‘कुवैत, बहरीन, दुबई, आबूधाबी, सऊदी अरब और कतर में गांव के 70 से अधिक लोग रहते हैं। वे वहां के हालात बताते हैं कि समय-समय पर मिसाइलें गिरती हैं, सायरन बजते हैं। वे लोग भयभीत हैं, परेशान हैं, वे वापस आना चाहते हैं, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने की वजह से फंसे हुए हैं।’ गांव की महिलाएं, बच्चे अपने-अपने पति और पिता को लेकर चिंतित हैं। गांव के सभी लोग जिनके घर से लोग बाहर कमाने गए हैं। भारत सरकार और स्थानीय सांसद से गुजारिश है कि हालात के ठीक होते ही परिवार के फंसे सदस्यों को भारत लाया जाए।’ गयाजी जिले के आमस प्रखंड के सुपाई गांव के लोगों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। दरअसल, गांव में 70 घर हैं और हर घर से औसतन एक-एक सदस्य गल्फ कंट्री में फंसे हुए हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े जंग के बीच गल्फ कंट्री में फंसे सुपाई गांव के लोगों के परिजन किस हाल में है? गांव के लोग कब से गल्फ कंट्री में रह रहे हैं? रोजाना की बातचीत में गल्फ कंट्री में फंसे लोग वहां के हालातों के बारे में क्या बताते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। गांव में हर किसी की आखें मोबाइल की स्क्रीन पर टिकी हैं दोपहर का वक्त। गांव की गलियों में सामान्य दिनों की तरह बच्चों की चहल-पहल नहीं है। कुछ बुजुर्ग घरों के बाहर चौकी पर बैठे हैं। मोबाइल फोन उनके हाथ में है। आंखें स्क्रीन पर टिकी हैं। जैसे किसी कॉल का इंतजार हो। गांव में इन दिनों मोबाइल फोन ही सबसे बड़ा सहारा है। हर दिन कई बार वीडियो कॉल हो रही है। कोई बेटे से बात कर रहा है। कोई भाई से। कोई भतीजे से। ये मंजर सुपाई गांव का है, जहां करीब 70 घर हैं। ये मुस्लिम आबादी वाला गांव हैं। हर घर से कोई न कोई खाड़ी के देशों में रोजी-रोटी की तलाश में गया हुआ है। गांव के लोग बताते हैं कि करीब पांच दर्जन से ज्यादा युवक सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन जैसे देशों में काम करते हैं। कई तो 20 साल से भी ज्यादा वक्त से विदेश में हैं। सुपाई गांव की पहचान ही कुछ ऐसी बन गई है कि यहां से हर साल दर्जनों युवक खाड़ी देशों की ओर जाते हैं। कोई ड्राइवर है। कोई कंपनी में काम करता है। कोई कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी करता है तो कोई इंजीनियर है। कई घर ऐसे हैं जिनके चार-चार, पांच-पांच लड़के विदेश में हैं। अब पढ़िए, गल्फ कंट्री के हालातों की कहानी, गांव के लोगों की जुबानी 14 साल के अनस खान ने बताया कि मेरे चाचा और चचेरे भाई सऊदी अरब में काम के सिलसिले में रहते हैं। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में ईरान की ओर से बमबारी हो रही है। मेरे चाचा और चचेरे भाई जहां रहते हैं, वहां से कुछ ही दूरी पर बमबारी हो रही है। जब से चाचा और चचेरे भाई ने ये सब बताया है, घरवाले काफी चिंता कर रहे हैं। ‘बमबारी के बाद से भाई परेशान है, रोज बातचीत करते हैं’ अबुल फराह खान ने बताया कि मेरा भाई शिवली खान सऊदी अरब में रहता है। जब से ईरान की ओर से बमबारी हो रही है, घरवाले लगातार चिंता कर रहे हैं। भाई एक साल पहले घर आए थे। बमबारी की खबर के बाद घर के लोग परेशान हैं, ये