शिमला में महापौर के फैसले पर भाजपा का विरोध:पार्षद के निलंबन को बताया गैरकानूनी, कार्यकाल पर उठाए सवाल

शिमला में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को सीटीओ चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन नगर निगम सदन से एक पार्षद के निलंबन के विरोध में किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए महापौर सुरेंद्र चौहान के फैसले को गलत और गैरकानूनी बताया। प्रदर्शन के दौरान भाजपा पार्षदों ने महापौर को “पूर्व महापौर” कहकर संबोधित किया और उनके खिलाफ नारे लगाए। पार्षदों का आरोप है कि महापौर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पार्षद को निलंबित किया है, जबकि उनके पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है। महापौर के पास पार्षद को निलंबित करने की शक्ति नहीं निलंबित पार्षद बिट्ट कुमार पाना ने कहा कि महापौर के पास किसी भी पार्षद को निलंबित करने की शक्ति नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महापौर का कार्यकाल 6 जनवरी को ही समाप्त हो चुका है। सदन की बैठक में कार्यकाल बढ़ाने संबंधी अधिसूचना दिखाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। पाना ने आरोप लगाया कि जब इस विषय पर सवाल उठाए गए तो महापौर ने दुर्व्यवहार किया। भाजपा पार्षदों का यह भी कहना है कि रोस्टर के अनुसार, ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद महापौर का पद किसी महिला पार्षद को दिया जाना चाहिए था। वो गैर कानूनी तरीके से मेयर पद पर बैठे हुए है।

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