धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के नेतृत्व और कर्मचारियों ने परम पावन 14वें दलाई लामा के छोटे भाई तेनज़िन चोएग्याल, जिन्हें नगारी रिनपोचे के नाम से जाना जाता है, के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। 17 फरवरी 2026 को 80 वर्ष की आयु में उनके देहावसान के उपरांत स्टाफ मेस के ऊपर स्थित सभागार में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की। तिब्बती समाज की सेवा में समर्पित रहा जीवन सभा को संबोधित करते हुए सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट की। उन्होंने बताया कि रिनपोचे के निधन के समय लोसार पर्व के कारण प्रशासनिक अवकाश था, इसलिए तत्काल प्रार्थना सभा आयोजित नहीं की जा सकी। सिक्योंग ने इस बात पर जोर दिया कि नगारी रिनपोचे ने अपना संपूर्ण जीवन तिब्बती समाज, संस्कृति और प्रशासन की सेवा में समर्पित किया।
मौन रखकर श्रद्धांजलि दी सिक्योंग ने यह भी जानकारी दी कि निर्वासित तिब्बती संसद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष इस अवसर पर उपस्थित नहीं हो सके। वे परम पावन दलाई लामा के तिब्बत के स्वर्ण सिंहासन पर आरोहण की 86वीं वर्षगांठ से संबंधित आधिकारिक कार्यक्रमों में व्यस्त थे। सभा में नगारी रिनपोचे की संक्षिप्त जीवनी का वाचन किया गया और उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हुआ था जन्म नगारी रिनपोचे का जन्म 1946 में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हुआ था। 1950 में उन्हें 15वें नगारी रिनपोचे के पुनर्जन्म के रूप में मान्यता मिली और उन्होंने ड्रेपुंग मठ में प्रवेश लिया। 1959 में वे दलाई लामा के साथ भारत आए और दार्जिलिंग के सेंट जोसेफ कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक दायित्व निभाए उन्होंने अपने जीवनकाल में विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक दायित्व निभाए। वे तिब्बती बाल ग्राम में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने जीवनकाल में विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक दायित्व निभाए। वे तिब्बती बाल ग्राम में शिक्षक, सुरक्षा विभाग के उप सचिव और दलाई लामा कार्यालय में सचिव रहे। 1991 से 1996 तक उन्होंने निर्वासित संसद में प्रतिनिधि के रूप में भी सेवाएं दीं। उनके निधन से तिब्बती समुदाय को अपूरणीय क्षति हुई है।