सेना में भर्ती होने के बाद पहली बार घर आया अग्निवीर जवान आर्यन शर्मा अब कभी वापस नहीं लौटेगा। 2 साल पहले अग्निवीर बनकर सिक्किम की जलपाईगुड़ी में तैनात आर्यन 5 मार्च को छुट्टी लेकर घर आया था। उसे 15 मार्च को वापस ड्यूटी पर रिपोर्ट करना था। गुरुवार शाम को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ आर्यन को उसके पैतृक गांव बडौंदा (कुरुक्षेत्र) में अंतिम विदाई दी गई। दरअसल, 11 मार्च की शाम लाडवा से पड़ोसी के शादी समारोह से लौटते हुए ब्रेजा कार ने आर्यन की गाड़ी को साइड मार दी। आर्यन खुद कार चला रहा था। कार में उसकी चचेरी बहन कनिका शर्मा (12) और भतीजा अभि शर्मा (13) सवार थे। साइड लगने के बाद कार बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकरा कर खेत में गिर गई, जिसमें आर्यन और कनिका की मौत हो गई। 2 साल पहले आर्मी में भर्ती हुआ आर्यन 12वीं क्लास तक पढ़ा था। उसके बाद उसने आगे आर्मी में जाने के लिए मेहनत की। उसकी मेहनत रंग लाई और करीब 2 साल पहले आर्यन इंडियन आर्मी में भर्ती हो गया था। आर्यन इंडियन आर्मी की 627 EME बटालियन में अग्निवीर जवान था। सिक्किम के जलपाईगुड्डी में आर्यन ड्यूटी कर रहा था। परिवार के साथ भात भरने गया दिल्ली आर्यन भात भरने के लिए छुट्टी लेकर घर आया था। 10 मार्च को पूरा परिवार दिल्ली में भात भरने गया। दिल्ली में उसकी बुआ के यहां शादी थी। उस शादी में शामिल होने के लिए ही आर्यन छुट्टी लेकर घर आया था। भात से लौटने के बाद आर्यन 11 मार्च को गांव में पड़ोसी की शादी की पार्टी में शामिल होने लाडवा आया था।
दो बहनों का इकलौता भाई था आर्यन आर्यन अपने माता-पिता इकलौता बेटा और परिवार का अकेला सहारा था। उसके पिता अनिल कुमार सेलर में मुनीमी करते हैं। मां शिमला देवी गृहणी हैं। आर्यन अपनी 2 बहनों में सबसे छोटा था। कुछ समय पहले उसके पिता अनिल कुमार का भी एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उन्हें काफी चोटें आई थीं। खुशियां मातम में बदल गई आर्मी की ट्रेनिंग और जॉइनिंग के बाद आर्यन पहली बार छुट्टी लेकर घर आया था। इसलिए उसके घर में खुशी का माहौल था। भात भरने के बाद पूरा परिवार ठीक-ठाक घर आ गया था। सब यही सोच रहे थे कि आर्यन अब कुछ दिन परिवार के साथ रहेगा। लेकिन एक पल में सब कुछ बदल गया। गांव में नहीं जला किसी के घर चूल्हा 11 मार्च यानी बुधवार को घटना हुई तो परिवार को पहले सिर्फ घायल होने की खबर दी गई। अगली सुबह जैसे ही दोनों बच्चों की मौत की सूचना फैली, तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। एक ही परिवार में दो बच्चों की मौत से गांव में किसी ने चूल्हा नहीं जला। पूरा गांव बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। अलग-अलग चिता पर अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोनों बच्चों का अलग-अलग चिताओं पर अंतिम संस्कार किया गया। आर्यन के ताऊ के बेटे अंकुश ने नम आंखों से दोनों भाई-बहन को मुखाग्नि दी। आर्यन और कनिका की चिता पर पूरा परिवार बिलखता रहा। गांव के लोग और रिश्तेदार इस परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे। कनिका पढ़ाई में थी होनहार कनिका भी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसके पिता प्रवीन कुमार बिजली विभाग में कार्यरत हैं। कनिका लाडवा के प्राइवेट गर्ल्स स्कूल में 6वीं क्लास की छात्रा थी। कल शुक्रवार को उसका पेपर था। लेकिन स्टूडेंट की मौत के बाद स्कूल ने परीक्षा को एक दिन के लिए टाल दिया। कनिका स्कूल की होनहार लड़की थी। अभि के माता-पिता ऑस्ट्रेलिया हादसे में जख्मी हुए अभि के पिता जोनी और मां ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। अभि यहां अपने चाचा अनिल यानी आर्यन के पिता के पास रह रहा है। अभि 7वीं क्लास में पढ़ता है। हादसे में अभि को काफी चोटें लगी हैं। प्राइवेट अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।