साल 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट में चंडीगढ़ पुलिस के खर्च, खरीद, राजस्व वसूली और आधुनिकीकरण योजनाओं से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में अलग-अलग ऑब्जर्वेशन (OBS) के तहत यह बताया गया है कि कई जगह नियमों का ठीक से पालन नहीं हुआ, कई काम अधूरे पड़े हैं और करोड़ों रुपये या तो गलत तरीके से खर्च हुए या उपयोग ही नहीं किए गए। ऑडिट में सामने आया है कि कई जरूरी प्रोजेक्ट पैसा होने के बाद भी शुरू नहीं किए गए तो सामानों के की खरीद के बाद भी उनका उपयोग नहीं हुआ। एक तरफ तो कई भुगतानों में लेट लतीफी के कारण लाखों रुपए पेनल्टी देनी पड़ी तो दरें न बढ़ाने के चलते संस्थाओं में लगाई गई सेक्योरिटी की वसूली में नुकसान हुआ। इसके अलावा कई खरीददारी और टेंडर में अनियमितता भी मिली है। आइए पहले जानते हैं, खरीददारी और टेंडर में कहां मिली गड़बड़ी 38.43 लाख की गाड़िया खरीदी, पर नियमों का पालन नहीं घोड़े केवल 25 बचे लेकिन चारा और दवा का टेंडर 50 घोड़े के यहां देखिए लापरवाही के चलते कैसे नुकसान अपग्रेडेशन के लिए बजट था, आधे खर्च नहीं हुए, लाखों के सामान रखे रखे कबाड़ 3.24 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण राशि खर्च ही नहीं हुई चंडीगढ़ पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए वर्ष 2024-25 में डैशबोर्ड कैमरा, फॉरेंसिक किट और हेल्पलाइन प्रणाली को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए कुल 3.24 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इन योजनाओं का उद्देश्य पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना, जांच प्रक्रिया को तेज करना और जनता को बेहतर सेवा देना था। ये काम होने थे करोड़ से ज्यादा का आईटी सामान बेकार पड़ा
आई जानते हैं विभिन्न प्रोजेक्ट के खर्च और उनके हाल 20 करोड़ की परियोजना में देरी चंडीगढ़ पुलिस के संचार तंत्र को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम (TETRA/DMR) लागू करने की योजना तैयार की गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य पारंपरिक वायरलेस सिस्टम की जगह अत्याधुनिक डिजिटल नेटवर्क स्थापित करना था, जिससे पुलिस कर्मियों के बीच बातचीत अधिक सुरक्षित, स्पष्ट और रिकॉर्ड योग्य हो सके। इस योजना के लिए कुल 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया। गृह मंत्रालय ने परियोजना की महत्ता को देखते हुए 2.94 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी। यह राशि प्रारंभिक प्रक्रिया जैसे तकनीकी सर्वे, उपकरण खरीद, नेटवर्क डिजाइन और अन्य जरूरी तैयारियों के लिए थी। राशि जारी के बावजूद टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की: डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम की योजना कागजों में ही अटकी रह गई। उपकरणों की खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। नेटवर्क स्थापना और परीक्षण का काम आगे नहीं बढ़ पाया। तय समय-सीमा का पालन नहीं हुआ। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि तकनीकी शर्तों और निविदा दस्तावेजों को अंतिम रूप देने में देरी हुई। कई मामलों में प्रशासनिक मंजूरी और फाइलों की प्रक्रिया लंबित रही। इन कारणों से परियोजना जमीन पर शुरू ही नहीं हो सकी। यह सिस्टम लागू होने से पुलिस को सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड बातचीत की सुविधा मिलती। आपात स्थिति में तेज और स्पष्ट संचार संभव होता। कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग की सुविधा मिलती, जिससे निगरानी और जांच मजबूत होती। कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क और बेहतर समन्वय स्थापित होता। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण ये सभी सुविधाएं अभी तक लागू नहीं हो पाई हैं। पुलिस बल दरें न बढ़ने से 300 प्रतिशत का राजस्व का नुकसान चंडीगढ़ पुलिस निजी संस्थानों, बैंकों, कंपनियों, बड़े आयोजनों, धार्मिक कार्यक्रमों और वीआईपी कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराती है। इसके बदले संबंधित संस्था या आयोजक से निर्धारित शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क पुलिस कर्मियों के वेतन, भत्तों, तैनाती अवधि और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि अतिरिक्त पुलिस बल की दरें वर्ष 2010 के बाद से संशोधित नहीं की गईं। इस दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार पुलिस कर्मियों के वेतन और भत्तों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा वेतन संरचना को देखते हुए इन दरों में 200 से 230 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती थी। इसके बावजूद वर्ष 2024-25 में लगभग 80 लाख रुपये की वसूली पुराने दरों पर ही की गई। यानी जो शुल्क लिया गया, वह वर्तमान खर्च के मुकाबले काफी कम था। ऑडिट ने माना कि यदि दरें समय-समय पर संशोधित की जातीं तो विभाग को अधिक राजस्व मिल सकता था और वित्तीय बोझ कम होता। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दरों की नियमित समीक्षा और संशोधन के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखाई दी। ऑडिट ने सिफारिश की है कि मौजूदा वेतन और खर्च को ध्यान में रखते हुए दरों को जल्द अपडेट किया जाए, ताकि सरकारी राजस्व का नुकसान न हो और पुलिस बल पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव न पड़े।