फतेहाबाद में MP कुमारी सैलजा बोलीं-अफसरों में उत्साह नहीं:रूटीन में फाइलें चल रही; ग्रांट देने पर कहा, दिल खुला- हाथ बंधे

सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा आज (शनिवार) को फतेहाबाद पहुंची। यहां उन्होंने जिला बार एसोसिएशन की ओर से बार रूम में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। कुमारी सैलजा ने वकीलों से लेकर राजनीतिक परिस्थितियों तक पर अपने विचार रखे। उनके साथ विधायक बलवान दौलतपुरिया व जिलाध्यक्ष अरविंद शर्मा भी मौजूद रहे। इस दौरान कुमारी सैलजा ने सरकारी अफसरों के कामकाज पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजकल शासन, प्रशासन की कार्यशैली देखती हूं तो वह कोई अच्छी नहीं है। ना अफसरों में उत्साह लगता है। रूटीन में फाइलें चल रही है, किसी को कुछ मालूम नहीं, किसी में कोई तालमेल नहीं है। जनता का पैसा है, पब्लिक में कैसे लगे, यह जिम्मेदारी समझनी चाहिए। विधायक से बोली-स रकार की कारगुजारी विधानसभा में रखें उन्होंने फतेहाबाद से विधायक बलवान दौलतपुरिया की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि बलवानजी सरकार की इस कारगुजारी को आप विधानसभा में रखें। लोगों की मांगें हम उठाते हैं। लोकसभा तो चलने ही नहीं देते हैं। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास लाने को विपक्ष मजबूर हुआ। हालांकि, यह अच्छी बात नहीं है, लेकिन हमने मजबूरी में करना पड़ रहा है। सैलजा ने कहा कि जिला बार में हमारा आना-जाना हमेशा रहा है। मेरा हमेशा प्रयास रहा है कि बार में जरूर अपना योगदान देती रहूं। मैं समझती हूं कि वकीलों का बहुत जिम्मेदारीभरा रोल होता है। वकीलों के पास हर पहलू को समझने की क्षमता होती है। अंबाला में पहली बार गई तो वहां की बार की स्थिति अच्छी नहीं थी। वहां पर काफी कार्य करवाया। बोलीं- दिल तो खुला है, लेकिन हाथ बंधे हुए हैं कुमारी सैलजा ने कहा कि चुनाव में आप लोगों का दिल खोलकर समर्थन मिला। आपने मुझे भारी मतों से जीताकर भेजा। बार एसोसिएशन को ग्रांट भी अधिक देना चाहती हूं, लेकिन इस सरकार ने प्रॉब्लम कर दी है। अब सिर्फ 50 लाख रुपए ही पूरे लोकसभा क्षेत्र में संस्थाओं को एक साल में दे सकते हैं। हर गांव में संस्थाएं हैं। कुछ लोग नाराज भी होते हैं। इसलिए माफी भी मांगती हूं। मेरा दिल बहुत बड़ा है, लेकिन हाथ बंधे हुए हैं। सरकार ने 5 करोड़ रुपए की सालाना ग्रांट से ज्यादा एक रुपया नहीं बढ़ाया है। प्रधानमंत्री से बार-बार आग्रह किया है कि फंड बढ़ाया जाए। एक-एक गांव में 30 लाख रुपए तक के प्रोजेक्ट्स ले आते हैं। बड़ी मुश्किल हो जाती है।

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