चंद्रशेखर शापित हस्तिनापुर सीट से विधानसभा चुनाव क्यों लड़ना चाहते:4 चुनाव का रिकॉर्ड- यहां जिस पार्टी का विधायक, उसकी UP में सरकार

‘अब तीसरी बार यहां से MLA नहीं बनना। क्योंकि, हस्तिनापुर पर तो शुरू से द्रौपदी का श्राप है।’ ये बातें 2 महीने पहले भाजपा विधायक दिनेश खटीक ने एक सार्वजनिक मंच से कही थी। अब एक बार फिर हस्तिनापुर सीट सुर्खियाें है। वजह नगीना से सांसद चंद्रशेखर। चंद्रशेखर हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। इसकी 3 वजह भी बताई जा रही हैं। पहली- पिछले 4 विधानसभा चुनाव का रिकॉर्ड रहा है कि इस सीट से जिस पार्टी का विधायक बनता है, वही पार्टी यूपी में सरकार बनाती है। दूसरी- ये रिजर्व सीट है, दलित नेताओं के लिए सुरक्षित सीट मानी जाती है, यानी चुनाव जीतना लगभग तय माना जाता है। तीसरी- चंद्रशेखर को लेकर कहा जाता है कि वो सोशल मीडिया पर ज्यादा छाए रहते हैं, नगीना के बाद हस्तिनापुर से चुनाव जीतकर वो साबित कर सकते हैं कि उनका वेस्ट यूपी में उनका जमीनी आधार मजबूत है। हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर चंद्रशेखर कहते हैं- पॉलिटिक्स में चर्चाएं होती रहती हैं, पार्टी हाईकमान तय करेगी कि हम या हमारे कार्यकर्ता किन सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। जो पार्टी तय करेगी, वही हमारा फैसला होगा। आजाद समाज पार्टी यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। उधर, हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने चंद्रशेखर को लेकर माहौल बनाना भी शुरू कर दिया है। मुख्य बाजार में चंद्रशेखर के नाम की वॉल पेंटिंग कराकर पब्लिक को मैसेज दिया जा रहा है। अगर संसदीय क्षेत्र पर नजर डालें तो नगीना लोकसभा क्षेत्र से लगी हुई विधानसभा सीट हस्तिनापुर है, यहां चंद्रशेखर का प्रभाव पहले से माना जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट… एक्सपर्ट व्यू… दिनेश खटीक का सीट पर विरोध, फायदा सपा को
चंद्रशेखर नगीना लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद हैं। वो विधायक का चुनाव लड़ेंगे, तो क्या समीकरण होंगे? इसका जवाब सीनियर जर्नलिस्ट पुष्पेंद्र शर्मा देते हैं। वे कहते हैं- ये दलित बाहुल्य सीट पर वोटर को कंफ्यूज करने की सियासत है। रिजर्व सीट पर कोई दोबारा विधायक नहीं बनता है, मगर दीनेश खटीक ने ये समीकरण बदल दिए। वह लगातार 3 बार चुनाव जीते हैं। हाल में दिनेश खटीक ने कहा कि वो इस श्रापित सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। क्योंकि वो जानते हैं कि क्षेत्र में उनका विरोध है, उनके खिलाफ पूरा माहौल है, इसलिए वो पहले से खुद को सेफ कर रहे हैं। हमने पूछा- फिर कौन सी पार्टी ज्यादा मजबूत दिख रही है? वह कहते हैं- ये सारे समीकरण इस सीट पर सपा को मजबूत करते हैं। हमने पूछा- फिर चंद्रशेखर यहां से क्यों विधायक बनना चाहते हैं? चंद्रशेखर खुद को दलित लीडर साबित करना चाहते हैं…
पुष्पेंद्र कहते हैं- देखिए, हस्तिनापुर बिजनौर लोकसभा में आती है, बिजनौर से सटी नगीना सीट है, जहां से चंद्रशेखर सांसद हैं। चंद्रशेखर पूरे देश में अपनी मजबूती का मैसेज देना चाहते हैं। जिस तरह छुटमलपुर के शब्बीरपुर से निकलकर चंद्रशेखर ने सांसदी का चुनाव जीता। मीरापुर उपचुनाव में उनकी पार्टी के प्रत्याशी ने ब्लॉक प्रमुख का मजबूत चुनाव लड़ा तो आजाद समाज पार्टी का नाम बढ़ा। अब मप्र से लेकर पूर्वी यूपी तक में चंद्रशेखर का दखल बढ़ रहा है। चंद्रशेखर केवल मायावती को इनडायरेक्टली हिट करके खुद को दलितों का बड़ा नेता साबित करना चाहते हैं। इसलिए उसने रिजर्व सीट को चुन रहे हैं। लेकिन एक सिटिंग सांसद, विधायकी के लिए रिजाइन कर देगा, ये मुश्किल है। केवल शिगूफा है। इसे दलित वोट बांटने की स्ट्रेटजी कह सकते हैं। इस स्ट्रेटजी में चंद्रशेखर से ज्यादा कोई और शामिल है। जिसे हस्तिनापुर में दलितों के बंटने से फायदा मिलेगा। यहां दलितों को डायवर्ट, डिवाइड करने का एक फार्मूला है। ताकि विपक्ष को इसका लाभ न मिले। अगर इतना बड़ा नेता लड़ता है, अगर वो किसी गठबंधन में लड़ता है तो वो सीटें बढ़ाने की बार्गेनिंग भी कर सकता है। अखिलेश का हस्तिनापुर पर फोकस, बोले- जीतना जरूरी
