‘छोटे से कमरे में 4 सड़ी लाशें फंदे से लटक रही थीं। पूरब-दक्षिण कोने पर 48 साल, पूरब-उत्तर कोने पर 43 साल और उत्तर-पश्चिम कोने पर 78 साल की महिला फंदे से झूल रही थी। कमरे के सेंटर में 50 साल का पुरुष फंदे से लटका था। चारों के हाथ और पैर मोटी रस्सी से अलग-अलग बंधे हुए थे। सभी के मुंह पर क्रॉस का लाल टेप चिपका था। लाश इतनी सड़ गई थी कि चमड़ा नीचे तक लटक रहा था। दुर्गंध ऐसी कि 200 मीटर एरिया में सांस लेना मुश्किल था..।’ विचलित करने वाली यह तस्वीर राजगीर के जैन दिगंबर धर्मशाला के कमरा नंबर 6 AB की है। पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो हालात देख कर हैरान रह गई। मौके पर मौजूद 12 पुलिसकर्मियों के सामने पहली बार ऐसा केस था। पुलिस की इन्वेस्टिगेशन 10X12 के कमरे तक सिमट कर रह गई, लेकिन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में ब्लैक मैजिक का ऐसा सच सामने आया है, जो आपके होश उड़ा देगा। पढ़िए और देखिए कमरे में फंदे से लटकती 4 डेड बॉडी की मौत के पीछे की डरावनी कहानी में कर्नाटक से लेकर बिहार तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन..। पहले पुलिस की इन्वेस्टिगेशन जानिए राजगीर के जैन दिगबंर धर्मशाला में हुई 4 मौत की तह तक पहुंचने के लिए इन्वेस्टिगेशन शुरू करने से पहले भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम राजगीर थाना पहुंची और पुलिस की जांच की हर एक बिंदु को समझा। केस की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर नवीन कुमार से मुलाकात की, लेकिन बातचीत से लगा उनकी जांच सिर्फ एक कमरे तक सिमटी है। उन्होंने मामले में कुछ अधिक जानकारी देने की बजाए थाना प्रभारी से बात करने की सलाह दी। हम थाना पर पहुंचे तो थाना प्रभारी रमन कुमार से मुलाकात हुई।
6 फरवरी 2025 को मैं थाना पर काम निपटा रहा था। सुबह लगभग 9 बजे दो लोगों ने सूचना दी कि जैन दिगबंर धर्मशाला के कमरा नंबर 6 AB से काफी दुर्गंध आ रही है। दरवाजा अंदर से बंद है, आवाज लगाने के बाद भी कोई हरकत नहीं है। कमरे में 4 लोग ठहरे हैं, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। इतना सुनते ही मुझे लग गया कि मामला गड़बड़ है। आनन-फानन में 10 से 12 पुलिसकर्मियों के साथ मैं 15 मिनट में मौके पर पहुंच गया। धर्मशाला में पैर रखते ही सड़ने की बदबू आने लगी। बदबू ऐसी थी कि कमरे के बाहर एक सेकेंड भी रुकना मुश्किल था। मैंने भी दरवाजा पीटा, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। कमरे में एक खिड़की थी, वह भी बंद थी। तब तक हम समझ गए कि अंदर कुछ गड़बड़ है। दरवाजा तोड़वाया तो सामने ऐसा नजारा था कि मानो कोई भूत वाली हॉरर मूवी देख रहे हो। एक साथ 4 लाशें लटक रही थी। सभी के हाथ-पैर मोटे रस्सियों से बंधे थे। मुंह पर लाल रंग का क्रॉस टेप चिपकाया गया था। देखकर ऐसा लग रहा था कि किसी ने प्लान मर्डर कर सभी को लटका दिया हो। नीचे में चाकू, कैंची, सुई थी। मैंने भी पहली बार ऐसी घटना देखी थी, इसलिए पहली नजर में मर्डर लगा..। मरने वालों में कर्नाटक के बेंगलुरु के बैलेडा