लुधियाना में गैस सिलेंडर की वेटिंग 7-8 दिन:बुकिंग करने में अब आ रहीं दिक्कतें, कमर्शियल सिलेंडर की कमी से जूझ रहे होटल-रेस्टोरेंट

इजराइल और ईरान के बीच जैसे-जैसे लड़ाई लंबी खिंचती जा रही है वैसे-वैसे एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों में दहशत फैलती जा रही है। गैस एजेंसियां जहां अब तक बुकिंग के बाद दो से तीन दिन में सिलेंडर की सप्लाई दे रहीं थीं, वहीं अब वेटिंग सात से आठ दिन हो गई है। गैस कंपनियों का बुकिंग सिस्टम भी अभी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। ऑनलाइन या फोन के जरिए बुकिंग करने का सिस्टम दिन के समय पूरी तरह से क्रैश हो रहा है। सुबह सात बजे से पहले और रात को नौ बजे के बाद गैस की बुकिंग हो पा रही है। वहीं दूसरी तरफ गैस एजेंसियों में गाड़ियों की बुकिंग की होड़ लगी है। एजेंसियां कंपनियों को लगातार डिमांड भेज रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को समय पर डिलीवरी दी जा सके। जानकारी के मुताबिक कंपनियों ने भी एजेंसियों को बुकिंग के हिसाब से सप्लाई देनी शुरू कर दी। उधर, कमर्शियल सिलेंडर की कमी ने होटल-रेस्टोरेंट व मैरिज पैलस के मालिकों की परेशानी बढ़ा दी। होटल-रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि अब उन्हें सीमित मात्रा में सिलेंडर मिल रहे हैं। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में उन्हें कमर्शियल सिलेंडर हासिल करने में समस्या आ सकती है। उपभोक्ता कोताही न करें, बुकिंग के बाद मिल रहे हैं सिलेंडर लुधियाना गैस एजेंसी डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान अरूण गुप्ता का कहना है कि जिनकी बुकिंग हो रही है उन्हें सिलेंडर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिलेंडर के लिए उन्हें कुछ दिन इंतजार करना होगा। उनका कहना है कि एजेंसियों को भी बुकिंग के हिसाब से डिलीवरी मिल रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि सिलेंडर लेने के लिए कोताही न करें। बुकिंग होते ही सिलेंडर लेकर एजेंसी पहुंच रहे उपभोक्ता अरूण गुप्ता का कहना है कि बुकिंग के बाद होम डिलीवरी चल रही है। उन्होंने कहा कि पैनिक होने के कारण जैसे ही लोगों के सिलेंडर बुक हो रहे हैं वो होम डिलीवरी का इंतजार नहीं कर रहे और सिलेंडर लेकर एजेंसियों में पहुंच रहे हैं जिसकी वजह से भीड़ लग रही है। उन्होंने बताया कि सभी एजेंसियां बुकिंग के हिसाब से होम डिलीवरी पहले की तरह दे रही हैं। बिजली-डीजल पर शिफ्ट हो रहे ढाबे-रेस्टोरेंट ढाबा-रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की सप्लाई जैसे कम होने लगी तो उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था करनी शुरू कर दी। उनका कहना है कि ज्यादातर लोगों ने डीजल व बिजली की भटि्टयों पर काम करना शुरू कर दिया ताकि गैस की खपत कम से कम हो।

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