सीनियर जर्नलिस्ट राजेश शर्मा कहते हैं- चंद्रशेखर ने ये मान लिया है कि वो हस्तिनापुर से चुनाव जीतकर यूपी पर राज कर सकते हैं। हस्तिनापुर रिजर्व सीट है, लेकिन यहां गुर्जर वोट मायने रखता है। गुर्जर वोटर यहां चुनाव तय करते हैं। चंद्रशेखर यहां चुनाव लड़ते हैं, मगर उनके सामने सपा और बसपा भी दलित कैंडिडेट ही उतारेगे, इससे दलित वोट डिवाइड होगा। दलित और गुर्जर वोट बंटने से सीट पर मुकाबला और रोचक हो जाएगा। चंद्रशेखर ने नगीना सीट पर वोटर्स के बंटने की चुनौती के बीच चुनाव लड़ा, वही चुनौती इस हस्तिनापुर सीट पर भी होगी। 4 महीने पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दिल्ली में बैठक की थी, इसमें तमाम गुर्जर नेताओं को बुलाया था, उन्होंने कहा था कि इस बार हस्तिनापुर सीट ही फतेह करनी है। उन्होंने PDA का बड़ा सम्मेलन हस्तिनापुर में कराया था। 3 दिन पहले रविंद्र भाटी बने आसपा मंडल प्रभारी
चंद्रशेखर ने 3 दिन पहले ही पार्टी के प्रमुख गुर्जर नेता और राष्ट्रीय महासचिव रविंद्र सिंह भाटी को मेरठ मंडल का प्रभारी नियुक्त किया है। रविंद्र सिंह भाटी आजाद समाज पार्टी में एक बड़ा गुर्जर चेहरा हैं। हाल ही में सितंबर 2025 में मेरठ में हुई गुर्जर महापंचायत के बाद जो बवाल हुआ था, उसका नेतृत्व रविंद्र भाटी ने ही किया था। रविंद्र भाटी सहित 22 नेता 8 दिन तक मेरठ जेल में बंद रहे थे। नोएडा में सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति विवाद से लेकर गुर्जरों की पंचायतों में भी रविंद्र सिंह भाटी हमेशा आगे रहे हैं। हस्तिनापुर में भी गुर्जर मतदाओं की संख्या अच्छी है, इसलिए चुनाव से पहले ही आसपा ने वहां रविंद्र भाटी को मंडल प्रभारी बनाया है। सहारनपुर, मुरादाबाद और मेरठ तीन मंडलों की जिम्मेदारी दी है। BJP विधायक के बयान से सियासत गरमाई MLA दिनेश बोले- श्रापित भूमि से मुझे चुनाव नहीं लड़ना
2 महीने पहले BJP विधायक दिनेश खटीक एक स्कूल फंक्शन में गए थे। मंच से माइक संभालने के बाद उन्होंने एक बड़ा पॉलिटिकल शिगूफा छोड़ा था। कहा- मुझे किसी भी हाल में शापित सीट से चुनाव नहीं लड़ना। दो बार तो यहां से जीत चुका हूं। लेकिन, अब तीसरी बार यहां से MLA नहीं बनना। क्योंकि, हस्तिनापुर पर तो शुरू से द्रौपदी का श्राप है। जो वीडियो सामने आया, इसमें दिनेश खटीक के बगल में आचार्य प्रमोद कृष्णन भी खड़े दिख रहे हैं। हालांकि बाद में उनकी सफाई भी आई। कहा- मेरे कहने का ये मतलब नहीं था। मैं हमेशा हस्तिनापुर की जनता की सेवा करना चाहता हूं। माना जा रहा है कि दिनेश खटीक ने अपने खिलाफ हो रही एंटी इंकम्बेंसी और क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपने विरोध को देखते हुए अपने बचाव में कही थी। क्योंकि इस बार चुनाव में उनका टिकट खतरे में माना जा रहा है। अब चंद्रशेखर आजाद को जानिए…
………… ये खबर भी पढ़ें – शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेसियों का हल्ला-बोल, पुलिस से धक्का-मुक्की:आगरा में बोले- सरकार परमाणु बम से छेड़छाड़ कर रही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कांग्रेस सड़कों पर उतर आई है। काशी, आगरा समेत यूपी के कई शहरों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। शंखनाद कर सरकार को चेतावनी दी। कई जगह पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। आगरा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य के पोस्टर लहराए, जबकि लखनऊ में प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। मेरठ, बुलंदशहर, गोरखपुर और ललितपुर में भी कांग्रेसियों ने जमकर नारेबाजी की। पढ़िए पूरी खबर…

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