गैस संकट, शिमला में ढाबों पर ताला लगा:टूरिस्ट के मेन्यू से राजमा-काबुली चना गायब, होटलों में एडवांस बुकिंग कैंसिल; लकड़ी के चूल्हे-इंडक्शन मंगवाए

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखने लगा है। LPG सिलेंडर की संभावित कमी की आशंका से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों मेन्यू में कटौती कर दी है। शिमला में लंबे समय में पकने वाले व्यंजन जैसे राजमा और काबुली चना को बंद कर दिया हैं, जबकि जल्दी तैयार होने वाली दालों और हल्के भोजन को मेन्यू में शामिल किया है। इसके अलावा कुछ ढाबों पर आज ताले लटक गए हैं। लक्कड़ बाजार में दो ढाबे बंद मिले हैं। ढाबा संचालक लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह 20 साल से लक्कड़ बाजार में ढाबा चला रहे हैं। इससे पहले कभी ऐसी नौबत नहीं आई। सिलेंडर नहीं मिलने से गुरुवार शाम से ढाबा बंद कर दिया है। वहीं कारोबारियों के पास LPG का पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है, वे फूड के साथ की गई एडवांस बुकिंग खुद ही रद्द कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लकड़ी से जलने वाले चूल्हों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ इंडक्शन पर भोजन तैयार कर रहे हैं। खाड़ी देशों में जारी तनाव लंबा चलता है, तो आने वाले समर सीजन में हिमाचल के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। जानिए होटल के मालिकों ने क्या कहा… टूरिस्ट को खाने की चिंता नहीं हिमाचल में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से हालात जरूर चिंताजनक है, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं है कि टूरिस्ट को खाना न मिल पाए। क्योंकि होटेलियर ने LPG का विकल्प के तौर पर इंडक्शन और लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। पेट्रोल-डीजल की फिलहाल कमी नहीं हालांकि, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि राज्य में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई बड़ी कमी नहीं है। शिमला के पेट्रोल पंप संचालक अमित नंदा के अनुसार पहले की तरह अतिरिक्त स्टॉक जरूर नहीं मिल रहा, लेकिन जितनी मांग है उतनी आपूर्ति हो रही है और किसी भी वाहन चालक को खाली हाथ नहीं लौटना पड़ रहा। सरकार से हस्तक्षेप की मांग एडवांस बुकिंग रद्द होने और गैस आपूर्ति में दिक्कत के बीच हिमाचल होटलियर एसोसिएशन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एमके सेठ ने सरकार से पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि पर्यटन उद्योग पर संकट गहराने से रोका जा सके। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति संभाली नहीं गई तो समर सीजन में हिमाचल आने वाले हजारों पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

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