बिहार में 8 चीनी मिल हमेशा के लिए बंद:PM मोदी ने जिस मिल की चीनी से चाय पीने का वादा किया, वो कभी नहीं खुलेगी

PM का वादा- ‘अगली बार जब मैं आऊंगा, तो मोतिहारी की चीनी मिल की चीनी से बनी चाय पिऊंगा।’ हकीकत- मोतिहारी का चकिया और हनुमान शुगर मिल अब कभी चालू नहीं होगी। कारण- चीनी मिल की 60 फीसदी से ज्यादा जमीनें बिक गई हैं। यहां की मशीनें बर्बाद हो चुकी हैं। ये पूरा इलाका घनी आबादी से घिर चुका है। ऐसे में अब इस चीनी मिल का चालू हो पाना संभव नहीं दिख रहा है। केवल एक मोतिहारी की चीनी मिल नहीं बंद पड़ी है, बल्कि 8 से ज्यादा चीनी मिलें अब दोबारा चालू नहीं हो पाएंगी। इनमें हथुआ, वारिसलीगंज, गुरारु, गोरौल, सीवान, न्यू सावन, लोहट और बनमनखी चीनी मिलें शामिल हैं। इन मिलों के चालू नहीं होने की संभावना को देखते हुए सरकार की तरफ से इनकी 2442.41 एकड़ जमीन प्रायोरिटी सेक्टर इंडस्ट्री की शुरुआत के लिए BIADA को ट्रांसफर कर दिया गया है। उद्योग की बात करने वाली सरकार कितनी चीनी मिलें खोलने की तैयारी कर रही है..क्या बिहार में एक बार फिर से पहले की तरह चीनी मिल शुरू हो पाएंगी.. क्या ये संभव है जानेंगे इस स्पेशल रिपोर्ट में…। सबसे पहले जानिए, क्या मोतिहारी में अब चीनी मिल नहीं खुलेगी ऐसा नहीं है। मोतिहारी की दो पुरानी चीनी मिलें अब भले हमेशा के लिए बंद हो गई हैं, लेकिन मोतिहारी जिले में अब नई चीनी मिल खोलने की तैयारी है। गन्ना उद्योग विभाग से मोतिहारी जिला प्रशासन से चीनी मिल खोलने के लिए जमीन चिन्हित करने के लिए कहा गया था। मोतिहारी जिला प्रशासन की सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन की तरफ से मोतिहारी में चार जगह का प्रस्ताव भेजा गया है। चकिया, मोतिहारी सदर प्रखंड क्षेत्र, घोड़ासहन इलाके की जमीन का प्रस्ताव चीनी मिल के लिए भेजा गया है। अब राज्य स्तर के अधिकारी इस पर अंतिम निर्णण लेंगे। चीनी मिल चालू करने के लिए बनाई गई हाई लेवल कमेटी राज्य में बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा चालू करने लिए और नई चीनी मिल खोलने के लिए सरकार की तरफ से एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। इसकी अगुआई खुद चीफ सेकरेटरी प्रत्यय अमृत कर रहे हैं। इनके साथ सुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीच्यूट, कोयंबटूर के वैज्ञानिक डॉ. बक्शी राम, वर्धन सीबीजी के मैनिजिंग डायरेक्टर अमित कुमार सिंह और इंडियन सुगर मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मांडव प्रभाकर राव को शामिल किया गया है। इनके गाइडेंस में ही में चीनी मिल की नई इंडस्ट्री तैयार करने की कोशिश की जा रही है। अब जानिए कौन सी मिल चालू हो रही हैं…सकरी और रैयाम की प्रक्रिया शुरू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की इस पहल के तहत पहला रिजल्ट सकरी और रैयाम चीनी मिल के रूप में मिल सकता है। बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को चालू कराने को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। मधुबनी जिले के सकरी और दरभंगा जिले के रैयाम चीनी मिल का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों विभागों के बीच MOU हो गया है। दो सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की जा रही- सहकारिता मंत्री सहकारिता मंत्री के मुताबिक इन दोनों चीनी मिलों के लिए दो सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की जा रही है। सहकारी चीनी मिल क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों की सहकारी समिति बनेगी जिसके माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर स्थायी बाजार उपलब्ध होगा। इससे गन्ना उत्पादकों को गन्ने का उचित मूल्य प्राप्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई पूंजी का संचार होगा। सकरी चीनी मिल को मधुबनी जिले के 686 गांव और दरभंगा जिले के 697 गांवों के किसानों से गन्ना की आपूर्ति की जाएगी। इसी प्रकार रैयाम चीनी मिल को मधुबनी जिले के 438 गांव और दरभंगा जिले के 580 गांवों के किसान गन्ना बेचेंगे। सासामुसा चीनी मिल भी चालू होगी गोपालगंज जिले में स्थित सासामुसा चीनी मिल को भी चालू कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए लगातार अलग-अलग लेवल पर तैयारियां की जा रही हैं। इस मिल के लिए निरानी सुगर्स लिमिटेड, कर्नाटक के प्रबंध निदेशक श्री विशाल निरानी ने दिलचस्पी जताई है। चीनी मिलों को चालू करने के लिए सरकार की क्या तैयारी है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि राज्य के 25 जिलों में नई चीनी मिलें खुलेंगी। इसके लिए सभी 25 DM को 101 एकड़ जमीन चिन्हित करने के आदेश दिए गए हैं। सरकार खुद मिलें चलाने के बजाय निजी कंपनियों को जमीन और सब्सिडी देने की तैयारी कर रही है। गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से गन्ना उद्योग नीति-2026 तैयार की गई है। 20 साल से बंद चीनी मिलों को चालू करने की कोशिश हो रही

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