सांप का जहर निकालकर रिपोर्टर के हाथ में रख दिया:1 लीटर की कीमत 33 करोड़, बिहार से फ्रांस तक सप्लाई; 5 जिलों में डील

‘5 अलग-अलग मिट्‌टी के घड़ों में खतरनाक सांप थे। लाल निशान वाले घड़े में ब्राउन कोबरा था। ढक्कन हटाते ही वह फन उठाकर डेढ़ फिट खड़ा हो गया। गुस्से में तेज-तेज फुफकार मारने लगा। सांप के थकते ही तस्कर ने अचानक झपट्‌टा मारा और हाथ से फन को दबोच लिया। एक हाथ से सिरिंज निकाली और महज 15 सेकेंड में जहर खींच लिया। वापस घड़े में सांप को डालते हुए बोला – हर बूंद में मौत है। 10 बूंद के 5 हजार रुपए लगेंगे। जितना चाहिएगा, निकालकर दे देंगे। कहीं भी कटे-फटे पर लग गया तो समझिए गेम ओवर। बिहार के सांपों के जहर की डिमांड तो फ्रांस तक है।’ साइलेंट मर्डर के लिए कोबरा से जहर निकालने का यह प्रॉसेस बिहार के तस्कर कर रहे हैं। भास्कर रिपोर्टर के सामने 6 तस्करों ने जहर निकालने का यही प्रॉसेस अपनाया। मर्डर के लिए सांप का जहर बेचने वाले तस्करों के खिलाफ यह ऑपरेशन जहर था। तस्करों को एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम के अंडरकवर रिपोर्टर ने पूरी डील की है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए और देखिए बिहार के सांपों के जहर की फ्रांस तक की पूरी सप्लाई चेन..। 5 जिलों में जहर निकालते खुफिया कैमरे में कैद हुए तस्कर सांपों के जहर से साइलेंट मर्डर की पड़ताल में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने पटना, वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण से लेकर नालंदा में डील की। इस दौरान ही तस्कर सांपों का जहर निकालते हुए भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हो गए। वह डिमांड पर सांप का जहर निकालकर दे रहे थे। कई तस्करों ने तो अलग-अलग तरह के सांपों का जहर स्टोर कर रखने का दावा किया और डिमांड पर शीशी में देने को तैयार हो गए। रिपोर्टर के सामने सिरिंज से 15 सेकेंड में निकाला जहर साइलेंट मर्डर के लिए सांपों का जहर बेचने वाले तस्करों की पड़ताल में भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम पटना से लगभग 300 किलोमीटर दूर पश्चिमी चंपारण के मसहवा गांव पहुंंची। यहां डील के दौरान ही तस्कर लोहा कोबरा का जहर निकालते हुए भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हो गया। तस्कर रिपोर्टर के सामने एक ब्राउन कोबरा मिट्‌टी के घड़े से निकाला और सिरिंज घोंपकर महज 15 सेकेंड में ही दोनों थैली से जहर निकाल लिया। लोहा ने घर में कई जहरीले सांप रखे थे। उसने कुछ जहरीले सांपों को दिखाया, लेकिन हमारे सामने ब्राउन कोबरा का जहर निकाला और हाथ में रख दिया। लोहा ने जहर की कई शीशी भी दिखाई जिसे वह पहले से निकालकर रखा था। तस्कर ने दावा किया कि एक सांप 4 से 5 दिन में जहर बना देता है। सबका समय फिक्स रहता है, हर चौथे पांचवे दिन जहर निकालने का समय होता है। हमारी टीम के सामने निकाली सांप की जहर की थैली इन्वेस्टिगेशन टीम को पटना में सांपों का जहर बेचने वाले सत्येंद्र का इनपुट मिला। रिपोर्टर फतुहा के मछरियावां पहुंचा तो डील के दौरान तस्कर सत्येंद्र भी कोबरा का जहर निकालते भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हो गया। सत्येंद्र के जहर निकालने का तरीका थोड़ा अलग था। वह अपने हाथ में लोहे का नुकीला का