अरावली की पहाड़ियों में बने प्राचीन मंदिर को नोटिस:फरीदाबाद वन विभाग ने अवैध निर्माण हटाने को कहा; महंत बोले- मैं आत्महत्या कर लूंगा

फरीदाबाद में अरावली की पहाड़ियों में बने परसोन मंदिर को वन विभाग की तरफ से नोटिस जारी किया गया है। वन विभाग ने मंदिर परिसर में किए गए अवैध निर्माण को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया है। विभाग की तरफ से मंदिर परिसर में 2 नोटिस चिपकाए गए हैं। मंदिर के महंत पराशरण ने कहा कि यह मंदिर बहुत प्राचीन है। हमने मंदिर में सिर्फ़ रेनोवेशन का काम कराया था। मैं आत्महत्या कर लूंगा, लेकिन यहां किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं होने दूंगा। बताया जाता है कि अनखीर गांव के पास पहाड़ियों में बना परसोन मंदिर हजारों साल पुराना है। यहां पराशर ऋषि ने हजार साल तपस्या कर इस जगह को सिद्ध बनाया था। यह भी कहा जाता है कि ऋषि पराशर ने यहां बाण चलाकर अमृत कुंड, हथिया कुंड और ब्रह्मकुंड नामक तीन सरोवर बनाए गए थे। नोटिस में लिखा- यहां निर्माण गैरकानूनी 26 फरवरी को वन विभाग की तरफ से जारी किए गए नोटिस में लिखा है कि अनखीर गांव में परसोन मंदिर में अवैध संरचना बनाई गई है, जो अरावली में पीएलपीए एक्ट का उल्लंघन करती है। अरावली केवल पौधे लगाने के लिए है, इसलिए किसी भी प्रकार का निर्माण यहां पर गैर-कानूनी है। इसलिए परिसर में बनाए गए ढांचों को हटाने के लिए 15 दिन का समय मंदिर में बने अवैध ढांचे को हटाने के लिए दिया जाता है। भक्त बोले- 5 गांवों की मान्यता मंदिर में आने वाले भक्त सुंदर ने बताया कि बचपन से ही यहां पर आते रहे हैं। यहां पर जिन मंदिरों पर नोटिस लगे हैं, वे बहुत पुराने हैं। इस मंदिर पर पांच गांवों की मान्यता है। मंदिर महाभारत काल से है। यहां सब पहले से बना हुआ है। जानवरों से सुरक्षा को लेकर बस उन्होंने कुछ दीवारों को खड़ा किया है, बाकी सब पुराना है। महंत बोले- यह आस्था का प्रतीक महंत पराशरण ने कहा कि उन्होंने इस मंदिर की केवल छत को रिपेयर कराया और बाथरूम बनवाए। बाकी पूरा मंदिर प्राचीन है। वे 25 साल पहले यहां पर आए थे और आज भी मंदिर के उसी ढांचे में रह रहे हैं। वे आत्महत्या कर लेंगे, लेकिन यहां पर कोई तोड़फोड़ नहीं होने देंगे। यह स्थान उनकी आस्था का प्रतीक है। DFO ने कहा- प्राचीन ढांचा सुरक्षित रखेंगे डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) झलकार ने बताया कि मंदिर को अभी केवल नोटिस जारी किया गया है। अभी जांच में देखा जाएगा कि कौन सा ढांचा सबसे प्राचीन है। प्राचीन ढांचे को सुरक्षित रखा जाएगा। जो नया ढांचा सामने आएगा, उन पर कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही मौके का दौरा कर सभी पहलुओं की जांच करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पीएलपीए के तहत वन क्षेत्र में गैर-वानिकी कार्य नहीं किए जा सकते। इसके तहत ही नोटिस दिया गया है। मंदिर प्रबंधन से संबंधित कागजात भी मांगे गए हैं। पहाड़ियों के बीच बने परसोन मंदिर का इतिहास जानिए…. तलहटी में बना है मंदिर अरावली पहाड़ों की गोद में बना यह परसोन मंदिर कई हजार साल पुराना है। यह मंदिर ऋषि पराशर की तपोभूमि के रूप में विख्यात है। उनके नाम पर ही मंदिर का नाम परसोन पड़ा है। यह मंदिर तीन तरफ से पहाड़ी से घिरा है और करीब 250 फुट नीचे तलहटी में स्थित है। महर्षि वेद व्यास का जन्म स्थल मंदिर के महंत रामगिरी बताते हैं कि ऋषि पराशर ने अपने बल और तप से इस भूमि को शक्तियों से भर दिया था और ऐसी मान्यता है कि महर्षि वेद व्यास का जन्म इसी स्थल पर हुआ था। महर्षि पराशर के पुत्र महर्षि वेद व्यास ने 18 महापुराणों और महान ग्रंथ महाभारत की रचना की थी। अज्ञातवास में पांडवों ने किया था निवास महंत बताते हैं कि पुराने ग्रंथों में इस जगह को मंगला वनी कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि द्वापर युग में जब पांडव रह रहे थे, तब माता कुंती के साथ उन्होंने भी यहां तपस्या की थी। पांडवों ने अपने एक साल के अज्ञातवास का काफी समय इसी मंदिर के आस-पास बिताया था। कुदरती पानी से भरे रहते हैं कुंड महंत ने बताया कि यहां पर ऋषि पराशर ने बाण चलाकर अमृत कुंड, हथिया कुंड और ब्रह्मकुंड नामक तीन सरोवर बनाए थे, वैसे तो अरावली पर्वत श्रृंखला में पानी की काफी किल्लत रहती है, लेकिन ऋषि द्वारा बनाए गए ये 3 कुंड आज भी ऐसे हैं जो 12 महीने कुदरती पानी से भरे रहते हैं।

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