पानीपत कोर्ट में एयरटेल की सुस्त रफ्तार से वकील परेशान:प्रधान की स्थायी लोक-अदालत में याचिका दायर, चेयरमैन सुनील भारती को बनाया पार्टी

पानीपत जिला न्यायालय परिसर में लंबे समय से चली आ रही खराब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की समस्या अब कानूनी गलियारों तक पहुंच गई है। कोर्ट परिसर, वकीलों के चैंबर और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में एयरटेल की लचर सेवाओं से तंग आकर जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट सुरेंद्र कुमार दूहन ने ‘स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं)’ में एक याचिका दायर की है। कामकाज पर पड़ रहा असर याचिकाकर्ता प्रधान सुरेंद्र कुमार दूहन ने बताया कि कोर्ट परिसर में एयरटेल का नेटवर्क अत्यंत खराब रहता है। वकीलों के चैंबर, दोनों कोर्ट इमारतों और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में सिग्नल न होने के कारण कानूनी कामकाज और शोध कार्य में भारी बाधा आ रही है। डिजिटल इंडिया के दौर में जब अधिकांश कानूनी प्रक्रियाएं और केस फाइलिंग ऑनलाइन हो रही है, ऐसे में खराब नेटवर्क पेशेवर सेवाओं में बड़ी रुकावट पैदा कर रहा है। कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को बनाया प्रतिवादी याचिका में भारती एयरटेल लिमिटेड के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, एमडी एवं सीईओ शाश्वत शर्मा और स्थानीय ब्रांच मैनेजर को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने और सोशल मीडिया (X – पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से सूचित करने के बावजूद कंपनी ने नेटवर्क सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। न्यायिक हस्तक्षेप की मांग अधिवक्ता दूहन ने ‘कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987’ की धारा 22-सी के तहत यह आवेदन दायर किया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि… एयरटेल कंपनी को कोर्ट परिसर में नेटवर्क की स्थिति सुधारने और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे बूस्टर या टावर) लगाने के निर्देश दिए जाए। जब तक नेटवर्क की समस्या हल नहीं होती, तब तक कंपनी को संबंधित क्षेत्र के उपभोक्ताओं से बिल वसूलने से रोका जाए। खराब सेवा के कारण हुई मानसिक परेशानी और कामकाज के नुकसान के लिए उचित मुआवजे का आदेश दिया जाए। ****** ये खबर भी पढ़ें… पानीपत जिला कोर्ट में ‘जियो’ का नेटवर्क फेल:लोक अदालत की मैनेजमेंट से जवाबतलबी; वकील बोले- कॉल करने-सुनने को चैंबर से बाहर जाना पड़ता पानीपत जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क में आ रही दिक्कतों से परेशान वकीलों ने खुद कोर्ट में केस दायर कर दिया। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ लोक अदालत में दायर याचिका में कंपनी की मैनेजमेंट को भी पार्टी बनाया है। याचिका में वकीलों ने कहा कि उनके चैंबरों में रेंज नहीं आती। मुवक्किल से बात करने के लिए खुले मैदान में जाना पड़ता है। (पूरी खबर पढ़ें…)

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