लुधियाना के सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में भ्रष्टाचार:NOC के बिना रजिस्ट्रियां हो रही, खैहरा ने CM-विजिलेंस को दी थी शिकायत, कार्रवाई जीरो

पंजाब सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की बात कर रही है लेकिन सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में अब भी भ्रष्टाचार चरम पर है। लुधियाना के आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप सिंह खैहरा ने एक माह पहले सीएम भगवंत मान और विजिलेंस को शिकायत दी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कुलदीप खैहरा का कहना है कि सीएमओ और विजिलेंस ने अभी तक इस मामले में जांच तक शुरू नहीं की। कुलदीप खैहरा का दावा है कि लुधियाना के डेहलों सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में सरेआम पैसे लेकर बिना NOC के रजिस्ट्रियां हो रही हैं। खैहरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान व विजिलेंस को 12 फरवरी को ईमेल के माध्यम से शिकायत दी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में डेहलों सब रजिस्ट्रार दफ्तर में 13 दिसंबर से अब तक हुई रजिस्ट्रियों की जांच करने की मांग की। खैहरा का आरोप है कि सब रजिस्ट्रार दफ्तर में भ्रष्टाचार इस कदर है कि बिना पैसे के दस्तावेज पूरे होने पर भी रजिस्ट्री नहीं होती है। दफ्तर के कर्मचारी लोगों की रजिस्ट्रियों को लटका देते हैं। लोग जब बार-बार रजिस्ट्री के लिए चक्कर लगाते हैं तो उनसे पैसों की डिमांड की जाती है। साइन होने के बाद भी अटकाई रजिस्ट्री कुलदीप सिंह ने बताया कि उनकी अपनी रजिस्ट्री 13 दिसंबर 2025 को लिखी गई थी। प्री-स्क्रूटनी में दस्तावेज सही पाए गए और तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर भी हो चुके थे। इसके बावजूद रजिस्ट्री नहीं की गई। उनका कहना है कि रिश्वत की मांग पूरी न होने के कारण उनकी फाइल को अधर में लटका दिया गया है। अप्रूवल के बावजूद रोकी रजिस्ट्री कुलदीप सिंह खैहरा ने बताया कि बिना एनओसी के सभी की रजिस्ट्रियां हो रही थी। उन्होंने भी ऑनलाइन रजिस्ट्री अप्लाई की और अप्रूवल हो गई। तात्कालिक सब रजिस्ट्रार के साइन भी हो गए। लेकिन जब वो रजिस्ट्री की फोटो करवाने गए तो एनओसी न होने की बात कहकर रजिस्ट्री रोक दी गई। खैहरा का कहना कि जब स्क्रूटनी में उनकी फाइल क्लीयर थी तो बाद में क्यों रोकी गई? सीएम को भेजी शिकायत में लगाई रजिस्ट्री की कॉपी कुलदीप खैहरा का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 13 दिसंबर से अब तक हुई रजिस्ट्रियों की जांच की जाए। खैहरा ने कहा कि उन्होंने अपनी रूकी हुई रजिस्ट्री की कॉपी भी सीएम को शिकायत के साथ भेजी है। शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें: विजिलेंस जांच: 13 दिसंबर 2025 के बाद हुई सभी रजिस्ट्रियों की विजिलेंस ब्यूरो से निष्पक्ष जांच कराई जाए। NOC का ऑडिट: जांच हो कि किन रजिस्ट्रियों में NOC की शर्त को नजरअंदाज किया गया और इसके पीछे कौन से अधिकारी शामिल थे। सख्त कार्रवाई: दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज हो। सुरक्षा की मांग: शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस खुलासे के बाद उन्हें किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रताड़ना से सुरक्षा दी जाए।

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