सोन दियारा में बालू माफियाओं का कहर:किसान बेच रहे खेती योग्य जमीन, भाकपा माले ने विरोध का किया समर्थन

औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड स्थित नौनेर ग्राम के सोन दियारा में महादलित परिवारों की खेती योग्य भूमि पर संकट गहरा गया है। वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे इन परिवारों ने अपनी भूमि बचाने के लिए हुंकार भरी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने उन्हें समर्थन दिया है। मंगलवार को भाकपा माले के जिला सचिव कॉमरेड मुनारिक राम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। 80 वर्षों से कर रहे हैं खेती ग्रामीणों के अनुसार, वे लगभग 80 वर्षों से सोन दियारा की इस भूमि पर खेती कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। यह जमीन उनके लिए आजीविका का एकमात्र साधन है। उनका आरोप है कि हाल के दिनों में बालू माफियाओं द्वारा उनकी खेती योग्य भूमि को उजाड़ने की धमकी दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बालू खनन का ठेका केवल बालू के लिए है, न कि मिट्टी या खेती की जमीन के लिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि खेती को नुकसान पहुँचाया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। जिला पदाधिकारी से लगाई न्याय की गुहार ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले सैकड़ों की संख्या में उन्होंने औरंगाबाद के जिला पदाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि खेती करने वाले परिवारों ने सरकारी राजस्व के रूप में नजीर रसीद भी कटवाई है, जो भूमि पर उनके वर्षों के वैध उपयोग को साबित करती है। अधिकारियों ने दिया उचित कार्रवाई का आश्वासन भाकपा माले के जिला सचिव कॉमरेड मुनारिक राम ने इस मामले को गंभीर बताया। उन्होंने ओबरा के अंचल अधिकारी और दाउदनगर के अनुमंडल पदाधिकारी से दूरभाष पर बात कर पीड़ित परिवारों की समस्या का शीघ्र समाधान करने का आग्रह किया। दोनों अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कार्रवाई और समाधान का आश्वासन दिया है। एकजुट होकर संघर्ष का संकल्प बैठक की अध्यक्षता प्रखंड सचिव सह अमिलौना पंचायत के मुखिया कॉमरेड दिनेश राम ने की। इसमें रामप्रसाद राम, रामाशीष चौधरी, बिके राम, बबन राम, रामजी राम, बासु चंद्रवंशी, बेशलाल राम, क्रांति राम, हरिहर प्रजापति, काशी चौधरी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ग्रामीणों ने अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

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