हरपाल रंधावा | चंडीगढ़ कैग की मार्च 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे जनता के पैसे की बर्बादी हुई। रिपोर्ट में सामने आया राज्य में कई सामुदायिक संपत्तियां या तो अधूरी हैं या उपयोग में नहीं लाई जा रहीं है। 11 सामुदायिक संपत्तियों पर 140.86 लाख खर्च होने के बावजूद निर्माण तीन साल बाद भी अधूरा है। करीब 7.89 करोड़ की लागत से बनी 6 संपत्तियां उपयोग के बिना बेकार पड़ी हैं। {शेष पेज 9 पर { जनरल प्रोविडेंट फंड का ब्याज: ₹1,482.62 करोड़। { जनरल और प्राकृतिक आपदा कोष जैसे अन्य रिजर्व फंड्स का ब्याज: ₹817.56 करोड़। { हाईकोर्ट: ₹285.36 करोड़। { नप को करों के हिस्से का हस्तांतरण: ₹100.00 करोड़। { पंजाब स्टेट रोड सेफ्टी फंड: ₹67.97 करोड़। { राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन: योजना के अलग-अलग हिस्सों के तहत (₹47.22 करोड़, ₹14.90 करोड़, ₹13.31 करोड़ व ₹10.88 करोड़) मार्च में निकाले। { पंचायती राज संस्थाओं का फंड: केंद्र ने मार्च 2024 में पंचायती राज संस्थाओं के लिए ₹481.16 करोड़ जारी किए थे, लेकिन पंजाब सरकार ने पूरी राशि 2023-24 में खर्च न कर वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मई 2024) में जाकर जारी की। { वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुसंधान : कुल ₹0.43 करोड़ में से ₹0.40 करोड़ यानी 93.02% मार्च में खर्च हुआ। { स्टाम्प और पंजीकरण: कुल ₹11.09 करोड़ में से ₹10.08 करोड़ यानी 90.89% मार्च में खर्च हुआ। { खाद्य भंडारण व वेयरहाउसिंग कुल ₹33.68 करोड़ में से ₹21.68 करोड़ यानी 64.37% मार्च में खर्च हुआ। { सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर पूंजीगत परिव्यय: 62.37% खर्च मार्च में हुआ। { पुलिस पर पूंजीगत परिव्यय: ₹211.52 करोड़ में से 53.14% (₹112.41 करोड़) खर्च हुआ। { पर्यटन: 52.09% खर्च मार्च में { ग्राम एवं लघु उद्योग: 50.87% खर्च हुआ { सड़क और पुल: 50.43% (₹73.59 करोड़) मार्च में खर्च। समय पर खर्च न होने से शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं प्रभावित पंजाब सरकार की वित्तीय कार्यप्रणाली पर कैग की 2023-24 की रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में कई ऐसी योजनाएं थीं, जिनके लिए ₹100 करोड़ से अधिक का बजट तय किया गया, लेकिन पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान उन पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये या तो वापस सरेंडर कर दिए गए या बिना किसी उपयोग के ही सरकारी खजाने में पड़े रह गए। एक ओर सरकार फंड की कमी की बात करती रही, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों करोड़ रुपये समय पर खर्च ही नहीं किए गए। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर पड़ा, जो कागजों से आगे बढ़ ही नहीं सकीं। कई प्रमुख मदों में कुल बजट का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल मार्च 2024 में खर्च किया गया। नतीजा– मार्च 2024 के अंत तक सरकारी योजनाओं का कुल ₹4,626.71 करोड़ (नोडल एजेंसियों के ₹3,372.86 करोड़ और विभागीय अधिकारियों के ₹1,253.85 करोड़) बैंक खातों में बिना खर्च हुए पड़ा था।