संविधान की शपथ लेकर शादी करने वाले दंपती की कहानी:अफसर दूल्हा-दुल्हन बोले- पुरानी परंपरा ढो रहा समाज, पंडित क्या मंत्र पढ़ते हैं, हमें पता नहीं होता

‘शादी की वैदिक पद्धति, परंपरा को समाज के ज्यादातर लोग सिर्फ ढो रहे हैं । अगर पैसे खर्च नहीं करेंगे तो समाज के लोग क्या कहेंगे। मैं और मेरी पत्नी बीपीएससी से चयनित हुए हैं, हम दोनों ने संविधान को पढ़ा है, इतिहास और परंपराओं को पढ़ा है। हम दोनों को पता है कि जो परंपरा पुराने समय से चली आ रही है, उसने समाज के बड़े वर्ग को जकड़ कर रखा है। शादी में पंडित क्या मंत्र पढ़ते हैं, हमें पता ही नहीं चलता।’ ये कहना है संविधान को साक्षी मानकर शादी करने वाले अफसर दंपती का, जिन्होंने पटना के एक मैरिज हॉल में बिना फेरे, पंडित और शहनाई के शादी की। संविधान की शपथ लेकर शादी करने वाले नवविवाहित जोड़ा कौन है? जोड़े ने वैदिक पद्धति छोड़कर अर्चक पद्धति से ब्याह क्यों रचाया? दूल्हा और दुल्हन ने शादी के बाद क्या मैसेज दिया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले नवविवाहित जोड़े की 3 तस्वीरें देखिए 8 अब जानिए, वैदिक पद्धति छोड़ संविधान की शपथ लेने वाला नवविवाहित जोड़े कौन है? वैदिक मंत्रोंच्चारण की जगह संविधान को साक्षी मानकर शादी करने वाले जोड़े की पहचान 30 साल के अनंत कुमार और 29 साल की शिखा रंजन के रूप में हुई है। अनंत और शिखा दोनों 67वीं बीपीएससी बैच के पदाधिकारी हैं। दोनों की ये अरेंज मैरिज है। हालांकि, अनंत और शिखा एक ही बैच के हैं, इसलिए दोनों पहले से एक दूसरे को जानते थे। अनंत कुमार अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी (SDM स्तर के अधिकारी), जबकि शिखा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) हैं। अनंत दरभंगा के बहेड़ी प्रखंड के बिहरौना गांव और शिखा नालंदा की रहने वाली हैं। अनंत की मां गीता देवी राजद की नेता हैं और जिला परिषद की सदस्य रह चुकी हैं। 2017 में अनंत ने IIT रुड़की से इंजीनियरिंग भी की है अनंत ने साल 2017 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की से इंजीनियरिंग की है। कैंपस सिलेक्शन के जरिए उन्हें एक प्राइवेट कंपनी में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए के पैकेज पर नौकरी मिली थी। बाद में उन्होंने पीएमओ में भी काम किया। कोरोना के दौरान अनंत ने जॉब छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। दो बार इंटरव्यू लेवल तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा में 2024 में प्रथम प्रयास में सफलता प्राप्त की और अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी बने। अनंत की मां बोली- संविधान को साक्षी मानकर शादी का फैसला पहले से तय था अनंत की मां गीता देवी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि संविधान को साक्षी मानकर शादी करने का फैसला पहले से निर्धारित था। हमारा संकल्प था कि हम संविधान को साक्षी मानकर शादी करेंगे। लड़की पक्ष भी इसके लिए तैयार हो गया, इसलिए उसी अनुरूप विवाह संपन्न हुआ। गीता देवी ने बताया कि पहले वह बामसेफ और ऑल इंडिया बैकवर्ड संगठन से जुड़ी रहीं। पटना में रहने के दौरान बौद्ध विचारधारा से जुड़े लोगों के संपर्क में आईं और धीरे-धीरे उसी विचारधारा को मानने लगीं। अब जानिए, संविधान को साक्षी मानकर शादी करने के बारे में नवविवाहित जोड़े ने क्या कहा? अनंत ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि हमें जो भी अधिकार मिले हैं, वो बाबा साहेब की वजह से मिले हैं। जब भी उन्हें याद करता हूं, मेरी आंखें नम हो जाती है, क्योंकि जितनी प्रताड़ना उन्होंने सहन की, इसके बावजूद उन्होंने ऐसा संविधान बनाया जो किसी से भी किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने कहा कि भेदभाव उस समाज से भी नहीं, जिसने हजारों साल तक दूसरों का प्रताड़ित किया। ऐसे वर्ग के साथ भी अगर आज कुछ गलत होता है, तो उन्हें भी बाबा साहेब के संविधान के शरण में आना पड़ता है। अनंत ने कहा कि पुरानी पद्धति या परंपरा को न निभाते हुए हम दोनों ने अर्जक पद्धति से शादी की है। पुरानी परंपरा में काफी ज्यादा पैसे खर्च हो जाते हैं। पुरानी परंपरा को समाज के ज्यादातर लोग सिर्फ ढो रहे हैं। हम दोनों ने इस तरह के समाज के एक बड़े वर्ग को संदेश देने के लिए अर्जक