चंडीगढ़ में दूषित पानी की शिकायतों का मुद्दा संसद में उठने के बाद केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि चंडीगढ़ के कुछ इलाकों से गंदे पानी की शिकायतें जरूर मिली थीं, लेकिन जांच में अधिकांश पानी के नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन को मौली जागरां, दरिया और हल्लो माजरा इलाकों से पेयजल में गंदापन आने की शिकायतें मिली थीं। पीलिया से बच्ची की मौत के बाद उठा मामला बता दें कि, मौली जागरां में पीलिया से 8 वर्ष की बच्ची की मौत के बाद शहर में पानी की सप्लाई को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में दूषित पेयजल की आपूर्ति का मुद्दा संसद में भी उठाया गया। सरकार के अनुसार ज्यादातर मामलों में पानी के गंदा होने की वजह जलापूर्ति पाइपलाइनों की मरम्मत के दौरान मिट्टी का पानी में मिलना पाया गया। इसके अलावा कुछ जगहों पर लोगों द्वारा गैर-आपूर्ति समय में पाइपलाइन से सीधे जुड़े पंप चलाने से भी पाइप जोड़ों पर दबाव पड़ता है, जिससे मिट्टी पानी में मिल जाती है। 1995 नमूनों की कराई जांच स्थिति को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने पिछले तीन महीनों में 1995 पानी के नमूने एकत्र किए और उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट में अधिकांश नमूनों की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है।