अमरजीत कौर मौत मामला, चंडीगढ़ प्रशासक से मिले परिजन:कटारिया ने SSP को दिए एक्शन लेने के निर्देश, 2 डॉक्टरों पर FIR

चंडीगढ़ में 74 वर्षीय अमरजीत कौर की मौत के मामले में 18 दिसंबर 2024 को सेक्टर-33 स्थित लैंडमार्क अस्पताल के 2 डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। लेकिन अभी तक पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश नहीं किया है। इसे लेकर मृतका के बेटे ने चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद प्रशासक कटारिया ने SSP को फोन कर इस मामले में जल्द कार्रवाई करने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। पुलिस ने डॉ. हरसिमरन सिंह और डॉ. परमिंदर सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत) के तहत सेक्टर-34 थाने में मामला दर्ज किया था। PGI को जांच के लिए लिखा मामले में थाना-34 प्रभारी इंस्पेक्टर सतिंदर कुमार ने कहा कि सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच के डायरेक्टर-प्रिंसिपल की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट में कुछ खामियां थीं। इसे देखते हुए पुलिस ने PGI को जांच के लिए पत्र लिखा है। जैसे ही जांच पूरी होगी, कोर्ट में चालान पेश कर दिया जाएगा। वहीं, मृतका के बेटे सुखविंदर ने सवाल उठाया कि जिस मेडिकल बोर्ड ने पहले रिपोर्ट दी थी, अगर उसमें कुछ खामियां थीं तो उन्हें लिखित रूप में क्यों नहीं बताया गया। PGI को दोबारा लिखने की जरूरत क्यों पड़ी। पुलिस पर आरोपियों को बचाने का आरोप मृतका अमरजीत कौर के बेटे सुखविंदर पाल सोढ़ी ने बताया कि उनकी मां को 16 मार्च 2024 को जांघ की हड्डी (फीमर) टूटने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार ने डॉक्टरों से एमआरआई के अनुकूल और उच्च गुणवत्ता वाला इम्प्लांट लगाने का अनुरोध किया था। महिला की सर्जरी डॉ. हरसिमरन ने की और परिवार को भरोसा दिलाया कि इम्प्लांट मानकों के अनुसार है। हालांकि, महिला को 18 मार्च को ही बिना पर्याप्त देखभाल के छुट्टी दे दी गई।3 अप्रैल को जब अमरजीत कौर दोबारा अस्पताल पहुंचीं तो उन्हें भ्रम और कमजोरी की शिकायत थी। जांच में सोडियम का स्तर बेहद कम पाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती नहीं किया और केवल दवाइयां देकर घर भेज दिया। अगले दिन उन्हें तेज दौरे पड़े, जिसके बाद उन्हें सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में भर्ती कराया गया। वहां उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। जीएमसीएच में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने इम्प्लांट की एमआरआई संगतता का प्रमाण मांगा, लेकिन परिजनों का आरोप है कि लैंडमार्क अस्पताल ने लिखित प्रमाण देने से इनकार कर दिया। 4 अप्रैल को हालत और बिगड़ने के बाद अमरजीत कौर की 12 दिन बाद मौत हो गई। सुखविंदर सिंह ने थाना पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में आरोपियों को बचाने का काम कर रही है, इसलिए केस को लंबित रखा जा रहा है। मेडिकल बोर्ड की जांच में लापरवाही साबित पीड़ित परिवार की शिकायत पर यूटी मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। सेक्टर-32 जीएमसीएच के डायरेक्टर-प्रिंसिपल की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जांच के बाद अस्पताल को लापरवाही का दोषी पाया। रिपोर्ट में घटिया या संदिग्ध इम्प्लांट का इस्तेमाल, समय से पहले छुट्टी देना, गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना और आपात स्थिति में सहयोग न करना शामिल बताया गया। मेडिकल बोर्ड ने यह भी कहा कि अस्पताल के डॉक्टर कम सोडियम के कारण भर्ती की सलाह या मरीज द्वारा मना करने से जुड़े कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सके। कानूनी राय लेने के बाद 18 दिसंबर को पुलिस ने मामला दर्ज किया।

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