MP सैलजा बोलीं-खातों से जुड़े 590 करोड़ की जांच हो:निजी बैंकों को क्यों दी गई प्राथमिकता, वित्तीय गड़बड़ी पर निलंबित करना पर्याप्त नहीं

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा से कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में लगभग 590 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर और जनहित से जुड़ा मामला बताया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा से जुड़ा हुआ है। जिसमें कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकारी खातों से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की खबर बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार, यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ सीधा विश्वासघात है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी गड़बड़ी उच्च स्तर की लापरवाही या संभावित मिलीभगत के बिना कैसे हो सकती है और क्या आंतरिक ऑडिट तथा निगरानी तंत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गए। निजी बैंकों में खाते खोलने के निर्देश क्यों दिए कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि केवल चार अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जब मामला जनता के पैसे का हो, तो पूरी जवाबदेही तय होना आवश्यक है। इस मामले को केवल एक बैंक या शाखा तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे वित्तीय प्रबंधन तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सैलजा ने यह भी पूछा कि जब राष्ट्रीयकृत बैंक उपलब्ध थे, तब सरकारी विभागों और संस्थानों को निजी बैंकों में खाते खोलने के निर्देश क्यों दिए गए। यह मामला विधानसभा सत्र में उठा है। किसके आदेशों पर ये निर्णय लिए गए, उसकी पहचान हो सांसद सैलजा ने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर ऐसे निर्णय लिए गए। इसमें शामिल सभी अधिकारियों और प्रशासनिक स्तरों की पहचान की जाए। यदि अब सरकार विभागों को राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाते खोलने के निर्देश दे रही है, तो उसे यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि पहले स्थापित नीति के विपरीत निजी बैंकों को प्राथमिकता क्यों दी गई। चाहे किसी का कितना भी प्रभाव या पद क्यों न हो। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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