अन्नपूर्णा रसोई बंद, सीतारसोई में चूल्हे पर बन रहा प्रसाद:35 साल में पहली बार ऐसे हालात, अयोध्या में गुरुकुल तक बंद करने पड़े

एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी का असर अब मंदिरों की रसोई पर भी दिखने लगा है। अयोध्या और वाराणसी में कई मंदिरों और रसोईयों की भोजन व्यवस्था प्रभावित हुई है। कहीं संतों-विद्यार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन चूल्हों पर पकाया जा रहा है, तो कहीं गैस खत्म होने से रसोई अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी है। 35 साल में पहली बार ऐसा है कि वाराणसी के अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई सूनी है। सिलेंडर की कमी से अयोध्या में गुरुकुल तक बंद करने पड़े हैं। दैनिक भास्कर ने अयोध्या और वाराणसी के कई मंदिरों का हाल जाना, पढ़िए रिपोर्ट… पहले अयोध्या के मंदिरों का हाल जानिए
अयोध्या में मंदिरों की भोग व्यवस्था और हजारों संतों-विद्यार्थियों का भोजन गैस सिलेंडर की कमी से प्रभावित होने लगा है। हनुमानगढ़ी, श्रीरामवल्लभाकुंज, लक्ष्मण किला, सियाराम किला आदि मंदिरों में चूल्हों पर मंदिरों का भोजन पक रहा है। अमावा मंदिर स्थित सीता रसोई में भोजन पूरी तरह चूल्हें पर निर्भर है। अमावा राज मंदिर में सीता रसोई इस समय पूरी तरह से चूल्हे पर निर्भर है। राममंदिर से सटे अमावा मंदिर के विशाल मैदान में परंपरागत चूल्हे बनाकर करीब 8 से 10 हजार रामलला के दर्शनार्थयों को दो समय भोजन और नाश्ता दिया जा रहा है। सीता रसोई से जुड़े अमावा मंदिर के प्रबंधक पंकज के अनुसार संस्था पूरी तरह से चूल्हे पर निर्भर हो गई है। लोगों को भरपूर प्रसाद दिया जा रहा है। गैस की समस्या तक चूल्हे पर उनकी निर्भरता बनी रहेगी। भोजन का क्वालिटी पर असर नहीं
हालांकि प्रसिद्ध मंदिरों के भोजन की गुणवत्ता पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी रमेश दास के अनुसार, हनुमानगढ़ी का भोग और भोजन प्रसाद 2 दिनों से चूल्हे पर बन रहा है। हनुमान जी को पहले की तरह भोग लगाया जा रहा है। भोग व्यवस्था में कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। वरिष्ठ पुजारी रमेश दास ने बताया कि हनुमान जी को दही, रबड़ी और इमरती के भोग पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। रामलला का भोजन गैस सिलेंडर पर बन रहा है। यहां भोग प्रसाद पहले की तरह बन रहा है। सिलेंडर की कमी का यहां पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। पुजारी संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि यहां सब कुछ पूरी तरह से ठीकठाक चल रहा है। गुरुकुल वेद पाठशाला में भोजन संकट
प्रभु श्री राम कृपा गुरुकुल वेद पाठशाला गैस सिलेंडर के अभाव में बंद कर दी गई है। इस पाठशाला में नए प्रवेश शुरू होने वाले हैं। लेकिन गैस सिलेंडर न मिलने से अभी पढ़ रहे 20 विद्यार्थियों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। संस्था के प्रधानाध्यापक आचार्य अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि गैस सिलेंडर का अभाव है। न फोन उठ रहा है न सिलेंडर मिल रहा है। श्रीवशिष्ठ गुरुकुल में चूल्हे पर बन रहा खाना
श्रीवशिष्ठ गुरुकुल में दर्शन नगर के 110 वैदिकों (छात्रों) का भोजन चूल्हे पर बन रहा है। अयोध्या धाम के वासुदेवघाट में इसकी मुख्य शाखा के 60 वैदिकों का भोजन गैस का जुगाड़ करके बन रहा है। समस्या आने पर वैदिक श्रीरामवल्लभाकुज आश्रम में भोजन करने पहुंच रहे हैं। या फिर उनका काम मंदिर में होने वाले भंडारे से चल पा रहा है। श्रीवशिष्ठ गुरुकुल के निदेशक डॉ. दिलीप सिंह के अनुसार गैस सिलेंडर की कमी है। विभाग से फोन आ रहे हैं। पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति अब तक नहीं हो सकी है। श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास ने कहा कि गैस सिलेंडर की समस्या है। इसको देखते हुए परंपरागत रसोई, जिसमें भगवान का भोग और संतों का रोज का प्रसाद तैयार करने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल तेज कर दिया गया है। श्री राम जन्मभूमि धर्मार्थ चिकित्सालय के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कोरोना कल के बाद पहली बार इस तरह गैस सिलेंडर की कमी से अयोध्या जूझ रही है। अब वाराणसी की अन्नपूर्णा रसोई का हाल जानिए अन्नपूर्णा रसोई पर ताला, भक्तों को बिना प्रसाद लौटना पड़ा
वाराणसी में भी एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी का असर धार्मिक रसोइयों पर दिखने लगा है। शनिवार को मां अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई में चूल्हा नहीं जला। जिसके कारण अन्नक्षेत्र पहुंचे श्रद्धालुओं को प्रसाद या भोजन नहीं मिल सका। गैस खत्म होने के कारण बांसफाटक स्थित काशी अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र की दूसरी शाखा में भोजन निर्माण का कार्य बंद करना पड़ा। यह काशी का पहला मंदिर माना जा रहा है, जहां गैस सिलेंडर की कमी के चलते श्रद्धालुओं के लिए संचालित रसोई को बंद करना पड़ा है। सुबह माता के दर्शन के बाद बड़ी संख्या में भक्त अन्नक्षेत्र पहुंचे, लेकिन भोजन तैयार न होने के कारण कई लोगों को बिना प्रसाद ही लौटना पड़ा। अन्नक्षेत्र में बाद में भोजन की तैयारी की कोशिश की गई, लेकिन रसोइयों के अनुसार प्रसाद और भोजन निर्माण के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध नहीं था। 35 साल में पहली बार आई ऐसी स्थिति
महंत शंकर पुरी के अनुसार, करीब 35 साल से चल रही अन्नपूर्णा रसोई पहली बार इतने बड़े संकट से जूझ रही है। अन्नक्षेत्र प्रबंधन का कहना है कि भोजन बनाने के लिए एलपीजी गैस उपलब्ध न होने के कारण यह स्थिति आई है। समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द से जल्द भोजन सेवा दोबारा शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… सिलेंडर के लिए बुजुर्ग फूट-फूटकर रोए, VIDEO:बोले- दिल का मरीज, 3 दिन से चक्कर काट रहा यूपी में रसोई गैस सिलेंडर का संकट बढ़ता जा रहा है। कानपुर, गोरखपुर और कुशीनगर समेत कई जिलों में एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रहीं। सिद्धार्थनगर में लोग रात से ही सिलेंडर के लिए गैस एजेंसी के बाहर बैठ गए। कानपुर में गैस एजेंसी के बाहर जमकर हंगामा हुआ। यहां सिलेंडर के लिए लाइन में लगी एक युवती ने एजेंसी कर्मचारी पर मारपीट का आरोप लगाया। पढ़ें पूरी खबर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *