पंजाब के गुरदासपुर में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए रणजीत सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी मौत गोली लगने से हुई थी। परिवार लगातार दावा कर रहा था कि रणजीत की मौत पुलिस यातना (टॉर्चर) के कारण हुई थी। रिपोर्ट में इस दावे को खारिज किया गया है। रणजीत सिंह का परिवार पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। परिवार ने कहा है कि वे रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी करने से पहले पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी देखना चाहेंगे। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस के पक्ष में है, लेकिन पुलिस इस बात पर चुप्पी साधे हुए है कि हथकड़ी में जकड़े रणजीत सिंह ने एक बाइक और पिस्तौल कैसे और कहां से हासिल की। पुलिस के अनुसार, रणजीत ने मुठभेड़ के दौरान सीआईए इंचार्ज गुरमीत सिंह पर गोली चलाई थी। युवक के ताऊ ने किया था दावा- हिरासत में हुई मौत रणजीत सिंह के ताया (ताऊ) हरविंदर सिंह मल्लही ने शुरू से ही दावा किया था कि उसे हिरासत में पूछताछ के दौरान मार दिया गया था। यह मामला पुलिस हत्याकांड से जुड़ा है। रणजीत सिंह का पोस्टमार्टम 3 मार्च को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुरेखा डडवाल की मौजूदगी में किया गया था। अदालत ने पुलिस जीप के पलटने की जगह से लगभग 25 किलोमीटर दूर पुरानाशाला में हुए कथित मुठभेड़ स्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी मांगी थी। पुलिस का दावा- हथियार बरामदगी के लिए ले गए पुलिस ने दावा किया था कि रणजीत सिंह को हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस जीप पलटने के बाद वह पुलिस हिरासत से भागने में सफल हो गया था, जिसके बाद मुठभेड़ हुई। पोस्टमार्टम सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर के डॉक्टरों की टीम ने किया था। इस टीम में डॉ. सुखदीप सिंह (मेडिकल ऑफिसर), डॉ. सतिंदर पाल सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. हर्ष कुमार (सीनियर रेजिडेंट) शामिल थे।