भास्कर न्यूज | जालंधर सब्जी उत्पादन की नई तकनीकों की जानकारी मलसियां में बागबानी विभाग के ‘इंटीग्रेटेड हाई-टेक वेजिटेबल प्रोडक्शन-कम-टेक्नोलॉजी डिसेमिनेशन सेंटर’ में मिलेगी। सेंटर की योजना 2022-23 के बजट में पारित हुई थी। इसके लिए 11 करोड़ रुपए रखे गए थे। सेंटर की जमीन की इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लोकनिर्माण विभाग ने बाउंड्रीवाल प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट अलॉटमेंट प्रोसेस शुरू किया। इस सेंटर का मकसद क्या है? बागबानी विभाग सब्जी उत्पादन और एग्रीबिजनेस को बढ़ावा देने के लिए इस सेंटर से जालंधर के किसानों को नए तौर तरीकों से जोड़ेगा। परंपरागत गेहूं-धान के फसल चक्र से बाहर निकलने के लिए यह सेंटर डिजाइन किया गया है। यहां अत्याधुनिक तकनीकों से सब्जियों का उत्पादन होगा, बल्कि किसानों को नई तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आमदनी में इजाफा: हाई-टेक खेती के जरिए किसान कम जमीन में अधिक पैदावार ले सकेंगे। विदेशी और ऑफ-सीजन सब्जियों के उत्पादन से बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे। हाइब्रिड और रोगमुक्त पौध: सेंटर में आधुनिक नर्सरी तैयार की जाएगी, जहां से किसानों को बीमारियों से मुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीज और पौध मिल सकेंगे। पानी की बचत, पैदावार ज्यादा: यहां ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इससे पानी की खपत 50% तक कम होगी और खाद का असर पौधों की जड़ों तक हो सकेगा। मार्केटिंग और एक्सपोर्ट के मौके: सेंटर के माध्यम से किसानों को ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के गुर सिखाए जाएंगे, ताकि वे अपनी फसल को सीधे बड़े शहरों या विदेशों में भी बेच सकें। सीधा तकनीकी प्रशिक्षण: जिले के किसानों को अब चंडीगढ़ या लुधियाना जाने की जरूरत नहीं होगी। मल्सियां सेंटर में वैज्ञानिक सीधे किसानों को सॉयल हेल्थ (मिट्टी की जांच) और कीटनाशकों के सही इस्तेमाल की जानकारी देंगे।