लाजिम भी है। मेरे भाई जहां काम कर रहे हैं, वहां उन्हें बाहर निकलने की मनाही है, वे सुरक्षित हैं। बातचीत रोज होती है। उन्होंने बताया कि मेरे भाई को गाइडलाइंस के पालन की सलाह दी गई है। कैंपस में ही रहने की हिदायत दी गई है। मेरी भारत सरकार से गुजारिश है कि हालात जैसे ही ठीक हो, मेरे भाई को अपने देश लाया जाए। भारत सरकार से ये भी गुजारिश है कि जल्द से जल्द जंग में कूदे देश के बीच मध्यस्थता कराए, ताकि जंग खत्म हो जाए। ‘चार भतीजे गल्फ कंट्री में रहते हैं, हालात सही नहीं हैं’ औरंगजेब खान ने बताया कि मेरे बड़े भाई के चार बच्चे बाहर ही हैं। तीन बच्चे सऊदी में, जबकि एक बेटा आबूधाबी में है। एक बेटा घर पर ही है। घरवाले टेंशन में हैं। मेरे भतीजों ने बताया कि घर के पास ही मिसाइलें गिर रही हैं, वहां रहना मुश्किल है। वे घर आना चाह रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात सही नहीं हैं। चारों भतीजों में से एक की पत्नी और बच्चे भी वहीं रहते हैं। औरंगजेब खान ने बताया कि मोहम्मद परवेज मेरे बड़े भाई हैं। वे लगातार बच्चों से कहते हैं कि ठीक से रहना, जिंदगी रहेगी तो खूब पैसा कमा लेंगे, लेकिन सही सलामत रहना, अपना ख्याल रखना। ‘कंपनी के कैंपस से बाहर जाने पर मनाही, हमारे मन में बेचैनी’ एनामुल हक ने बताया कि मेरे 4 बेटे हैं। इनमें से एक कतर, जबकि तीन दुबई, कुवैत और सउदी अरब में है। उनसे लगातार बात होती है, जहां काम करते हैं, उस कंपनी ने उन्हें सेफ रखा है, बाहर नहीं जाने दिया जाता है। बातचीत में वे बताते हैं कि हम लोग सही सलामत हैं, लेकिन मन में बेचैनी रहती है। 10 साल की अरीवा पठान ने कहा कि मामा बाहर रहते हैं। शुक्रवार को ही मामा से बात हुई थी। उनसे जब बात होती है तो कहते हैं कि अल्लाह से मनाते हैं कि जंग रुक जाए, बमबाजी न हो, मिसाइलें न गिरे। हम लोग टेंशन में रहते हैं।
‘घर परिवार चलाने के लिए गल्फ कंट्री आना-जाना लगा रहता है’ मोहम्मद अयाज खान ने बताया कि 50 से ज्यादा लड़के रोजी-रोटी कमाने के लिए गल्फ कंट्री में रहते हैं। परिवार में मेरे भाई, भतीजे, चचेरे भाई समेत गांव के बहुत से लोग बाहर गए हैं। उनके परिवार के सदस्य टेंशन में रहते हैं। वे बताते हैं कि मेरे परिवार के कुछ लोग 15 से 20 साल से रहते हैं, कुछ लोग हाल में ही गए थे।
अयाज खान बताते हैं कि गांव के लोगों से जब बात होती है, तो बताते हैं कि सायरन बजने के बाद उन्हें क्या करना है, इसकी प्रॉपर गाइडलाइन जारी की गई है। उन्हें बताया गया है कि अगर सायरन बजता है तो उन्हें सुरक्षित पर रहने के लिए कहां जाना है, कैसे रहना है, वे ये भी बताते हैं। गल्फ कंट्री की सरकारों को हमारी चिंता है, वे हमारा ख्याल रखते हैं। ‘सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, हिंदू, सिख, ईसाई भी परेशान हैं, भयभीत हैं’ सबा खान ने बताया कि गांव के हालत तो ठीक है, लेकिन गल्फ कंट्री में जो कुछ हो रहा है, उससे हम लोग परेशान हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ हमारे गांव के हालात ही खराब है। देश के जितने भी लोग गल्फ कंट्री में रहते हैं, चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो, सभी के परिवार चिंतित और भयभीत हैं।