30 साल से बंद पड़ीं दरभंगा की रैयाम और मधुबनी की सकरी चीनी मिलों को फिर से शुरू किया जाएगा। इसके लिए सोमवार को सहकारिता विभाग और राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड, नई दिल्ली के बीच समझौता हुआ। संघ 15 दिनों में मिलों को खोलने की डीपीआर बनाएगा। सहकारिता विभाग के अब्दुल रब खां और संघ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। ये चीनी मिलें साल 1996 से बंद पड़ी हैं। सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि सकरी और रैयाम में गन्ना कॉम्पलेक्स बनाया जाएगा। इसमें चीनी, इथेनॉल और सीएनजी का उत्पादन होगा। सकरी चीनी मिल में 30.848 एकड़ तथा रैयाम में 68.176 एकड़ भूमि उपलब्ध है। जमीन सहकारिता विभाग को हस्तांतरित करने की कार्रवाई जारी है। डीपीआर बनाने के लिए संघ दोनों चीनी मिलों के क्षेत्र के किसानों से बात करेगा। मिट्टी की जांच करेगा और संसाधनों को तलाशेगा। संघ के एमडी प्रकाश नाईकनवारे ने बताया कि काम शुरू हो गया है। टीम दरभंगा और मधुबनी में अगले 7-8 दिनों तक क्षेत्र अध्ययन करेगी।
1930 में दरभंगा महाराज ने मिलें शुरू की थी साल 1930 में दरभंगा महाराज ने सकरी और रैयाम चीनी मिलें खोली थीं। वर्ष 1976 में मिलें घाटे में जाने लगीं। कारण कि एक चीनी मिल से 800 से 1000 टन ही गन्ने की पेराई हो रही थी। घाटे में जाने के कारण बिहार शुगर कोऑपरेशन दोनों मिलों को चलाने लगा। साल 1995 तक सरकार के अनुदान से दोनों मिलों का संचालन होता रहा। फिर साल 1996 में घाटे में जाने के कारण दोनों चीनी मिलों को बंद करना पड़ गया। तब 2401 गांवों के चार लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे। अब 2401 गांवों में फिर से गन्ने की खेती होगी रैयाम और सकरी चीनी मिलों के बंद होने के बाद इलाके के किसान धान-गेहूं की खेती करने लगे। अब जब मिलें फिर से शुरू होंगी तो गन्ना उद्योग विभाग और कृषि विभाग इन 2401 गांवों के किसानों से दोबारा गन्ने की खेती कराएगा। इसके लिए किसानों को अनुदान देने के साथ सिंचाई की व्यवस्था करेगा। इससे यहां के 16 लाख से अधिक किसानों-मजदूरों को रोजगार मिलेगा। एक चीनी मिल को खोलने में 500 करोड़ रुपए लगेंगे। दो से तीन साल में चीनी मिल पूरी तरह काम करने लगेगी।