बिहार म्यूजियम और पटना म्यूजियम को जोड़ने वाली अंडरग्राउंड टनल की खुदाई आज से शुरू होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार टनल बोरिंग मशीन (TBM) का बटन दबाकर इसकी शुरुआत करेंगे। ये मशीन जनवरी में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन द्वारा टनल की खुदाई के लिए सिंगापुर से मंगाई गयी थी। करीब 1.5 किमी लंबी इस टनल में लोग पैदल भी जा सकेंगे। इसे 542 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। दो म्यूजियम को जोड़ने वाला भारत का पहला टनल यह विश्व स्तरीय ‘हेरिटेज टनल’ पटना म्यूजियम, विद्यापति मार्ग, तारामंडल क्रॉसिंग, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना विमेंस कॉलेज और बिहार म्यूजियम सहित कई प्रमुख जगहों से होकर गुजरेगा। दो म्यूजियम को जोड़ने वाली यह अपनी तरह की भारत की पहली सुरंग है। यह टनल पूरी तरह वातानुकूलित होगी। इसके दोनों सिरों पर लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी। पैदल चलने वालों के लिए सीढ़ियां और पैदल पथ भी बनाए जाएंगे। बैटरी चालित गोल्फ कार भी चलेगी। इस टनल के बनने से दोनों म्यूजियम की आपसी कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। एक आर्ट गैलरी की तरह होगी यह सुरंग यह सुरंग एक आर्ट गैलरी की तरह होगी, जिसमें मधुबनी पेंटिंग्स के द्वारा राज्य की कला, संस्कृति, विरासत, भित्तिचित्र और अन्य कलाकृतियों को सुरंग की दीवारों पर प्रदर्शित किया जाएगा। एंट्री और एग्जिट बिल्डिंग में एक भूतल और प्रथम तल होगा और इसमें तीन-लेवल का बेसमेंट होगा। म्यूजियम की सुरंग मेट्रो टनल के ऊपर से गुजरेगी म्यूजियम को जोड़ने वाला टनल जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे होगा। वहीं, मेट्रो के टनल और म्यूजियम को जोड़ने वाली टनल का क्रासिंग प्वाइंट नेहरू पथ में होगा। इसी कारण मेट्रो की टनल जमीन से 29 मीटर नीचे से गुजरेगी। क्रॉसिंग प्वाइंट पर म्यूजियम की सुरंग और मेट्रो टनल में लगभग 6.5 मीटर की दूरी होगी।