सैंपल फेल के सवाल पर भड़के बाबा रामदेव:करनाल में बोले-दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात, मीडिया कर्मी को सेहत सुधारने की सलाह

करनाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव मीडिया के सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया देते नजर आए। पतंजलि के उत्पादों के सैंपल फेल होने के सवाल पर उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया और सवाल पूछने वाले पत्रकार को ही अपनी सेहत सुधारने की सलाह दे डाली। उन्होंने कहा कि पतंजलि पर अक्सर बिना आधार के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने दुनिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, गैस की किल्लत, शिक्षा व्यवस्था और स्वदेशी आंदोलन पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। बोले- बन रहे अघोषित तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात दुनिया में चल रहे तनावपूर्ण हालात पर भी बाबा रामदेव ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका और इजराइल बम बरसा रहे हैं, वहीं इसके जवाब में ईरान बैलेस्टिक मिसाइल और बम दाग रहा है। इन घटनाओं से मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में एक तरह से अघोषित तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन हालातों के कारण दुनिया भर में गैस और ईंधन को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों में गैस के लिए त्राहिमाम जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर भी लोग आशंकित हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि खाड़ी देशों में भारत के करीब एक करोड़ लोग काम करते हैं। ऐसे में वहां के हालात बिगड़ते हैं तो उनके जीवन पर भी संकट खड़ा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर साधा निशाना बाबा रामदेव ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसे गंभीर हालातों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र मौन साधकर बैठा हुआ है। विश्व बैंक, आईएमएफ, डब्ल्यूटीओ, डब्ल्यूएचओ और मानवाधिकार के बड़े-बड़े ठेकेदार भी चुप हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे सबके मुंह पर टेप लगी हुई है और सबके मुंह में दही जम गया है। कोई बोलने का साहस नहीं कर पा रहा, क्योंकि अमेरिका जैसी महाशक्ति सामने खड़ी है और डोनाल्ड ट्रंप भी आगे खड़े हैं। बाबा रामदेव ने कहा कि अब नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर दुनिया के सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को पहल करनी चाहिए ताकि यह युद्ध जल्द खत्म हो सके। गैस संकट पर बोले- सरकार व्यवस्था कर रही देश में गैस की किल्लत के सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कई बड़े संस्थानों से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों में गैस की कोई बड़ी किल्लत नहीं आएगी, ऐसी व्यवस्था सरकार ने की है। हालांकि उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि घरों में थोड़ी मितव्ययता बरतनी पड़ेगी। सरकार भी इस दिशा में ध्यान दे रही है और आने वाले समय में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तरफ बढ़ना जरूरी होगा। सत्ता और संसाधनों का उन्माद युद्ध का कारण- रामदेव बाबा रामदेव ने कहा कि दुनिया में होने वाले युद्धों के पीछे राजनीतिक और आर्थिक उन्माद सबसे बड़ा कारण है। इसके साथ सत्ता का उन्माद और मजहबी उन्माद भी जुड़ जाता है। उन्होंने कहा कि जब इन सब चीजों का मिश्रण होता है तो युद्ध और बड़े पैमाने पर विनाश की स्थिति पैदा होती है। इसलिए दुनिया भर में राजनीतिक, आर्थिक और संसाधनों के विस्तार के उन्माद पर रोक लगानी होगी। योग, आयुर्वेद और स्वदेशी को बताया देश की ताकत बाबा रामदेव ने कहा कि मातृभूमि की सेवा के लिए करीब 30 साल पहले योग, आयुर्वेद और स्वदेशी का अभियान शुरू किया गया था। आज यह अभियान सफलता के शिखर तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा योगदान देश की मातृ शक्ति का रहा है। आज पतंजलि दुनिया के बड़े ब्रांडों में शामिल हो चुका है और इसके पीछे सेवा और परमार्थ की भावना काम करती है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में माताएं और बहनें करनाल पहुंची थीं और यहां एक बड़ा अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस दौरान उन्होंने तीन आह्वान किए। पहला योग का अभ्यास करें और करवाएं, दूसरा आयुर्वेद को अपनाएं और तीसरा स्वदेशी को बढ़ावा दें। संस्कारयुक्त शिक्षा की जरूरत पर दिया जोर बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश को शिक्षा की गुलामी, चिकित्सा की गुलामी, आर्थिक, वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से मुक्त करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज देश को बीमारियों, बुराइयों, नशे और अश्लीलता की तरफ धकेला जा रहा है, जिससे समाज में चारित्रिक दरिद्रता और मानसिक दिवालियापन का बदसूरत दृश्य दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अगर समाज को इन समस्याओं से बचाना है तो माताओं को बड़ी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने अमेरिका में जेफरी एपस्टीन के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह के पाप वहां हुए, वैसे ही घटनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में भी सुनने को मिलती रहती हैं। मैकाले की शिक्षा प्रणाली खत्म करने की वकालत बाबा रामदेव ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी देश शिक्षा की गुलामी का दंश झेल रहा है। उन्होंने कहा कि जब 1835 में लॉर्ड मैकाले ने जो शिक्षा प्रणाली लागू की थी, उसके प्रभाव को देश करीब 190 वर्षों से ढो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के ज्यादातर राज्य बोर्ड और केंद्रीय बोर्ड में मैकाले की सोच के लोग तैयार हो रहे हैं। पाठ्यक्रम में कुछ तकनीकी और भाषायी ज्ञान जरूर है, लेकिन उसकी सोच अभी भी गुलामी के दौर की मानसिकता से बाहर नहीं आ पाई है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री भी गुलामी की मानसिकता से मुक्ति की बात करते हैं। इसके लिए मैकाले की शिक्षा प्रणाली को खत्म करना जरूरी है। बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड से जुड़कर बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अब तक एक हजार से ज्यादा स्कूल इस बोर्ड से जुड़ चुके हैं और करीब 10 हजार स्कूलों को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। उनका लक्ष्य देशभर के एक लाख स्कूलों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का है।

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