चंडीगढ़ DRT में रिक्त पदों पर हाईकोर्ट सख्त:केंद्र सरकार से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण निर्देश देने से इनकार

चंडीगढ़ स्थित डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल में ज्यूडिशियल ऑफिसर के रिक्त पदों को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि इन पदों को भरने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से लागू स्थगन आदेश के चलते हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में कोई अंतिम दिशा-निर्देश पारित नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की तीनों डीआरटी में नियुक्तियों की वर्तमान स्थिति पर स्पष्ट जानकारी मांगी। अदालत के समक्ष बताया गया कि दो अधिकरण पहले से ही नियमित पीठासीन अधिकारियों के बिना काम कर रहे हैं, जबकि तीसरे अधिकरण के अधिकारी का कार्यकाल मार्च में समाप्त होने वाला है। केंद्र ने कहा—मामला एसीसी के पास लंबित मामलों की सुनवाई करता चंडीगढ़ डीआरटी देशभर में 2.48 लाख से अधिक मामले लंबित देश में कुल 39 डीआरटी कार्यरत हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक इन अधिकरणों में 2,48,458 मामले लंबित थे, जिनमें लगभग 16.13 लाख करोड़ रुपये की राशि दांव पर है। फरवरी-मार्च 2026 तक करीब 20 डीआरटी पीठासीन अधिकारियों का चार वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने वाला है, जिससे कई अधिकरण निष्क्रिय होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। चंडीगढ़ डीआरटी-द्वितीय लंबित मामलों के मामले में देश के शीर्ष 10 अधिकरणों में शामिल है। ये शीर्ष 10 डीआरटी कुल लंबित मामलों के 43.6 प्रतिशत और कुल लंबित राशि के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाईकोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट जवाब मांगा है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया को कब तक अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि न्यायिक और बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *