी और बाकी की सीटों का फैसला BJP शीर्ष नेतृत्व करेगा। विवाद बढ़ा तो 3 पर भाजपा लड़ सकती है JDU और भाजपा की ओर से दो-दो उम्मीदवार भेजने के बाद विधायकों का गणित LJP(R) के पक्ष में जाएगा। 5वीं सीट के लिए NDA के पास बचे विधायकों की संख्या 38 होगी। इसमें LJP(R) के 19, भाजपा के 7, JDU के 3, RLM के 4 और जीतन राम मांझी के HAM के 5 विधायक हैं। LJP को मात्र तीन की जरूरत होगी। ऐसे में घटक दलों में विवाद बढ़ा तो भाजपा खुद तीन सीटों पर लड़ सकती है। इसमें एक सवर्ण, एक पिछड़ा व एक दलित होगा। कुशवाहा ने क्यों याद दिलाया पुराना वादा सूत्रों के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा की सीट फंस गई है। चुनाव से पहले भाजपा ने अपने कोटे से एक MLC पद देने का लिखित वादा किया था। उस पर कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर दावा पेश कर दिया है। कुशवाहा की सीट फंसने के 3 बड़े कारण… सवाल-4ः महागठबंधन क्या राज्यसभा चुनाव में अपना कैंडिडेट उतारेगा? जवाबः अभी तक महागठबंधन के किसी पार्टी (RJD, कांग्रेस, लेफ्ट) ने ऑफिशियल कोई कैंडिडेट देने की घोषणा नहीं की है। हालांकि, अंदरखाने RJD ने प्रत्याशियों की खोज चालू कर दी है। पार्टी वैसे प्रत्याशी की खोज में है, जो हर तरह से समर्थ हो। सवाल-5ः क्या बिहार में 18 साल से चली आ रही निर्विरोध चुनाव की परंपरा टूटेगी? जवाबः उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2008 से अब तक बिहार में कभी राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला नहीं हुआ है। इसके पीछे नीतीश कुमार की रणनीति मानी जाती है। सीनियर जर्नलिस्ट संजय सिंह बताते हैं, ‘नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव में जोड़-तोड़ की पॉलिटिक्स के खिलाफ रहे हैं। खरीद-फरोख्त उन्हें पसंद नहीं है। यही कारण है कि वह हर चुनाव में विधानसभा के गणित के हिसाब से उम्मीदवार देते आए हैं। इससे वोटिंग की नौबत नहीं आई है।’ संजय सिंह कहते हैं, ‘अब जब भाजपा ताकतवर पार्टी के तौर पर उभरी है तो देखना है कि क्या निर्विरोध चुनने की प्रक्रिया जारी रहती है या टूटती है।’