बेवफाई से 59% शादियां टूट रहीं:UP में 100 में 9 रिश्ते नहीं टिकते, कुत्ते के चक्कर में भी शादी टूटी, जानिए ‌वजह

यूपी से हर दिन शादी टूटने, तलाक और पति-पत्नी के अलग होने की खबरें सामने आती रहती हैं। कभी घरेलू विवाद, कभी अफेयर, तो कभी आपसी असहमति से रोज कोई न कोई रिश्ता टूटता दिख रहा। सवाल यह कि क्या यह सिर्फ कुछ व्यक्तिगत मामलों तक सीमित है? या फिर शादियों का टूटना धीरे-धीरे एक सामाजिक संकट का रूप ले रहा है? आखिर भारत में कितने लोग तलाकशुदा हैं? तलाक के मामले क्यों बढ़ रहे? क्या कानून शादियों को बचाने में सक्षम है? दुनिया के मुकाबले तलाक के मामले में भारत किस पोजिशन पर है? इन सभी सवालों के जवाब के लिए पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले पढ़िए ये मामला यूपी के फतेहपुर में 18 फरवरी को दुल्हन तनु ने शादी इसलिए तोड़ दी, क्योंकि एक बाराती ने उसके पालतू कुत्ते को लात मार दी थी। दूल्हा-दुल्हन पहले ही आर्य समाज मंदिर में शादी कर चुके थे, कोर्ट मैरिज का रजिस्ट्रेशन भी करा चुके थे। 18 फरवरी को सामाजिक रूप से शादी होनी थी। जयमाल के बाद रस्मों के दौरान कुत्ते को लात मारने की घटना से विवाद हुआ। यह बाद में मारपीट में बदल गया। हंगामे में कई लोग घायल हुए। दुल्हन की उंगली भी टूट हो गई। पुलिस के समझाने के बावजूद दुल्हन शादी तोड़ने पर अड़ी रही। आजकल रिश्ते इतनी जल्दी क्यों टूट रहे? लखनऊ के रिलेशनशिप एक्सपर्ट दीपक वर्मा बताते हैं- आज रिश्तों के जल्दी टूटने की सबसे बड़ी वजह ईगो की समस्या है। लोग एक-दूसरे को सहन करने को तैयार नहीं हैं। महिलाएं पुरुषों की बात सुनना नहीं चाहतीं और पुरुष महिलाओं की बात समझने को तैयार नहीं होते। उनका कहना है कि युवा पीढ़ी पारंपरिक मूल्यों और नियमों का पालन नहीं करना चाहती। कई लोग शादी को फिल्मों और सपनों जैसा मान लेते हैं। लेकिन जब हकीकत सामने आती है, तो रिश्तों को संभालना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। दीपक वर्मा मानते हैं- इसमें सोशल मीडिया का करीब 95 प्रतिशत योगदान है। लोग टीवी सीरियल, रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट देखकर रिश्ते निभाने की कोशिश करते हैं। वे रील की दुनिया में जीने लगते हैं। जबकि, वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियों को स्वीकार नहीं कर पाते। जब इच्छाएं पूरी नहीं होतीं, तो नतीजा तलाक, अलगाव और टूटते रिश्तों के रूप में सामने आता है। दीपक कहते हैं कि जहां पहले लोग हालात के साथ समझौता कर रिश्ते निभाने की कोशिश करते थे। वहीं अब गुस्सा, ईगो और जल्दबाजी में लिए गए फैसले रिश्तों को तोड़ने लगे हैं। भारत में कितने लोग तलाकशुदा? 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में 13.62 लाख से अधिक लोग तलाकशुदा थे। यह कुल आबादी का 0.11 फीसदी है। चौंकाने वाली बात यह है कि तलाकशुदा महिलाओं की संख्या पुरुषों से लगभग दोगुनी रही। उस समय जहां 4.52 लाख पुरुष तलाकशुदा थे, वहीं 9.09 लाख से ज्यादा महिलाएं इस श्रेणी में थीं। हैरानी की बात यह है कि तलाकशुदा से 3 गुना ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की थी, जो शादी के बाद अलग-अलग रह रहे थे। पति या पत्नी से अलग रह रही आबादी 35.35 लाख से ज्यादा थी। इनमें भी महिलाएं ही ज्यादा थीं। करीब 24 लाख महिलाएं अपने पति से अलग रह रही थीं। एक आंकड़ा ये भी हैरान करता है कि शहरों की तुलना में गांवों में तलाकशुदा लोगों की संख्या ज्यादा है। शहरों में 5.04 लाख तलाकशुदा थे तो गांवों में 8.58 लाख से ज्यादा। इतना ही नहीं, गांवों में करीब 24 लाख लोग ऐसे थे, जो पति या पत्नी से अलग रह