प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश 2 नाबालिग बच्चों के गंभीर आरोपों के आधार पर है। कोर्ट के इस आदेश के बाद मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले पर संत समाज की क्या प्रतिक्रिया है? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर ने कई संतों से बात की… पढ़िए किसने क्या कहा ? पहले जानिए पूरा मामला क्या है?
18 जनवरी, 2026 को प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मेला प्रशासन से टकराव हुआ और वे धरने पर बैठ गए थे। इसके 6 दिन बाद 24 जनवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज 2 नाबालिग बटुकों के साथ झूंसी थाने पहुंचे। अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाया, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई। कार्रवाई न होने पर 8 फरवरी को मामला कोर्ट पहुंचा। शिकायत में नाबालिगों से काम कराने, यौन शोषण की आशंका और फर्जी लेटरपैड के आरोप लगाए गए। 10 फरवरी को शंकराचार्य पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। 21 फरवरी को प्रयागराज के झूंसी थाने में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले में FIR दर्ज कर ली गई। जानिए क्या कहता है संत समाज? किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना गिरी का कहना है- शंकराचार्य कोई साधारण पद नहीं, सनातन धर्म की एक अत्यंत उच्च और पूजनीय उपाधि है। हमारे सनातन धर्म में शंकराचार्य का स्वरूप बहुत बड़ा और सम्मानित रहा है। लेकिन, कुछ लोग इसे राजनीति से जोड़कर गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। आशुतोष महाराज को लेकर महामंडलेश्वर संजना गिरी ने कहा- वो ऐसी बातों को फैलाकर सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा रहे। देश संवैधानिक है और कानून सबके लिए समान है। लेकिन, अगर किसी को आपत्ति या शिकायत थी तो वह पहले क्यों सामने नहीं आया? माघ मेले के बाद ही इस तरह के आरोप सामने आना संदेह पैदा करता है। जूना अखाड़े के महंत नारायण गिरी ने कहा- आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच का विषय है। अगर जांच होती है, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। योगीजी के खिलाफ शंकराचार्य जो आरोप लगा रहे हैं, इस तरह के आरोप लगाना गलत है। शंकराचार्य जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं। जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर योग योगेश्वरी यति ने कहा- माघ मेले में अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ जो हुआ, उसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। वास्तविकता क्या है, यह साफ नहीं है। आज तक उन पर ऐसा कोई आरोप नहीं लगा। अचानक इस तरह के आरोप सामने आना प्रायोजित मामला होने का संकेत देता है। योग योगेश्वरी यति ने कहा- अगर किसी संन्यासी की छवि को जानबूझकर धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, तो इससे विश्व स्तर पर बड़ा नुकसान होगा। हम सनातन और हिंदू धर्म की सकारात्मक छवि बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इतने बड़े पद पर आसीन व्यक्ति के साथ इस तरह की राजनीति ठीक नहीं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा- यह मामला जांच का विषय है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों को दंड मिलना चाहिए। अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो जिसने फंसाया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। शंकराचार्य का पद बहुत बड़ा और जिम्मेदारी भरा होता है। अगर किसी ने ऐसा किया है, तो वह गलत है। भविष्य में शंकराचार्य नियुक्त करते समय और अधिक सतर्कता बरती जाएगी। बच्चों के कुछ बयान सामने आए हैं। लेकिन, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनमें कितनी सच्चाई है। मिश्रौली धाम स्थित श्री शनि शांति धाम के महाराज स्वामी रामनारायण कहते हैं- संतों पर बोलना मतलब ईश्वर पर टिप्पणी करने जैसा माना जाता है। इसलिए संतों के विषय में मर्यादा और संयम के साथ ही बोलना चाहिए। संतों को भी मर्यादा का ध्यान रखकर ही बोलना चाहिए। श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सेक्रेटरी महंत रतन गिरी ने कहा- इस मामले से जुड़ी खबरों पर हम लगातार नजर बनाए हैं। लेकिन, इतनी जल्दी कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। अभी जांच होनी है। उसमें कितनी सच्चाई सामने आती है, यह देखना जरूरी है। महंत रतन गिरी ने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पर खुद कितने मामले दर्ज हैं। हालांकि, शंकराचार्य जैसे उच्च और गरिमामय पद पर बैठे व्यक्ति पर लगे ऐसे आरोपों पर फिलहाल वे कुछ नहीं कहना चाहते। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- म इस मामले को अलग दृष्टि से देखते हैं। यह कोई सामान्य या राजनीतिक रूप से गढ़ा गया मामला नहीं, एक गंभीर केस है। इसमें संत समाज की छवि को आघात पहुंचा है। यह केवल आरोप लगाने का मामला नहीं, नाबालिग बच्चों के बयान न्यायाधीश ने दर्ज किए हैं। ऐसे में इसे राजनीतिक दुर्भावना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। कानून को अपना काम करने देना चाहिए। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा- अगर आसाराम और राम रहीम जैसे मामलों में आरोप सही साबित हो सकते हैं। तो अविमुक्तेश्वरानंद जी पर लगे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। योगी आदित्यनाथ के शासन में भी कानून सबके लिए समान है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा- जब तक जांच पूरी न हो जाए और दोष सिद्ध न हो, तब तक इस मामले पर कुछ कहना उचित नहीं। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। इसका संत समाज की छवि पर गहरा असर पड़ेगा। ———————- ये खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण मामले में FIR, पॉक्सो एक्ट में हुआ केस शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के मामले FIR दर्ज कर ली गई है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज FIR में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का भी नाम है। झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा के मुताबिक, 2-3 अज्ञात के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पढ़िए पूरी खबर…