हरियाणा बजट को विपक्ष ने बताया भाषणबाजी:हुड्डा बोले-BJP ने ₹5.56 लाख करोड़ के कर्जे में डुबोया; नए लोन से पुराने की किस्त भरेगी सरकार

हरियाणा के पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये बजट नहीं, बल्कि कोरी भाषणबाजी है। जिसमें कुछ भी हकीकत नहीं, सिर्फ लफ्फाजी है। हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा को 5.56 लाख करोड़ के कर्जे तले दबा दिया है। क्योंकि 2026-27 के बजट के अनुसार आंतरिक ऋण 3,91,435 करोड़ रुपए है। छोटी बचतें अनुमानित 50,000 करोड़ रुपए हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम 68,995 करोड़ (2025-26 के अनुसार), और अतिरिक्त देनदारियां (बिजली बिलों का बकाया और सब्सिडी) 46,193 करोड़ हैं। यानी कुल राज्य पर कुल ऋण लगभग 5,56,623 करोड़ रुपए पहुंच चुका है, जो भारी वित्तीय दबाव और अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत को दिखाता है। लाडो योजना में भी सरकार ने किया खेल
लाडो लक्ष्मी योजना पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि लाडो लक्ष्मी योजना में भी सरकार ने खेल किया है। उन्होंने कहा, राज्य में 18 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं की अनुमानित संख्या 82.5 लाख है। यदि इस योजना के तहत प्रत्येक महिला को प्रति माह 2,100 रुपए की भत्ता दिया जाए, तो पूरे वर्ष (12 महीने) के लिए कुल अनुमानित राशि लगभग 20,790 करोड़ रुपए (लगभग 20,000 करोड़) बनती है। लेकिन 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए केवल 6,500 करोड़ रुपए ही प्रावधान किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बजट में उपलब्ध राशि से केवल लगभग 31.25 प्रतिशत महिलाओं को ही कवर किया जा सकता है, यानी करीब 67.5 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना से बाहर रखा गया है या उन्हें लाभ नहीं मिल पाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने 4% की ही वृद्धि बताई
राज्य का नया बजट 2,23,658 करोड़ रुपए का है, जो पिछले वर्ष 2025-26 के 2,05,017 करोड़ रुपए के बजट से 9 प्रतिशत अधिक है। लेकिन राज्य में मुद्रास्फीति दर लगभग 5 प्रतिशत होने के कारण वास्तविक वृद्धि मात्र 4 प्रतिशत के आसपास ही है। यानी 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का दावा पूरी तरह भ्रामक है। बजट के मुताबिक सरकार आंतरिक ऋण 76,250 करोड़ रुपए उठा रही है, जबकि ऋण चुकौती (मूलधन 36,101 करोड़ + ब्याज 29,566 करोड़) कुल 65,667 करोड़ रुपए है। इससे अन्य व्यय के लिए मात्र 10,593 करोड़ रुपए ही बच पाते हैं। शिक्षा विभाग को आवंटित बजट पर उठाए सवाल
शिक्षा के लिए 22,914 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सहित), जो कुल बजट का मात्र 6.2 प्रतिशत है। यह जीएसडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत है, जबकि नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर 6 प्रतिशत व्यय की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य के लिए 14,007 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो कुल बजट का मात्र 6.2 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार बजट व्यय का कम से कम 8 प्रतिशत स्वास्थ्य पर होना चाहिए। साथ ही, यह जीएसडीपी का केवल 1.1 प्रतिशत है, जबकि नीति में 2.5 प्रतिशत की आवश्यकता बताई गई है। 70% आबादी कृषि पर निर्भर
कृषि पर व्यय कुल व्यय का मात्र 4.8 प्रतिशत है, जबकि राज्य की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र की उपेक्षा को दर्शाती है। जहां तक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की बात है तो ऋण चुकाने और तमाम अग्रिम भुगतानों के बाद पूंजीगत व्यय के लिए केवल 21,756 करोड़ रुपए बचते हैं, जो कुल बजट का मात्र 9.7 प्रतिशत है। ये नए मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल और बजट में घोषित अन्य परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हैं। कुल व्यय में पूंजीगत व्यय मात्र 28 प्रतिशत है, जबकि उधार ली गई राशि का अधिकांश हिस्सा चालू खपत और पुराने ऋण चुकाने में उपयोग हो रहा है। इससे पूंजी सृजन, विकास गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और राज्य की आर्थिक वृद्धि नहीं हो पा रही है।
सीएम के भाषण में हताशा
हुड्डा ने कहा कि खुद बजट के आंकड़ों और सीएम सैनी के भाषण में हताशा नजर आती है। क्योंकि सरकार के पास न महंगाई को रोकने की कोई योजना है, न रोजगार सृजन का कोई प्लान है, न किसानों की एमएसपी का कोई प्रावधान है, न इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने की राशि है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी प्रति व्यक्ति आय के आधे अधूरे आंकड़े पेश किए। उसने ये तो बताया कि बीजेपी सरकार में कितनी आय बढ़ी। लेकिन ये नहीं बताया कि कांग्रेस सरकार में आय बढ़ने की गति कितनी तेज थी। 10 साल में प्रति व्यक्ति आय 2 गुना ही बढ़ी
कांग्रेस सरकार के दौरान प्रति व्यक्ति आय लगभग 37,000 से बढ़कर लगभग 1,50,000 रुपए हुई थी यानी 4 गुना बढ़ी थी। जबकि बीजेपी के 10 साल में यह सिर्फ 2 गुना ही बढ़ी। यानी अगर कांग्रेस सरकार जितनी रफ्तार से बढ़ती तो आज हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 6-7 लाख रुपए होती। जबकि फिलहाल ये सिर्फ 3-4 लाख ही है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि रोजगार सृजन पर यह सरकार पूरी तरह खामोश है। यहां तक कि खुद सीएम ने मान लिया है कि कांग्रेस सरकार ने हरियाणा में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जो आईएमटी स्थापित की थीं, उनकी हालत आज बेहद खराब है। ऐसे में नए उद्योग और नया निवेश हरियाणा में हो ही नहीं रहा है, बल्कि पहले से स्थापित उद्योग भी यहां से पलायन कर रहे हैं। यही वजह है कि हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन हो चुका है। 11 साल बाद यमुना की सफाई की याद आई
इतना ही नहीं, सत्ता में रहने के 11 साल बाद सरकार को यमुना की सफाई याद आई है, जबकि बीजेपी के पूरे कार्यकाल से हरियाणा देश का सबसे अधिक हवा और जल प्रदूषित राज्य बना बना हुआ है। इतना ही नहीं, सीएम ने स्पष्ट माना कि हरियाणा में सरकार जरूरत के मुताबिक लोगों और खेती को जल उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। बावजूद इसके उन्होंने पंजाब से हरियाणा के हिस्से का पानी यानी SYL का अधिकार लेने का कोई जिक्र नहीं किया।

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