रहे थे। किस उम्र में सबसे ज्यादा तलाक? साल 2021 से 2022 के बीच नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे ने एक स्टडी की। सामने आया कि देशभर में 25 से 34 साल की उम्र वाले लोगों ने सबसे ज्यादा तलाक लिए। इसके बाद 18 से 24 साल के लोगों ने तलाक के लिए सबसे ज्यादा अर्जी डाली। इसके बाद 35 से 44 और फिर 45 से 54 साल की उम्र वाले लोग हैं। लिस्ट में 55 से लेकर 64 साल और इससे ज्यादा की उम्र के लोग भी शामिल थे। मुंबई फैमिली कोर्ट के एक अध्ययन के अनुसार, 40% मामलों में शादी के 3 साल के भीतर ही रिश्ता टूट जाता है। तलाक मांगने वाली अधिकतर महिलाएं 25 से 34 साल के बीच की हैं। एक स्टडी के अनुसार, जनवरी, सितंबर और मई में तलाक की सबसे ज्यादा याचिकाएं आती हैं। वहीं, अक्टूबर-नवंबर, दिसंबर और मार्च में सबसे कम। इसके पीछे त्योहार, बच्चों की छु​ट्टियां, अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसे कारण गिनाए जाते हैं। बार-बार रिश्ते बदलने की मानसिक वजहें क्या? गोरखपुर जिला अस्पताल के साइकेट्रिस्ट डॉ. अमित शाही कहते हैं कि बार-बार रिश्ते बदलने के पीछे कमिटमेंट का डर, भावनात्मक असुरक्षा और अवास्तविक अपेक्षाएं बड़ी वजह हैं। ईगो, धैर्य की कमी और पुराने रिश्तों का मानसिक आघात भी रिश्तों की अस्थिरता बढ़ाता है। सोशल मीडिया और विकल्पों की अधिकता के कारण लोग तुलना करने लगते हैं, जिससे स्थायी रिश्ते निभाना मुश्किल हो जाता है। रिश्तों में जरूरी है धैर्य
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका गौतम बताती हैं- शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं, दो दिलों का गहरा रिश्ता होती है। इसमें धैर्य और समझ सबसे जरूरी है। पति-पत्नी को अपने पार्टनर से खुलकर बात करना चाहिए। छोटी-छोटी खुशियों को मिलकर मनाना चाहिए, एक-दूसरे के लिए समय निकालना चाहिए। रिश्ते में माफी मांगना और धन्यवाद कहना कोई कमजोरी नहीं, प्यार और भरोसे को मजबूत करने का तरीका है। सोशल मीडिया रिश्तों पर कितना असर डाल रहा? डॉ. प्रियंका गौतम कहती हैं- सोशल मीडिया अपने आप में बुरा नहीं, लेकिन उसका ज्यादा और अनियंत्रित इस्तेमाल आज रिश्तों में चुनौतियां ला रहा है। जब लोग फोन और सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताते हैं, तो फेस टू फेस बातचीत और रिश्तों की गहराई कम होती है। इससे पार्टनर के बीच भावनात्मक और शारीरिक दूरी बढ़ सकती है। सोशल मीडिया पर अन्य लोगों से बातें, लाइक्स-कमेंट्स या छुपकर चैट करना शक, जलन और अविश्वास पैदा कर सकता है। दूसरों की परफेक्ट देखकर अपनी जिंदगी और रिश्तों की तुलना होती है, जिससे असंतोष और अवसाद जैसा मनोवैज्ञानिक तनाव भी बढ़ता है। सोशल मीडिया खुद रिश्तों का दुश्मन नहीं, लेकिन जब हम उसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाते हैं, तो असल दुनिया और रिश्तों की गुणवत्ता कमजोर होती है। क्या कपल काउंसिलिंग से रिश्ते बच सकते हैं? गोरखपुर जिला अस्पताल के साइकेट्रिस्ट डॉ. अमित शाही बताते हैं- अगर सही समय पर कपल काउंसलिंग की गई, तो रिश्ता बच सकता है। काउंसिलिंग के जरिए पति-पत्नी को एक-दूसरे की बात समझने, अपनी भावनाएं खुलकर रखने और समस्याओं का बात करने में हेल्प मिलती है। डॉ. शाही का कहना है कि काउंसिलिंग ईगो, गलतफहमियों और बात की कमी को दूर करने में प्रभावी साबित होती है। इससे कपल को यह समझने का मौका मिलता है कि समस्या पार्टनर नहीं, बल्कि स्थिति है। शादी टूटने को लेकर क्या कहती है बीएचयू की रिसर्च? अक्टूबर, 2025 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के 3 प्रोफेसर्स ने 6 महीने की रिसर्च के बाद