पतला औजार लेकर आया और पत्थर पर रगड़कर उसे और धारदार बनाने लगा। इतने में राकेश सांप वाला घड़ा लेकर सत्येन्द्र के पास आ गया। पास में वीरेन्द्र भी बैठ गया। तस्करों ने रिपोर्टर से कहा – जरा भी शोर मत कीजिएगा नहीं तो कूद कर काट लेगा। तीनों तस्करों ने मिलकर सांप को घड़े से बाहर निकाला और पहले लाठी से उसका फन दबा दिया। इतने में सत्येंद्र ने सांप का फन हाथ से पकड़ लिया और नुकीले औजार से दोनों तरफ की जहर की थैली निकाल ली। जहर की दोनों थैली को एक शीशी में रखने के बाद सांप को दोबारा घड़े में डाल दिया। महज एक मिनट की प्रॉसेस में सत्येंद्र ने कोबरा का जहर निकाल लिया। दो तस्करों ने मिलकर निकाला जहर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को मोतिहारी में सांप के जहर बेचने वालों का इनपुट मिला। पटना से लगभग 200 किलोमीटर दूर रिपोर्टर जब मोतिहारी के बरियारपुर पहुंचा तो तस्कर बल्लू और मुन्ना के बारे में पता चला। डील के दौरान ही दोनों तस्कर मिलकर सांप का जहर निकालते भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हो गए। बल्लू और मुन्ना घर में कई सांप रखे थे। सबसे पिछले उन्होंने कमरे से महिलाओं और बच्चों को हटा दिया। ब्राउन कोबरा को लेकर वह घर के सबसे पिछले हिस्से में ले गए। मुन्ना ने लाठी से सांप के मुह को दबाया, तुरंत बल्लू ने सांप के मुह को पकड़ लिया और उसे लकड़ी के छोटे से तख्ते पर पलट दिया। दोनों ने मिलकर लोहे के एक तार जैसे नुकीले औजार से जहर की दोनों थैलियां निकालकर शीशी में रख दीं। मुन्ना और बल्लू ने दावा किया कि उसके पास नेपाल से भी जहर लेने के लिए लोग आते हैं। अब तक नेपाल से सैकड़ों लोग साइलेंट मर्डर के लिए सांप का जहर ले जा चुके हैं। नेपाल से सटे इलाकों और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के आसपास खतरनाक सांपों का जहर बेचने वाले तस्कर लोहा को एक्सपोज करने के लिए भासकर के अंडरकवर रिपोर्टर मसहवा गांव में पहुंचे। लोहा ने रिपोर्टर को रसेल वाइपर से लेकर कोबरा का जहर देने को तैयार हो गया। लोहा ने दावा किया कि उसने अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को जहर देकर उनका काम कराया है। लोहा का दावा उसी की जुबानी। मैं जहर को मेडिकल वाली सिरिंज से निकालता हूं। पैसा दीजिए, आपके सामने खींचकर दे दूंगा। थोड़ा-सा निकलेगा, लेकिन काम हो जाएगा। जहर निकालने में रिस्क है, हाथ से छूना नहीं होगा। कहीं भी थोड़ी सी खरोंच होगी तो हम आप में से कोई मर जाएगा। जहर जितना खींचा जाता है, उतना ही तेजी से फिर बन जाता है। सांप के अंदर नया जहर बनने में बस 4 से 5 दिन लगते हैं। मैं हल्का जहर नहीं देता कि काम ना हो। कोई भी आता है उसे ऐसा जहर देता हूं कि एक बूंद से मौत हो जाए। मेरे पास बहुत सारे जहरीले सांप हैं, जहर निकालकर शीशी में रखता हूं। आपको भी शीशी में दे दूंगा। जाकर ठोक दीजिए। ज्यादातर लोग दवा में मिलाकर लगवा देते हैं, इसमें आसानी से हो जाता है। मैं सिरिंज से खींचकर जिसको भी देता हूं, बोल देता हूं उसमें थोड़ा-सा डिस्टिल्ड वाटर मिलाकर कहीं भी शरीर में इंजेक्ट कर दीजिए, आदमी साफ हो जाएगा। यह सब चुटकी का खेल है मेरे लिए, आप ऑर्डर दीजिए। पटना के आसपास के इलाकों में सांप पकड़ने का पूरा नेटवर्क चलाने वाले सत्येंद्र के इनपुट पर जब भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम फतुहा के मछरियावां पहुंची तो उसने कई खुलासे किए। सत्येंद्र ने बताया कैसे चल रहा है सांप पकड़ने वालों का नेटवर्क और कैसे हो रही डबल कमाई। पटना से लेकर आसपास के इलाकों में हम लोगों की पूरी टीम है जो सांप पकड़ने का काम करती है। जहरीले सांपों को पकड़ना इतना आसान काम नहीं, कई बार पकड़ने वालों की भी मौत हो जाती है। इतना रिस्क है, इसलिए पैसा तो चाहिए ना भाई। जहरीले सांप को पकड़ने के लिए भी दो हजार तक लिया जाता है। सांप के जहर को इसीलिए इतना महंगा बेचा जाता है। जहर निकालते समय अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाए तो कोई बचा नहीं पाएगा। इसलिए सांपों से पकड़ने से लेकर जहर निकालने में हम लोग पैसे से कोई समझौता नहीं करते हैं, सांप से जुड़ा हर काम जान पर खेलकर करना पड़ता है। मेरे साथ ललन, सुरेंद्र, वीरेंद्र और संजय की तरह कई लोग हैं, खतरनाक सांपों को पकड़ने के लिए दो तीन लोगों के साथ जाना पड़ता है। किसी के घर में सांप निकलता है, तो उसका भी उसी हिसाब से पैसा लिया जाता है। मैं अपने बड़े भाई वीरेन्द्र और भतीजे राकेश के साथ मिलकर यही काम ही करता हूं। फतुहा के मछरियावां में सांप तस्कर सत्येंद्र के भाई वीरेंद्र ने भी कई बड़ा खुलासा किया है। पुलिस और वन विभाग से बचकर काम करने के बाद भी कई बार जेल जाना पड़ता है। इसलिए सांप के जहर का पूरा काम चोरी से किया जाता है। वीरेंद्र की जुबानी सांपों के जहर की कहानी। हम लोग चोरी से ये सब काम करते हैं। कई बार पुलिस भी ऐसे डील करने आती है। इसलिए हम लोग किसी से खुलकर बात नहीं करते हैं। जहर का पैसा भी ऑनलाइन नहीं लेते हैं। कहीं से भी ऐसी गलती नहीं करते हैं जिससे पकड़ में आएं। मेरा बेटा राकेश एक बार ऐसे फंस गया था। पुलिस वालों ने सांप बेचने के कारण पकड़ लिया। वह ऐसे ही डील कर रहा था, इस बीच किसी ने पुलिस को बता दिया। काफी समय तक जेल में रहा। इसके बाद हम लोग काफी सावधान हो गए हैं, अब परिचित कोई लेकर आता है उसी को सांप या फिर उसका जहर दिया जाता है। आप पटना के खगौल वाले ललन के माध्यम से आए हैं, इसलिए आपको जितना चाहिए जहर मिल जाएगा। सांप भी दे दिया जाएगा, लेकिन डायरेक्ट आते तो हम आपसे सांप की कोई बात ही नहीं करते। क्योंकि हम लोग सबसे अधिक कोबरा और रसेल वाइपर ही पकड़ते हैं। इसकी बहुत डिमांड है, भारत में ही नहीं विदेशों में भी इसका जहर जाता है। इसलिए पुलिस की निगाह भी हम लोगों पर रहती है। फतुहा के मछरियावां में सत्येंद्र के भतीजे राकेश ने भी कई बड़ा खुलासा किया। दावा किया कि सांप के जहर से अच्छा पूरी थैली निकालकर दे देंगे। यह हमेशा ऐसे ही रहता है, जब जरुरत है किसी को भी निकालकर लगा दीजिए, काम हो जाएगा। राकेश की जुबानी जहर के थैली की कहानी। हम लोग जहर की बूंद देने से अच्छा 15 हजार में सांप के जहर की थैली ही निकालकर दे देते हैं। लोग शीशी में रख देते हैं, वह सालों साल काम आता है। जहर की थैली छोटी सी होती है, इसमें 10 बूंद से होता है। सांप की दो जहर की थैली होती है, दोनों में इतना जहर होता है कि 10 इंसान को मौत के घाट उतारा जा सकता है। इसलिए जो भी जानकार होता है वह थैली ही ले लेता है। घर में रख देता है, जब भी जरुरत पड़ती है, इसका इस्तेमाल कर लेता है। यह मारने के लिए इतना आसान है, इसलिए ही