पद्धति से शादी की है, जिसमें मामूली फीस लगती है और कम समय में शादी भी हो जाती है। अनंत बोले- सिर्फ दलित ही नहीं, सभी लोग अर्जक पद्धति से शादी करें अनंत ने कहा कि हम दोनों ने जिस पद्धति से शादी की है, उस पद्धति से सिर्फ दलित या फिर कुछ विशेष समाज के लोग ही शादी करते हैं। हम संदेश देना चाहते हैं कि इस पद्धति से सभी को शादी करनी चाहिए। हम जिस समाज से आते हैं, उनकी संख्या बिहार में काफी ज्यादा है, इसलिए अपने समाज को भी हम दोनों ने अर्जक पद्धति से शादी करने का संदेश दिया है। अर्जक पद्धति से शादी करने के संबंध में लड़की वाले कैसे तैयार हुए? अनंत से पूछा गया कि हर लड़की का सपना होता है। धूमधाम से उसकी शादी हो, सात फेरे लें, लेकिन आपने होने वाली अपनी पत्नी को अर्जक पद्धति से शादी के बारे में बताया तो उनका क्या रिएक्शन था? जवाब में अनंत ने कहा कि मैं सबसे पहले अपने ससुर और अपनी होने वाली पत्नी को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे समझा। मैं और मेरी पत्नी बीपीएससी से चयनीत हुए हैं, हम दोनों ने संविधान को पढ़ा है, इतिहास और परंपराओं को पढ़ा है। हम दोनों को पता है कि जो परंपरा पुराने समय से चली आ रही है, उसने समाज के बड़े वर्ग को जकड़ कर रखा है। अगर बाबा साहेब नहीं होते तो आज हम लोग नहीं होते। पहले की जो व्यवस्था थी, उसमें शूद्र और दलितों को तो वर्ण व्यवस्था का हिस्सा भी नहीं समझा जाता था, ऐसे लोगों को पूजा का भी अधिकार नहीं था, वोट देने का अधिकार भी नहीं था। लेकिन अब आपको कहा जाता है कि आप पूजा कीजिए, क्योंकि शूद्र और दलित वोट बैंक का हिस्सा हैं। शिखा बोलीं- पंडितजी शादी में वचनों को सिर्फ अपने लिए पढ़ते हैं दुल्हन बनी शिखा ने कहा कि मैं शादी के वचनों को पढ़ रही थी, तब मुझे लगा कि मैं इसे मन से एक्सेप्ट करके बोल रही हूं। पंडितजी शादी में ये पढ़ाते हैं तो ऐसा लगता है कि वे अपने लिए ये सब करते हैं, शादी कराते हैं, फिर चले जाते हैं। वे हमें समझ नहीं आता है, लेकिन शादी से ठीक पहले मैंने वचन पढ़े, हम दोनों ने संवैधानिक रूप से एक दूसरे को स्वीकार किया। हम दोनों ओबीसी समाज से आते हैं। हमने पढ़ा है कि हमें पहले किस तरीके से प्रताड़ित किया जाता था। हमें जमीन पर भी बैठने का अधिकार नहीं दिया जाता था, सार्वजनिक कुएं से पानी पीने का भी अधिकार नहीं था, लेकिन बाबा साहेब ने ये अधिकार हमें संविधान के जरिए दिलाया। आज अगर मैं और मेरे पति पदाधिकारी बने हैं, इस जगह पर पहुंचे हैं तो इसकी वजह बाबा साहेब का संविधान है। शिखा का लड़कियों को मैसेज- आपके लिए क्या जरूरी, ये सिर्फ आपको पता शिखा ने कहा कि मैं अपनी उम्र की लड़कियों को संदेश देना चाहती हूं कि आप लोग भी इस पद्धति से शादी करें। पढ़ाई पर फोकस करें, क्योंकि पढ़ाई से आप समझ पाएंगी कि आपके लिए क्या जरूरी है, आपका क्या अधिकार है। ये आपको कोई दूसरा नहीं बताएगा। वहीं, अनंत की मां गीता देवी ने कहा कि जब देश संविधान से संचालित होता है, जनप्रतिनिधि और अधिकारी संविधान की शपथ लेते हैं, तो विवाह जैसे महत्वपूर्ण बंधन में संविधान को साक्षी क्यों न बनाया जाए? अनंत की मां बोली- मैं हिंदू धर्म में ही हूं, इसे त्यागा नहीं है गीता देवी ने स्पष्ट कहा कि हम हिंदू धर्म को त्यागा नहीं है, लेकिन हम संविधान को सर्वोपरि मानते हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर को मानते हैं और बौद्ध विचारधारा से प्रभावित हूं। पंचशील के सिद्धांतों- “मानव-मानव एक समान है, खून सबका लाल है। मैं जाति-धर्म में विश्वास नहीं करती।” ‘घर में कोई पूजा-पाठ नहीं होती, किसी देवी-देवता की तस्वीर नहीं है’ गीता देवी ने कहा कि अर्जक विधि को 10 साल से अधिक समय से हम लोग मानते हैं। घर में कोई पूजा पाठ नहीं होती है, घर में किसी देवी-देवता की तस्वीर नहीं है, सिर्फ भगवान बुद्ध को छोड़कर। बहू भी घर आएगी तो भगवान बुद्ध की तस्वीर को ही प्रणाम कर अपने नए जीवन की शुरुआत करेगी। विवाह तय होने के समय लड़की पक्ष ने दहेज के बारे में पूछा तो मैंने सीधे इनकार कर दिया। दहेज लेना और देना दोनों पाप है। हमारी शर्त थी संविधान को साक्षी मानकर शादी के लिए आप लोग तैयार हैं तो बात आगे बढ़ाऊंगी। मेरी शर्त को शिखा के पिता ने मान लिया और फिर ये शादी हुई।

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