चंडीगढ़ सुखना कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माणों पर संकट:सुनवाई टली अब 13 मार्च होगी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

चंडीगढ़ सुखना कैचमेंट एरिया में हुए अवैध निर्माणों को लेकर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद सुनवाई की गति तेज हो गई है। 10 मार्च को हुई सुनवाई के बाद अगली सुनवाई की तारीख 13 मार्च तय की गई है। सुखना झील के आसपास का यह क्षेत्र इको-सेंसिटिव जोन में आता है और यह सुखना वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के पास स्थित है। लंबे समय से यहां हुए अवैध निर्माण विवादों में हैं। पर्यावरण प्रेमियों की याचिकाओं और शिकायतों के चलते अदालतें लगातार ऐसे निर्माणों पर कड़े फैसले ले रही हैं। पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, जून-जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र (लक्कड़पुर-खोरी) में अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने 10 हजार से अधिक अवैध मकानों को गिराने और वीडियोग्राफी करवाने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने 2 मार्च को दिया आदेश सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर भी हाईकोर्ट ने 2 मार्च 2020 को आदेश दिया था कि सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे के अनुसार अवैध और अनधिकृत निर्माण तीन महीने के भीतर गिरा दिए जाएं। इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा सरकारों को 100-100 करोड़ रुपए जुर्माने के तौर पर केंद्र सरकार को देने के निर्देश भी दिए गए थे। हालांकि कोरोना और लॉकडाउन के कारण कार्रवाई रुक गई। इसके बाद हाईकोर्ट में 13 फरवरी 2026 को अवमानना और रिव्यू याचिकाओं पर फिर से सुनवाई शुरू हुई, जो फास्ट ट्रैक गति से आगे बढ़ रही है। बिल्डर- माफियाओं में खलबली सुप्रीम कोर्ट ने भी चंडीगढ़ और आसपास के बिल्डर माफिया को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि सुखना झील को क्यों नष्ट होने दिया जा रहा है और कहा कि झील को और कितना सुखाओगे। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और तेज सुनवाई के बाद प्रशासन ने अब तुरंत निगरानी शुरू कर दी है। विवादित कॉलोनी में कोई नया बिजली मीटर या सरकारी सुविधा देने पर रोक लगा दी गई है। इस कदम से सुखना कैचमेंट एरिया में मकान या प्लॉट खरीदने वाले मध्यम वर्गीय परिवार भी परेशान हैं। कई लोग अपनी प्रॉपर्टी बेचकर अपनी जिंदगी भर की कमाई बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

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