धर्मशाला में सरकार की नई पर्यटन नीति का विरोध:एंट्री टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ होटल कारोबारी लामबंद, बोले-अव्यावहारिक है प्रस्ताव

कांगड़ा जिले में पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज इन दिनों गंभीर ट्रैफिक जाम और खराब सड़क व्यवस्था से जूझ रही है। संकरी सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है, जिससे वीकेंड और सीजन के दौरान पर्यटकों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। स्थानीय होटल कारोबारियों का कहना है कि इस वजह से पर्यटक यहां आने से कतराने लगे हैं। इसी बीच, होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन, धर्मशाला ने प्रदेश सरकार के प्रस्तावित पॉलिसी बदलावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि ये बदलाव पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव डालेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बंबा ने बताया कि मौजूदा टूरिज्म यूनिट्स के लिए फायर डिपार्टमेंट से अनिवार्य एनओसी का प्रस्ताव अव्यावहारिक है।
होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन की सरकार से मांग पुरानी इमारतों में 1 लाख लीटर से अधिक क्षमता के अंडरग्राउंड पानी के टैंक बनाना संभव नहीं है, और न ही उनकी छतें अतिरिक्त पानी के भंडारण का भार सह सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई होटल पहले से ही पानी की अनियमित आपूर्ति के कारण टैंकरों पर निर्भर हैं। ऐसे में स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम अनिवार्य करना छोटे और मध्यम होटलों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ होगा। फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि टूरिस्ट हब में सामूहिक फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए और पुराने भवनों को नियमों में राहत दी जाए। साथ ही, नए नियम लागू होने के बाद कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए। एसोसिएशन ने अप्रैल 2026 से बाहरी वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। नवीनीकरण शुल्क में भारी बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए प्रस्तावित बढ़ोतरी के तहत, छोटी गाड़ियों का टैक्स ₹70 से बढ़ाकर ₹170 और टेंपो ट्रैवलर का ₹320 से ₹570 करने का प्रस्ताव है। एसोसिएशन का मानना है कि इससे हिमाचल एक महंगा पर्यटन गंतव्य बन सकता है।होटल रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण शुल्क में भारी बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए गए हैं। पर्यटन सेक्टर प्रभावित होने का आरोप वर्तमान में 20 कमरों वाले होटल को लगभग ₹2,500 का भुगतान करना पड़ता है, जबकि नए प्रस्ताव के तहत यह राशि ₹80 हजार से ₹1 लाख तक पहुंच सकती है। एसोसिएशन ने कहा कि पहले से ही औसत ऑक्यूपेंसी 20% से कम है। ऐसे में ट्रैफिक जाम, खराब सड़कें और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ये नए नियम पर्यटन सेक्टर को और अधिक प्रभावित करेंगे।

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