चंडीगढ़ सेक्टर-36ए के 67 वर्षीय निवासी ने प्रॉपर्टी विवाद में हुई हिंसक घुसपैठ के मामले में पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत चंडीगढ़ पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (PCA) में दे दी है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सेक्टर-36 पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आरोपियों को बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, सबूतों से छेड़छाड़ की और मामले की जांच को कमजोर किया। अदालत में इस केस की सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को होगी। शिकायतकर्ता स्वर्णजीत सिंह सराओं ने बताया कि उन्होंने और उनके परिवार ने 25 जुलाई से 9 अगस्त 2024 के बीच कई बार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर चेतावनी दी थी कि कुछ लोग उनकी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर सकते हैं और परिवार को खतरा है। इसके बावजूद पुलिस ने कोई रोकथाम कार्रवाई नहीं की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मामले में गिरफ्तार एक आरोपी को बिना गैर-जमानती वारंट जारी किए और बिना अन्य कानूनी कार्रवाई किए यूनाइटेड किंगडम जाने दिया गया। गेट फांदकर घर में घुसे, मारपीट का आरोप शिकायत के अनुसार 28 अगस्त 2024 को कुछ लोग गेट फांदकर और ताले तोड़कर उनके घर में घुस आए। आरोप है कि आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी बेटी को हथौड़े से धमकाया। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पीसीआर टीम को स्थिति संभालने के लिए अपने हथियार तक निकालने पड़े। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस के सामने घटना होने के बावजूद उस समय कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बजाय सब-इंस्पेक्टर ने डीडीआर नंबर 48 में इसे सामान्य झगड़ा बताकर कलंद्रा दर्ज कर दिया। 3 हफ्ते बाद दर्ज हुई एफआईआर शिकायत में कहा गया है कि घटना के करीब 3 सप्ताह बाद 13 सितंबर 2024 को लगातार शिकायतें करने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। हरलीन कौर, पिता मनजीत सिंह, निवासी सेक्टर-36ए, चंडीगढ़ के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। एफआईआर में हरलीन कौर सहित अन्य आरोपियों का भी जिक्र है। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 329(4), 115(2), 351(2) और 351(3) के तहत दर्ज किया है। यह एफआईआर 13 सितंबर 2024 को थाना सेक्टर-36, चंडीगढ़ में दर्ज की गई। पुलिस जांच में लापरवाही के आरोप शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हमले और धमकी से जुड़े करीब 40 फोटो सबूत होने के बावजूद उन्हें केस रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा चार्जशीट में कई अहम गवाहों को भी शामिल नहीं किया गया, जिनमें वह पीसीआर अधिकारी भी शामिल है जिसने मौके पर हथियार निकाला था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी का बयान दर्ज किए बिना ही उसके नाम से बयान रिकॉर्ड में डाल दिया गया, जबकि उनका अपना विस्तृत बयान छोटा करके कई आरोपों को हटा दिया गया। स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच या एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही फरार आरोपी को गिरफ्तार करने, हमले में इस्तेमाल हथियार बरामद करने और ट्रायल कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए जाएं।