पेटे गुब्बी गांव के रहने वाले रत्नबाला राजू की 78 साल की पत्नी जीआर सुमंगला, उनकी 48 साल की बेटी शिल्पा जिआर, 43 साल की बेटी श्रुथा जीआर और 50 साल के बेटे जीएन नागा प्रसाद हैं। एक ही परिवार के लोग थे, इसलिए बड़ा रहस्य दिख रहा था। पुलिस की जांच में सुसाइड और मर्डर का एंगल पुलिस ने घटना की जांच सुसाइड और मर्डर की आशंका को लेकर शुरू तो की, लेकिन कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे वो किसी नतीजे तक पहुंच पाए। हालांकि घटना के बाद मौके पर पुलिस अफसरों की मौजूदगी में एफएसएल की टीम बुलाकर सैंपल कलेक्ट कराया गया। पुलिस ने धर्मशाला में आस-पास के कमरों की पूरी पड़ताल कराई। वहां ठहरने वाले एक-एक व्यक्ति से पूछताछ भी की। धर्मशाला के केयर टेकर से भी पुलिस ने हर एंगल पर पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में यह जानने की कोशिश की कि फंदे पर लटके लोग कमरे में कब ठहरे? घटना से पहले कब बाहर निकले? कमरे में बाहर से भी कोई व्यक्ति आया? किसी से कोई लड़ाई झगड़ा तो नहीं हुआ? इन सभी सवालों के जवाब में कोई क्लू या सबूत नहीं मिले। पुलिस की इन्वेस्टिगेशन के दौरान धर्मशाला के केयर टेकर ने बताया कि 31 जनवरी को सभी ने बुकिंग कराई थी। अगले ही दिन यानी कि 1 फरवरी को फिर 2 हजार रुपए देकर बुकिंग को और आगे बढ़ाया। नए-नए आए थे, इसलिए किसी से कोई लड़ाई नहीं थी। यहां लोग ध्यान साधना के लिए आते हैं, इसलिए किसी को कोई डिस्टर्ब नहीं करता है। इस कारण से कोई देखा नहीं कि वह अंतिम बार कमरे से कब बाहर आए। क्या कहती है पुलिस की थ्योरी घटना में पुलिस की थ्योरी कहती है कि दरवाजा तोड़कर डेड बॉडी निकाली गई। कमरे के अंदर आने जाने का कोई और रास्ता नहीं था। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति के आने-जाने का सवाल ही नहीं उठता है। अगर दरवाजा अंदर से बंद नहीं होता, तो मर्डर की आशंका बढ़ जाती। केस क्लोज करने की 2 वजह 4 लोगों की मौत की असली वजह जानने की बजाए पुलिस इसे सुसाइड बताकर केस को क्लोज करने की पूरी तैयारी में है। केस क्लोज करने की दो बड़ी वजह सामने आई। 1. केस लड़ने वाला कोई नहीं बचा पुलिस ने मृतकों के परिवार वालों से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि अब उनके परिवार में कोई बचा ही नहीं है। पुलिस की सूचना पर मृतकाें के पट्टीदार राजगीर पहुंचे और पोस्टमॉर्टम के बाद पटना में ही चारों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस को इस घटना में एक भी ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे उसकी जांच आगे बढ़े। केस लड़ने वाला भी कोई नहीं है, इस कारण से पुलिस इसे सुसाइड मानकर केस को क्लोज करने की तैयारी में जुट गई है। 2. मर्डर का एंगल नहीं होने से केस क्लोज करना आसान घटना बंद कमरे में हुई है। