यूपी में सोमवार को भी मौसम अचानक बदला रहा। मौसम विभाग के अनुसार वाराणसी-प्रतापगढ़ समेत 43 जिलों में बादलों की आवाजाही और बिजली गिरने की संभावना है। यहां 40-50kmph की स्पीड से आंधी भी चल सकती है। जबकि आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर समेत 17 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट है। इससे पहले रविवार की सुबह नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, अयोध्या समेत 15 शहरों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हुई। लखनऊ में बूंदाबांदी के साथ धूलभरी आंधी चली। आसमान में काले बादल छा गए। हरदोई में बिजली गिरने से खेत में काम कर रहे किसान की मौत हो गई। उसके 2 बच्चे झुलस गए। सीतापुर में भी बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। हाथरस में बारिश की वजह से कोल्ड स्टोरेज की दीवार गिर गई। यहां रखा 10 हजार बोरी आलू मलबे में दब गया। फिलहाल बारिश और तेज हवा का असर फसलों पर भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में खड़ी फसलें झुक गईं। हालांकि, तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो बांदा सबसे गर्म शहर रहा। यहां अधिकतम तापमान 38.4°C दर्ज किया गया। जबकि 14 मार्च को बांदा का पारा 40°C पार कर गया था। लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल सिंह ने मौसम में हुए अचानक बदलाव की वजह बताई। उन्होंने कहा – एक्टिव पश्चिमी विक्षोभ की वजह से प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश का दौर शुरू हो गया। प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में बारिश के आसार हैं। 40-50 किमी की स्पीड से हवाएं चलेंगी। ओले भी गिरेंगे। 19 मार्च से प्रदेश में एक और विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, इससे भी बारिश-आंधी के आसार हैं। रविवार की मौसम की तस्वीरें- बेमौसम बारिश से फसलों को नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता
बेमौसम बारिश और तेज हवाएं खेतों में खड़ी फसलों के लिए नुकसानदायक हैं। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल पकने की स्थिति में है। ऐसे में बारिश और तेज हवा से बालियां झुक जाती हैं। कटाई के समय दिक्कत होती है। दाने खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार नमी रहने से फसलों में रोग लगने का खतरा भी बढ़ सकता है। हालांकि, हल्की बारिश से कुछ दलहनी और सब्जी वाली फसलों को फायदा भी मिल सकता है। CM योगी बोले- अफसर फील्ड में उतरकर किसानों से बात करें
CM योगी ने रविवार सुबह हुई बारिश से फसलों को हुए नुकसान की जानकारी ली। उन्होंने सभी डीएम और अफसरों को फील्ड में जाकर किसानों से सीधे बात करने और उनकी फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा- राहत आयुक्त भी मैदान में काम कर रहे अफसरों के लगातार संपर्क में रहें। जहां-जहां फसलों को नुकसान हुआ है, उसकी जानकारी लेकर किसानों को समय पर मुआवजा दिलाने की व्यवस्था की जाए। मार्च में ही क्यों बढ़ रही है गर्मी? स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। इसका असर यह है कि अब तापमान ज्यादा तेजी से बढ़ने लगा है। गर्म दिनों की संख्या भी बढ़ रही है। कई बार लू (हीटवेव) का दौर भी पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं। कुछ जगहों पर तापमान 48 डिग्री से ऊपर तक दर्ज किया गया है। लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव IMD के अनुमान के अनुसार, इस साल कुछ इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि कई शहरों में लगातार कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है और लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। कब मानी जाती है हीटवेव? मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए या फिर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। क्या धुंध से फसलों को होगा नुकसान? कृषि विशेषज्ञ विनोद पांडेय ने कहा – इस प्रकार के मौसम का रबी फसलों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। सरसों की फसल के लिए धुंध और नमी माहू कीट के प्रकोप के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि माहू कीट पौधों की कोमल पत्तियों और तनों से रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है और फली व दानों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में कमी आ सकती है। हालांकि, उन्होंने बताया- यही मौसम गेहूं की फसल के लिए अपेक्षाकृत लाभकारी हो सकता है। वातावरण में हल्की ठंड और नमी से गेहूं के पौधों की वृद्धि और दानों के भराव की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। अचानक धुंध की वजह क्या? जानिए सबकुछ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बिहार से मराठवाड़ा के बीच में लो-प्रेशर बना हुआ है। इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में सुबह के वक्त कोहरे जैसे हालात बन रहे हैं। हवा सतह से नीचे चल रही है। इसलिए तापमान में थोड़ी गिरावट देखी गई है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ तापमान में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया- आगामी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की वजह से 14 मार्च से प्रदेश के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी। 15 मार्च से प्रदेश के तराई इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार हल्की बारिश होगी। यह दौरान कुछ दिन चल चलेगा। बाद में तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी।