करनाल में जिला परिषद् चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया:ग्रांट में भेदभाव, जातिगत पक्षपात और 16-17 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप, बीजेपी पार्षद भी शामिल

करनाल में जिला परिषद् की चेयरमैन के खिलाफ 16 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव दिया है। पार्षदों का आरोप है कि ग्रांट वितरण में भेदभाव किया गया, जातिगत आधार पर अनदेखी हुई और कुछ चहेते लोगों का गुट बनाकर काम किया गया। प्रस्ताव में बीजेपी के पार्षद भी शामिल हैं। डीसी ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और अब नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी। ग्रांट वितरण को लेकर नाराजगी
जिला परिषद् की वाइस चेयरमैन वार्ड 16 की रीना देवी ने बताया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। पिछले करीब सवा तीन साल से हाउस में सभी सदस्य परिवार की तरह काम कर रहे थे। लेकिन चेयरमैन प्रतिनिधि सोहन सिंह राणा ने पार्षदों को सही तरीके से ग्रांट नहीं दी। रीना देवी ने कहा कि पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन दिया था कि सभी पार्षदों को समान रूप से ग्रांट मिलेगी और विकास कार्य बिना भेदभाव के होंगे। इसके बावजूद 11 एससी और बीसी पार्षदों को आज तक सही तरीके से ग्रांट नहीं मिली। जहां ग्रांट दी भी गई, वहां उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी योग्य व्यक्ति को चेयरमैन बना दे, ताकि प्रतिनिधि से छुटकारा मिल सके और सदस्य अपने-अपने वार्ड में ठीक से विकास कार्य करवा सकें। बीजेपी पार्षदों ने भी खोला मोर्चा
बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं वार्ड 13 के पार्षद मोहन सैनी, वार्ड 19 के पार्षद विनोद, रेणु देवी और सोनिया देवी सहित अन्य पार्षदों ने भी चेयरमैन की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एससी और बीसी वर्ग के साथ अत्याचार हुआ है और चेयरमैन प्रतिनिधि सरकार के तंत्र का दुरुपयोग कर रहा है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रतिनिधि ने अपने वार्ड में ही अधिकांश काम करवाए और वहां भी भ्रष्टाचार किया। करीब 16-17 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाया गया है। पार्षदों का कहना है कि प्रतिनिधि बीजेपी के नाम का इस्तेमाल अपने निजी व्यवसाय के लिए कर रहा है। उनके वार्डों में विकास कार्य नहीं हो रहे, जिससे जनता को जवाब देना मुश्किल हो गया है। डीसी द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद अब सभी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर है।

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