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर घर के अंदर से शव बरामद किया है। पुलिस को कहीं से कोई ऐसा इनपुट नहीं मिला, जिसमें कहीं से मर्डर की कोई आशंका हो, इसलिए इस केस को क्लोज करना पुलिस के लिए काफी आसान है। इस केस में पुलिस मौत की वजह की झंझट में पड़ने के बजाए केस क्लोज कर रही है। कर्नाटक से लेकर बिहार तक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन पुलिस की इन्वेस्टिगेशन के हर पहलू को एक एक कर समझने के बाद इस पूरे घटना में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा था। पुलिस से बातचीत के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बिहार से लेकर कर्नाटक के बंगलुरु तक पड़ताल की तो ब्लैक मैजिक का जानलेवा रहस्य सामने आया। धर्मशाला से मिला ब्लैक मैजिक का क्लू भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने कमरे में फंदे से लटकते शवों और मौत के ट्रेंड पर राजगीर के जैन दिगंबर धर्मशाला से इन्वेस्टिगेशन शुरू की। पुलिस और केयर टेकर से लेकर धर्मशाला से जुड़े लोगों की बातचीत में यह समझ में आ गया कि मौत का कारण कोई तंत्र-मंत्र या ब्लैक मैजिक है। पुलिस से अलग जब हमने ब्लैक मैजिक की आशंका को लेकर पड़ताल शुरू की तो कड़ी दर कड़ी मामला जुड़ता गया। जैन दिगंबर धर्मशाला के केयर टेकर विजय ने बताया कि ऐसे कम लोग आते हैं, जो घर का पूरा सामान लादकर आते हैं। ये लाेग एक डीसीएम से सामान भरकर लाए थे। जब सामान का पूछा गया तो बताए कि सभी नेपाल से होकर आ रहे हैं, इसलिए सामान ज्यादा हो गया है।चारों यहां 31 जनवरी को दिन में एक बजे आए। इसमें एक पुरुष था जिसका नाम नागा प्रसाद था। धर्मशाला के रजिस्टर में एंट्री भी ऑफिस आकर नागा ने कराई थी, उसके बाद उस दिन सभी घूमने चले गए थे। जब कमरे से दुर्गंध आने लगी तब पुलिस को सूचना दी गई। परिवार वालों से बातचीत से यह तो पता चल गया कि इनके घर में कुछ न कुछ तो चल रहा था। धर्मशाला के केयर टेकर विजय ने बताया कि परिवार में कुछ न कुछ चल रहा था। इसकी पड़ताल के दौरान हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम को धर्मशाला से मृतकों के पट्टीदार रवि प्रसाद का नंबर मिला। रवि ने भी बताया कि पूरा परिवार क्लेश से अशांत था, शांति का उपाय ढूंढ रहा था।
भांजे की हत्या के बाद ब्लैक मैजिक का साया रवि प्रसाद ने बताया कि चारों मृतक उनके पट्टीदार थे। वह लोग लगभग 5 साल से बेंगलुरु में अलग रह रहे थे। हम लोग बेंगलुरु से 90 किमी दूर रहते हैं। लगभग 15 साल पहले नागा की बड़ी बहन शिल्पा जीआर की शादी हुई। शादी के बाद बहन-बहनोई से नहीं बनती थी। अक्सर परिवार में मारपीट होती थी। नागा की बहन को एक बेटा हुआ, लेकिन बहन-बहनोई का रिश्ता ऐसा खराब हुआ कि तलाक की स्थिति बन गई। बहन नागा के घर आकर रहने लगी। मायके में भी काफी लड़ाई झगड़ा होता था। नागा के पिता की मौत के बाद उसका पूरा परिवार बैंगलुरु में जाकर रहने लगा। लड़ाई झगड़े में अक्सर नागा बोलता था कि एक दिन पूरे परिवार को खत्म कर देंगे, उस दिन घर में शांति आएगी। वह अक्सर शांति और इधर उधर की मैजिक की बात करता था। घर में अशांति और कलह के साथ नागा की गतिविधियों से लग रहा था, वह किसी ब्लैक मैजिक के चक्कर में पड़ गया था। 