पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र संगठन NSUI ने एक बड़ी जीत हासिल की है। 42 साल बाद NSUI के शांतनु शेखर अध्यक्ष बने हैं। शांतनु ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी मां ने खुद ढोल बजाकर उनका स्वागत किया था। इस जीत का श्रेय वह अपने साथियों और उनपर विश्वास करने वाले वोटर को देते हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में उनके कंपटीशन में कोई भी नहीं था। सब CHAT GPT से बनाकर अपना भाषण लाए थे, जबकि मुझे यूनिवर्सिटी की सारी समस्याओं के बारे में पता था। शांतनु अपना आइडल सांसद पप्पू यादव को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं नेता पप्पू यादव की तरह बनकर यूनिवर्सिटी की समस्याओं का समाधान करना चाहता हूं। चुनाव जीतने के बाद शांतनु शेखर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की… सवाल: छात्र संघ के अध्यक्ष बनाकर कैसा लग रहा है? कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता भी बधाई दे रहे हैं। जवाब: मुझे अध्यक्ष बनने पर बहुत खुशी हो रही है। मगर यह जीत संघर्ष की जीत है। यह पटना यूनिवर्सिटी की जीत है। मेरे सभी साथियों की मेहनत की जीत है। सवाल:किस तरह से आपने इस चुनाव के लिए मेहनत की थी, क्योंकि अलग-अलग संगठन के उम्मीदवार भी आपके साथ कंपटीशन में थे? जवाब: नहीं, मेरे साथ कोई भी कंपटीशन में नहीं था। मैं करीब 6 साल से पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा हूं और तमाम छात्र हितों की लड़ाई मैं मजबूती से लड़ते आया हूं। महिला कॉलेज से लेकर हर कॉलेज के मुद्दों पर मैंने लड़ाई लड़ी है। कोई भी मेरे साथ कंपटीशन में नहीं था क्योंकि वे लोग छात्र नेता बनने आए थे, और मैं पहले से ही छात्र नेता था। मैं पहले से ही छात्रों के लिए काम करते आया हूं। छात्र संघ चुनाव के दौरान प्रेसिडेंशियल डिबेट में अलग-अलग छात्र संगठन के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार CHATGPT से अपने भाषण को बनाकर लाए और उसे बस पढ़ दिए। उन लोगों को तो यूनिवर्सिटी के परेशानियों के बारे में पता ही नहीं है, तो आखिर वो उसका क्या ही सॉल्यूशन करेंगे। मगर मैं उनकी समस्या को समझता हूं और उसे सुलझाया भी था। इसलिए यूनिवर्सिटी के छात्र मुझे समझते हैं। उन्हें मुझपर भरोसा था, इसलिए उनका मुझे जनमत मिला है। सवाल: अध्यक्ष बनने के बाद आप किस तरह से यूनिवर्सिटी की समस्याओं को खत्म करने के लिए काम करेंगे? जवाब: पटना यूनिवर्सिटी के अंदर करीब 12 कॉलेज आते हैं और सभी की अलग-अलग मूलभूत समस्याएं हैं। मगध महिला कॉलेज में जल्द ही डिस्पेंसरी खुलवाऊंगा। गंगा किनारे आने वाले कॉलेज जैसे वाणिज्य महाविद्यालय, पटना कॉलेज और दरभंगा हाउस में नेटवर्क का बहुत बड़ा इशू है। इसे ठीक करवाऊंगा। पटना कॉलेज कैंपस में आए दिन बम गोली चलते रहती है। इन सभी चीजों को रोकने की मैं कोशिश करूंगा, ताकि कैंपस सुरक्षित दिखे और छात्र-छात्राएं आराम से पढ़ाई करें। स्टूडेंट के मन में यह कॉन्फिडेंस आना चाहिए कि मैं जिससे पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा हूं, वह एक सेफ कैंपस है और मैं अच्छा कर सकता हूं, तभी वह कॉलेज आएंगे और विश्वविद्यालय की गरिमा बढ़ेगी। सवाल: आपके चुनाव प्रचार में पप्पू यादव भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिए थे, तो क्या आपको लगता है कि आपकी जीत में उनकी भी एक बड़ी भूमिका रही है? जवाब: जी बिल्कुल, वह हमारे नेता हैं। उनके मेहनत, लगन, प्यार, सोच को लेकर मैं आगे बढ़ रहा था। पप्पू यादव 24 घंटे लोगों के लिए उपस्थित रहते हैं। मैं उसी तरह यूनिवर्सिटी की समस्याओं का समाधान करना चाहता हूं। जब भी किसी को जरूरत हो शांतनु शेखर उनके दरवाजे पर मिलेगा। सवाल: क्या आप पप्पू यादव को अपना आइडल मानते हैं? जवाब: जी बिल्कुल, मैं कई वर्षों से पप्पू यादव के साथ काम करते आ रहा हूं। इसलिए मैं उन्हें अपना आइडल मानता हूं। ऐसे लोग आइडल होने भी चाहिए जो अपने जीवन को दूसरों की मदद करने में लगा देते हैं। मैं पप्पू यादव के पद चिन्हों पर चलना चाहता हूं। सवाल: कॉलेज में पढ़ाई के दौरान आपको कब लगा कि मुझे छात्र राजनीति में आना चाहिए? जवाब: मैं बहुत क्वेश्चनिंग नेचर का हूं। मेरे मन में काफी सवाल चलते हैं। जब मैंने यूनिवर्सिटी में अपने सीनियर्स को गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए देखा, तो मैंने भी उनके रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। यूनिवर्सिटी से दूर कॉलेज से जब छात्र या छात्राएं आते हैं, तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेटर यह एप्लीकेशन लिखने के बाद मुहर लगाने के लिए इधर-उधर दौड़ाया जाता है। मैं चाहता हूं कि इन सारी समस्याओं का समाधान हो। सवाल: जब आप छात्र राजनीति कर रहे थे तो क्या परिवार की ओर से मना भी किया जाता था? जवाब: हर परिवार की तरह मेरे माता-पिता भी चाहते थे कि मैं बस पढ़ाई करूं। शुरू में मुझे इन सारी चीजों के लिए डांट भी पड़ी थी। कॉलेज खत्म होने के चार-पांच घंटे बाद मैं घर जाता था, तो ऐसे में मुझसे सवाल किया जाता था। उनके मन में डर था कि कहीं मैं किसी गलत संगत में आकर कुछ गलत काम तो नहीं कर रहा हूं। अब फैमिली इन सारी चीजों को समझती है। मेरे अध्यक्ष बनने के बाद सभी लोग काफी खुश हैं। मम्मी खुद ढोल बाजे के साथ खड़ी थी और उन्होंने मेरा स्वागत किया। सवाल: यहां तक पहुंचने में आप अपने संघर्ष के बारे में बताइए? जवाब: मैंने अपना पहला प्रोटेस्ट मगध महिला कॉलेज की छात्राओं के हक के लिए किया था। 2019 में उस वक्त कोरोना का समय चल रहा था। उसे समय मुझे ऐसा लगा कि एडमिनिस्ट्रेशन से कुछ क्वेश्चन होने चाहिए तभी सुधार आएगा। फिर मैं मजबूरी से लड़ने लगा। पार्टी संगठन से जुड़कर में काम करने लगा और ऐसे में मेरा पॉलिटिकल इंटरेस्ट बढ़ गया। सवाल: पटना यूनिवर्सिटी से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे बड़े नेता निकले हैं, तो आपका आगे क्या प्लान है? जवाब: अभी जिस पद पर मैं हूं, उसके लिए मैंने 7 साल यूनिवर्सिटी में संघर्ष किया है। मैं आगे क्या करूंगा, मुझे यह नहीं पता है, लेकिन मैंने जो यूनिवर्सिटी में अपने भाइयों-बहनों से वादा किया है उसे मैं जरूर निभाऊंगा।