लोग इसकी डिमांड लेकर हम लोगों के पास आते हैं। तस्करों से डील में जान का खतरा, कई लोगों पर कराए हमले साइलेंट मर्डर के लिए सांप और उसके जहर का धंधा करने वाले तस्करों से डील करना काफी रिस्की होता है। थोड़ा सा भी शक होने पर यह सांपों से हमला करा देते हैं। बिहार में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को जब सांप के जहर से साइलेंट मर्डर का इनपुट मिला तो अंडरकवर रिपोर्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रही। तस्करों के हाथ में सांप खतरनाक सांप और उसका जहर होता है। संदेह होने पर वह इसका प्रयोग कर सकते हैं। मुन्ना और बल्लू कई बार कर चुके हैं हमला मोतिहारी के बरियारपुर में सांप के जहर का धंधा करने वाले तस्कर मुन्ना और बल्लू कई बार लोगों पर सांप से हमला करा चुके हैं। इसलिए पूरे इलाके में लोग इनसे डरते हैं, कोई भी इंसान इनसे टकराता नहीं है। दोनों सांप तस्करों से डील करने के पहले भास्कर के अंडरकवर रिपोर्टर ने जब इनके बारे में पता किया तो गांव वालों ने बताया कि वह गोली बंदूक नहीं सांप के जहर से लोगों को मार देते हैं। गांव वालों ने 3 से 4 साल पहले की कहानी बताते हुए कहा कि कोई जहर खरीदने आया था, इस दौरान किसी बात को लेकर तस्करों से बहस हो गई। तस्करों ने युवक को पकड़ लिया और सांप से कटवाने की धमकी देने लगे। एक कमरे में बंद कर सांप छोड़ने की धमकी दी, लेकिन युवक पैसा ने पैसे भी दिए और माफी मांगकर इनके चंगुल से भाग पाया। रिपोर्टर के मोबाइल में वीडियो चेक किया मोतिहारी के बरियारपुर में डील के दौरान मुन्ना और बल्लू को रिपोर्टर पर शक हो गया। दोनों कोबरा का जहर निकाल रहे थे, इस दौरान उन्हें लगा कि रिपोर्टर वीडियो बना रहा है। उसने मोबाइल छीन लिए और गैलरी में वीडियो चेक करने लगे। मोबाइल में कोई वीडियो नहीं मिला, इसके बाद भी वह धमकी देने लगे। मुन्ना और बल्लू ने कहा हम लोगों से कोई उलझता नहीं है। हम लोग खतरों से खेलते हैं, खतरा साथ लेकर चलते हैं, चालाकी कीजिएगा तो खतरे में डाल देंगे। दोनों की इस धमकी से लग गया कि वह ऐसा करते हैं। अगर मोबाइल में वीडियो स्पाई वीडियो दिख जाता तो वह कुछ भी कर सकते थे। जहर तस्करी में फ्रांस तक सप्लाई चेन, बिहार बना सेंटर पॉइंट भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ कि सांप तस्करी की सप्लाई चेन बिहार से फ्रांस तक है। तस्करों ने बिहार को सेंटर पॉइंट बनाया है। बिहार-नेपाल की खुली बॉर्डर होने की वजह से यहां से आसानी से नेपाल के रास्ते जहर चीन से लेकर फ्रांस तक भेजा जाता है। पड़ताल में फ्रांस के कनेक्शन की 3 बड़ी वजह निकलकर सामने आईं। सांप के जहर की फ्रांस तक सप्लाई चेन भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में बिहार से फ्रांस तक पूरी सप्लाई चेन का पता चला। बिहार सेंटर है, बाकी के राज्यों से मदद मिल रही है। यूपी बिहार और झारखंड के लेकर नेपाल, बंगाल में जहां भी सांप का जहर पकड़ा गया वहां से बिहार का कनेक्शन जुड़ा है। बिहार में सांप के जहर की कीमत 1 करोड़ रुपए लीटर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन के दौरान बिहार में तस्करों ने सांपों के जहर की कीमत 10 बूंद 0.5 ML की कीमत 5 हजार रुपए बताई गई। ऐसे में एक लीटर जहर की कीमत एक करोड़ रुपए होगी। सांप का जहर निकालते समय लिक्विड