4 अगस्त 2025 की सुबह नागा ने अपने 14 साल के भांजे अमोघ कीर्ति की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। घटना के बाद घर वालों ने एक साथ मरने के लिए गैस सिलेंडर में आग लगा दी, लेकिन सब बच गए। इसके बाद उसने तालाब में कूदकर सुसाइड करने की भी कोशिश की, लेकिन बच गया। घर वालों ने कोई आवेदन नहीं दिया। पुलिस ने यूडी केस दर्ज कर जेल भेज दिया। नागा 5 माह जेल में रहा, लेकिन वह ब्लैक मैजिक से बाहर नहीं निकला। बहन ने ही प्रयास कर जमानत कराई, लेकिन इसके बाद भी हर समय वह शांति के लिए तरह-तरह के ब्लैक मैजिक वाली बात करते रहता था।
परिवार वालों से बातचीत में नागा पर शांति के लिए अपने ही भांजे की हत्या का आरोप लगा। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम इस मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए घटना के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बंगलुरु के सोलादेवनहल्ली थाना के दरोगा धनुष चंद से बात की तो उन्होंने भी परिवार में अशांति और क्लेश के साथ कुछ न कुछ हलचल होने की बात बताई। धनुषचंद के मुताबिक नागा का पूरा परिवार साइको लग रहा था। वह सब किस साए में थे, क्या कर रहे थे, कुछ समझ में नहीं आ रहा था। घटना में जांच के दौरान परिवार वालों से मिला, लेकिन सभी एक से बढ़कर एक थे। जिसके बेटे की नागा ने हत्या की वही बहन नागा को बचाने में लगी थी, जबकि हत्या के 3 दिन बाद नागा खुद थाने में सरेंडर करने आया था। यह सब समझ से परे है, ऐसा कैसे कोई करता है। कुछ न कुछ तो गड़बड़ चल रहा था, नागा के परिवार में जिसका कनेक्शन कुछ भी हो सकता है।
एक साथ 4 मौत में ब्लैक मैजिक के कनेक्शन को लेकर हम क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ बिंदा सिंह से मिले। डॉ बिंदा सिंह को जब घटना के बारे में और डेड बॉडी की स्थिति और मौत के ट्रेंड को बताया गया तो उन्होंने कहा, हालात ब्लैक मैजिक की तरफ इशारा कर रहे हैं। ऐसा उसी कंडिशन में होता है, जब इंसान बहुत परेशान होता है। घर में अशांति होती है, कलह के कारण परिवार लड़ता-झगड़ता है। इंसान जब ऐसी दिक्कतों में घिरता है तो ब्लैक मैजिक की तरफ भागता है। वह कुछ न कुछ ऐसी शक्तियों से घिर जाता है, जिससे कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। मुंह पर एक ही तरह का टेप लगाना और एक तरह से रस्सी से हाथ-पैर बांधना, ये संकेत है कि वह ऐसा कर किसी शक्ति को संदेश देना चाहता था। मानसिक बीमारी के कारण भी लोग ऐसे ब्लैक मैजिक की तरफ आकर्षित हो जाते हैं। आजकल सोशल मीडिया पर भी ऐसे कंटेंट अधिक दिखते हैं, जिसमें समस्याओं के समाधान के लिए ब्लैक मैजिक या अन्य किसी शक्तियों की तरफ ले जाने के लिए उपाय बताए जाते हैं। जब इंसान चारों तरफ से थक जाता है तो इंसान तंत्र-मंत्र और काला जादू के तरफ भागता है। उसे लगता है कि इन सभी चीजों से उसे खुशी मिलेगी, वह अपनी खुशी तलाशता है। जब उसे खुशी नहीं मिलती है तो उसे लगता है कि शायद सुसाइड या ग्रुप सुसाइड से उसे शांति और खुशी मिल जाएगी। यह मात्र एक मानसिक बिमारी है। यह ब्लैक मैजिक का ही सिंबल होता है कि एक साथ ग्रुप सुसाइड करना, सभी के हाथ-पैर बांध देना, मुंह पर टेप चिपकाना।