झज्जर में एक ही चिता पर हुआ दंपती का संस्कार:दादी की गोद में खेलती रही बच्ची, घर में उठ रही थी अर्थी

झज्जर जिले में गुढ़ा फाटक के पास ट्रेन के आगे कूदकर जान देने वाले सुनील और उसकी पत्नी हिमांशी अपने पीछे सिर्फ 8 माह की मासूम बेटी दिव्या छोड़ गए हैं। मां-बाप के इस तरह अचानक चले जाने के बाद अब इस नन्ही बच्ची की परवरिश की जिम्मेदारी उसकी दादी और परिवार के अन्य सदस्यों के कंधों पर आ गई है। गांव जौंधी निवासी 28 वर्षीय सुनील झज्जर में डीसीपी हेडक्वार्टर की सुरक्षा में होमगार्ड के पद पर तैनात था। करीब ढाई साल पहले उसकी शादी हिमांशी के साथ हुई थी। 8 महीने पहले जब बेटी ने जन्म लिया था तो घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन अब वही घर गहरे मातम में डूबा हुआ है। सुनील और उसकी पत्नी हिमांशी का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। परिवार और ग्रामीणों ने दोनों के लिए अलग-अलग चिता बनाने की बजाय एक ही चिता तैयार की। क्योंकि दोनों ने जीवन ही नहीं बल्कि मौत भी एक-दूसरे के साथ चुनी थी। मासूम दिव्या को नहीं पता, अब नहीं आएंगे मम्मी-पापा सुनील और हिमांशी की 8 माह की बेटी दिव्या अभी इतनी छोटी है कि उसे यह भी नहीं पता कि उसके मां-बाप अब इस दुनिया में नहीं रहे। घर में जहां मातम का माहौल है और हर आंख नम है, वहीं मासूम दिव्या कभी किसी की गोद में तो कभी किसी की गोद में खेलती नजर आ रही है। परिवार के लोगों का कहना है कि बच्ची अभी इतनी छोटी है कि उसे इस दर्दनाक घटना का अंदाजा भी नहीं है। जब घर में सुनील और हिमांशी के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं, उसी समय मासूम कभी किसी की गोद में तो कभी किसी की गोद में खेलती नजर आई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। दादी के कंधों पर आ गई जिम्मेदारी बेटे और बहू को खोने के गम के बीच अब सुनील की मां के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी 8 माह की पोती की परवरिश की है। सुनील के बडे़ भाई दिव्या के ताऊ अनिल के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी इस जिम्मेदारी में उनका साथ देंगे। लेकिन सबसे ज्यादा जिम्मेदारी दादी शंकुतला की हो गई हैं। गांव में हर किसी की जुबान पर वही सवाल इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। लोग यही कह रहे हैं कि सुनील और हिमांशी तो दुनिया छोड़ गए, लेकिन अपने पीछे उस मासूम को ऐसी जिंदगी दे गए, जिसमें वह शुरू से ही मां-बाप के साये से महरूम हो गई। आज दोपहर हुआ दोनों का अंतिम संस्कार सुनील और हिमांशी का शुक्रवार को गांव में नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान गांव के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल बेहद गमगीन नजर आया। परिजनों और ग्रामीणों ने भारी मन से दोनों को अंतिम विदाई दी। इस दौरान घर में मौजूद 8 माह की मासूम बेटी को देखकर कई लोग भावुक हो उठे। अब उसकी परवरिश की जिम्मेदारी परिवार और खासकर दादी के कंधों पर आ गई है। एक ही चिता पर हुआ दोनों का अंतिम संस्कार बीमारी और मानसिक परेशानी से जूझ रहे सुनील और हिमांशी ने एक साथ ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। हादसे के बाद जब दोनों के शव गांव पहुंचे तो पूरे गांव में मातम छा गया। अंतिम संस्कार के समय परिवार के लोगों ने फैसला लिया कि दोनों को अलग-अलग नहीं किया जाएगा। श्मशान घाट में एक ही चिता सजाई गई और उसी पर सुनील और हिमांशी को अंतिम विदाई दी गई। इस मार्मिक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार और ग्रामीणों का कहना था कि शादी के समय सुनील और हिमांशी ने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। शायद यही वजह रही कि दोनों ने आखिरी सफर भी साथ ही तय किया और अब अंतिम संस्कार भी एक ही चिता पर हुआ।

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