बड़ा खुलासा किया। उन्होंने शादियों के टूटने की वजह कुंडली न मिलना बताया। इस रिसर्च में प्रोफेसर विनय पांडे, आशुतोष त्रिपाठी और अमित कुमार मिश्रा के साथ शोधार्थी गणेश प्रसाद एवं नेपाल की पीएचडी छात्रा रोदना घिनरे शामिल रहे। इसमें सामने आया कि 37% शादियां सिर्फ इसलिए टूट रहीं, क्योंकि वर-वधू की कुंडली सही तरीके से नहीं मिलाई जा रही। अध्ययन के अनुसार, ग्रह दोष के बावजूद शादियां की जा रहीं, जिससे शादी के बाद रिश्तों में गंभीर टकराव हो रहा है। ऐसे मामलों में कई दंपति लव अफेयर में पड़ जाते हैं। रिश्तों में दरार आने पर नया जीवन साथी खोजते हैं, और कुछ मामलों में हालात अपराध तक पहुंच जाते हैं। प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि लड़के और लड़की के 32 गुण मिलने का मतलब यह नहीं कि ग्रह भी अनुकूल हैं। ग्रह असंतुलन होने पर विवाह बाद में अस्थिर होता है। क्या ग्रह दोष सच में वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं? बीएचयू के एस्ट्रोलॉजर प्रो. विनय पांडे के अनुसार, ज्योतिष में प्रकृति और प्रवृत्ति दोनों की क्षमता को परखा जाता है। ग्रह मिलान के दौरान यह देखा जाता है कि सामने वाला व्यक्ति जीवनसाथी के रूप में अनुकूल है या नहीं? दोनों की कुंडली, ग्रहों की स्थिति और दोषों का विश्लेषण किया जाता है। बहुत से लोगों के बीच यह विश्वास है कि मंगल दोष, शुक्र की कमजोर स्थिति या अन्य ग्रहों की प्रतिकूलता वैवाहिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। ज्योतिष में इन योगों को शादी में देरी, तनाव या मतभेद से जोड़ा जाता है। हालांकि रिलेशनशिप एक्सपर्ट का मानना है कि ग्रह दोष केवल एक संभावित कारण होते हैं, निर्णायक नहीं। वैवाहिक जीवन पर वास्तविक असर बातचीत की कमी, अहं, जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएं और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव जैसे सामाजिक व मानसिक कारणों का अधिक होता है। जहां ज्योतिष को मानने वाले लोग ग्रह दोष को संघर्ष की वजह मानते हैं, वहीं समाजशास्त्र और मनोविज्ञान के एक्सपर्ट इसे लाइफस्टाइल और सोच से जुड़ा हुआ मानते हैं। तलाक को लेकर क्या कहता है कानून? हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू होता है। इस कानून की धारा- 13 में तलाक का प्रावधान है, जिसमें तलाक के कारण बताए गए हैं। अगर पति-पत्नी आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए धारा- 13B है। इसके तहत तभी आवेदन किया जा सकता है, जब शादी को कम से कम एक साल हो चुका हो। आमतौर पर फैमिली कोर्ट दोनों को सोचने और सुलह का मौका देने के लिए 6 महीने का समय देता है। अगर इस दौरान समझौता नहीं होता, तो तलाक मंजूर हो जाता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर पति-पत्नी का रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है और साथ रहने की कोई संभावना नहीं है, तो 6 महीने की वेटिंग अवधि माफ की जा सकती है। यानी आपसी सहमति से तलाक लेने पर इंतजार जरूरी नहीं रहेगा। ————————— ये खबर भी पढ़ें… प्रसव पीड़ा में महिला ने खुद का पेट फाड़ा, लेबर पेन को हल्के में लेना कितना जानलेवा, क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बहराइच के बौंडी इलाके में 19 फरवरी को प्रसव पीड़ा बर्दाश्त न होने पर एक गर्भवती महिला (ननकई) ने अपना पेट ब्लेड से काट दिया। पड़ोसियों ने समय रहते ननकई को एंबुलेंस से फखरपुर सीएचसी पहुंचाया। वहां उसकी नॉर्मल डिलीवरी कराई गई और उसने बेटी को जन्म दिया। फिलहाल महिला की हालत नाजुक बनी है। पढ़िए पूरी खबर…

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