होता है लेकिन यह सूखकर पाउडर हो जाता है। इसके बाद भी जहर कम नहीं होता है। पाउडर में भी उतना ही जहर होता है जितना लिक्विड में होता है। मीडिया रिपोर्ट्स में सांप के जहर की कीमत भारतीय और विदेशी बाजार में अलग-अलग प्रजाति के अनुसार है। कोड से सांप के जहर की तस्करी भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में फ्रांस कनेक्शन का एक कोड सामने आया जो अलग-अलग सांपों के जहर के लिए होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि वैज्ञानिक तरीके से सांप के जहर की पहचान प्रोटीओमिक्स (प्रोटीन विश्लेषण), मास स्पेक्ट्रोमेट्री (LC-MS), फ्लोरोसेंट सेंसर ऐरे या टॉक्सिन प्रोफाइल से होती है। इसके लिए कोई कोड नहीं होता है, लेकिन तस्करों ने अपने हिसाब से इसके लिए कोड बनाया है। जहर की तस्करी करने के लिए कोड का इस्तेमाल होता है। इससे तस्कर का ब्रांड की और जहर का पता चलता है। तस्करी में Red Dragon Made in France Code 6097, Cobra SP, Dragon, K-72, K-76, King, White King, 24 snack Bites का इस्तेमाल कर रहे हैं। 54 साल पुराना सांप का जहर भी ले सकता है जान भास्कर की इन्वेस्टिगेशन के दौरान तस्करों ने सांपो के जहर को शीशी में रखकर लंबे समय तक स्टोर कर इससे साइलेंट मर्डर का दावा किया। तस्करों के दावों की पड़ताल के में पता चला कि यह पूरी तरह से सही है। ऐसे दावे कई रिसर्च में भी सामने आए हैं। सांप के जहर को निकालकर कई दशकों तक स्टोर किया जा सकता है। इसका जहर कभी कम नहीं होगा। जहर दशकों बाद भी उतना ही जहरीला होता है। ब्राजील के बुटांटन इंस्टीट्यूट में हुए एक शोध में पाया गया कि 54 साल बाद भी सांप का जहर उतना ही जहरीला मिला, जितना स्टोर करने के दौरान था। सिर्फ एंजाइम में कुछ कमी की बात सामने आई। जहर के धंधे में बिहारी तस्करों के पीछे बड़ा नेटवर्क भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सांप के जहर के धंधे में यह बात सामने आई कि बिहार के तस्करों के पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। वह लोकल तस्करों से जहर लेकर विदेशों में भेज रहे हैं। अब तक जितनी भी छापेमारी हुई है, जितने लोग भी पकड़े गए है। वह बड़े नेटवर्क के कनेक्शन का खुलासा करते हैं। बिहार में घना जंगल है, जहां सांप मिलते हैं, गांव और शहरों में भी काफी जहरीले सांप मिलते हैं। सपेरा और कुछ स्नैक कैचर आसानी से इन सांपों को पकड़ लेते हैं और इनका जहर निकाल लेते हैं। इसके बाद जहर बड़े नेटवर्क तक पहुंचता है जो बिहार-नेपाल के सीमावर्ती जिलों से होते हुए इसकी तस्करी का पूरा नेटवर्क चलाते हैं। बिहार में बेबी कोबरा का नशा कई जिलों में बेबी कोबरा के नशे का भी मामला सामने आया है। पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में 5 मामले आए हैं। इसमें युवक बेबी कोबरा के नशे के एडिक्ट थे। एक्सपर्ट बताते हैं, बिहार के पूर्णिया में ऐसे सांप की संख्या अधिक है जिससे युवक नशा का सहारा लेते हैं। इनका जहर बड़े सांपों से हल्का होता है, इससे मौत नहीं होती है लेकिन इंसान बेहोशी की हालत में चला जाता है। यह काफी खतरनाक नशा होता है क्योंकि इसके बाद कोई नशा बचता ही नहीं है। वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत होगी कार्रवाई

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